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‘विपत्ति में स्तुति करने पर रक्षा करते हैं ईश्वर’
Updated Tue, 29 May 2018 02:16 AM IST
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‘विपत्ति में स्तुति करने
पर रक्षा करते हैं ईश्वर’
श्रीमद्भागवत कथा में गोपालाचार्य महाराज ने सुनाए प्रसंग अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
शीतला माता के मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को जगदगुरु रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को सुख और दु:ख से जुड़े प्रसंग सुनाए। कहा कि सुख में इंसान भगवान का स्मरण करना भूल जाता है। भगवान की याद परेशानियों में आती है लेकिन स्तुति करने पर भगवान भक्त की रक्षा करते हैं।
गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि कुंती से भगवान ने जब वरदान मांगने को कहा तो वह बोली कि मुझे विपत्ति दीजिए। विपत्ति में प्रभु का स्मरण किया जाता है। सुख दिया तो इंसान भगवान को याद करना भूल जाता है। अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर बाण चलाया तो भगवान ने ही उसकी रक्षा की थी। भीष्म को अंतिम समय में जब प्रभु के दर्शन हुए तभी उन्होंने प्राण त्यागे थे। ऐसे ही कई और उदाहरण है जो भक्त और भगवान के संबंधों को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने भागवत धर्म भी समझाया, कहा कि हमारे में हाथ में माला है तो दूसरे से राष्ट्र की रक्षा का धर्म भी निभाना चाहिए। राष्ट्र की रक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भी समाज के प्रति अपना धर्म निभाने की सलाह दी। कहा कि घरेलू कामकाज के साथ सामाजिक होना भी आवश्यक है। कथा के दौरान स्वामी वीर राघवाचार्य, राकेश रामानुज, शिवगोपाल मिश्रा, शिवसनेही मिश्र, कामेश गुप्ता आदि मौजूद थे।
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पर रक्षा करते हैं ईश्वर’
श्रीमद्भागवत कथा में गोपालाचार्य महाराज ने सुनाए प्रसंग अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
शीतला माता के मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को जगदगुरु रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को सुख और दु:ख से जुड़े प्रसंग सुनाए। कहा कि सुख में इंसान भगवान का स्मरण करना भूल जाता है। भगवान की याद परेशानियों में आती है लेकिन स्तुति करने पर भगवान भक्त की रक्षा करते हैं।
गोपालाचार्य महाराज ने कहा कि कुंती से भगवान ने जब वरदान मांगने को कहा तो वह बोली कि मुझे विपत्ति दीजिए। विपत्ति में प्रभु का स्मरण किया जाता है। सुख दिया तो इंसान भगवान को याद करना भूल जाता है। अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ पर बाण चलाया तो भगवान ने ही उसकी रक्षा की थी। भीष्म को अंतिम समय में जब प्रभु के दर्शन हुए तभी उन्होंने प्राण त्यागे थे। ऐसे ही कई और उदाहरण है जो भक्त और भगवान के संबंधों को मजबूत बनाते हैं।
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उन्होंने भागवत धर्म भी समझाया, कहा कि हमारे में हाथ में माला है तो दूसरे से राष्ट्र की रक्षा का धर्म भी निभाना चाहिए। राष्ट्र की रक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं को भी समाज के प्रति अपना धर्म निभाने की सलाह दी। कहा कि घरेलू कामकाज के साथ सामाजिक होना भी आवश्यक है। कथा के दौरान स्वामी वीर राघवाचार्य, राकेश रामानुज, शिवगोपाल मिश्रा, शिवसनेही मिश्र, कामेश गुप्ता आदि मौजूद थे।
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