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बालिका की हत्या में दो सगे भाइयों समेत तीन को आजीवन कारावास
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
Updated Thu, 03 May 2018 08:33 PM IST
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करीब पांच साल पहले गोली लगने से हुई बालिका की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय मधुलिका चौधरी ने दो सगे भाइयों समेत तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक को 11 हजार और बाकी दो पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह घटना थाना बिनावर क्षेत्र के गांव अमानाबाद में हुई थी। वादी रामेंद्र पुत्र परमेश्वरी ने 29 अगस्त 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने घर के दरवाजा पर खड़ा था। पास में ही उसकी 13 वर्षीय भतीजी रिंकी खड़ी थी। तभी गांव के वर्मा, प्यारे पुत्रगण जागनलाल और वीरेंद्र पुत्र वेदराम जो उससे पहले से दुश्मनी मानते थे आ गए। आते ही उन्होंने गाली देनी शुरू कर दी। तीनों मुजरिम उस समय शराब के नशे मे थे। गाली का विरोध किया तो प्यारे ने उस पर गोली चला दी। जो उसकी भतीजी रिंकी के लगी। गोली की आवाज सुनकर आसपास के कई लोग मौके पर आ गए। हमलावर वहां से भाग खड़े हुए।
रिंकी को परिजन तत्काल ही इलाज को बाहर ले जा रहे थे कि उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। वादी ने हमलावर तीनों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने पूरे मामले की विवेचना करने के बाद कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल की।
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अपर सत्र न्यायाधीश मधुलिका चौधरी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद बालिका की हत्या में दोषी पाए जाने पर मुजरिम वर्मा, वीरेंद्र और प्यारे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्यारे पर 11 हजार और वर्मा तथा वीरेंद्र पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
शराब ने बना दिया हत्यारा
जिस बालिका को मारा गया था, वह कोई पराए नहीं थे। वह भी परिवार के ही सदस्य थे। हालांकि इस घटना में तो यहीं बात सामने आई थी कि मुजरिमों ने शराब पीकर बालिका के चाचा को गालियां दीं। जबकि घटना के मूल में पुरानी रंजिश रही।
कहते हैं कि संपत्ति हो या फिर मामूली बात। मौका मिलने पर खून के रिश्ते भी अपनों की परवाह नहीं करते। फिर चाहे अंजाम कैसा ही हो। ऐसा ही हुआ बिनावर क्षेत्र के गांव अमानाबाद में। करीब पांच साल पहले रिंकी पुत्री वीरपाल की उस समय गोली लगने से मौत हो गई थी जब उसी के परिवार के वर्मा और प्यारे पुत्रगण जागनलाल ने गांव के ही वीरेंद्र के साथ वादी रामेंद्र पर उस वक्त हमला बोल दिया था जब तीनों नशे में धुत थे।
प्रभारी डीजीसी मुकेश बाबू यादव ने बताया कि चूंकि रामेंद्र से उनकी पहले से रंजिश चल रही थी सो दोनों सगे भाइयों ने नशे में चूर होकर रामेंद्र को ठिकाने लगाने का मन बना लिया था। उसी इरादे से उन्होंनेे रामेंद्र को गोली मारी जो रिंकी के माथे में जा घुसी थी। श्री यादव ने बताया कि इस घटना की जांच में पुलिस ने इस तत्व को पकड़ा था कि दोनों पक्षों में किसी बात को लेकर रंजिश चल रही है।
इधर, घटना के जानकार लोग बताते हैं कि दोनों पक्षों में चल रही रंजिश को खत्म कराने के लिए उनके नाते-रिश्तेदारों ने प्रयास भी किया था, लेकिन दोनों पक्षों में बात नहीं बनी थी। जैसा कि लोगों को अंदेशा था वही हुआ और रिंकी की हत्या हो गई। कोर्ट ने जब सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई वादी पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया। कहा था कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था कि दबंगों को जरूर सजा मिलेगी।
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यह घटना थाना बिनावर क्षेत्र के गांव अमानाबाद में हुई थी। वादी रामेंद्र पुत्र परमेश्वरी ने 29 अगस्त 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने घर के दरवाजा पर खड़ा था। पास में ही उसकी 13 वर्षीय भतीजी रिंकी खड़ी थी। तभी गांव के वर्मा, प्यारे पुत्रगण जागनलाल और वीरेंद्र पुत्र वेदराम जो उससे पहले से दुश्मनी मानते थे आ गए। आते ही उन्होंने गाली देनी शुरू कर दी। तीनों मुजरिम उस समय शराब के नशे मे थे। गाली का विरोध किया तो प्यारे ने उस पर गोली चला दी। जो उसकी भतीजी रिंकी के लगी। गोली की आवाज सुनकर आसपास के कई लोग मौके पर आ गए। हमलावर वहां से भाग खड़े हुए।
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रिंकी को परिजन तत्काल ही इलाज को बाहर ले जा रहे थे कि उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। वादी ने हमलावर तीनों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने पूरे मामले की विवेचना करने के बाद कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल की।
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अपर सत्र न्यायाधीश मधुलिका चौधरी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी मुकेश बाबू यादव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद बालिका की हत्या में दोषी पाए जाने पर मुजरिम वर्मा, वीरेंद्र और प्यारे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्यारे पर 11 हजार और वर्मा तथा वीरेंद्र पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
शराब ने बना दिया हत्यारा
जिस बालिका को मारा गया था, वह कोई पराए नहीं थे। वह भी परिवार के ही सदस्य थे। हालांकि इस घटना में तो यहीं बात सामने आई थी कि मुजरिमों ने शराब पीकर बालिका के चाचा को गालियां दीं। जबकि घटना के मूल में पुरानी रंजिश रही।
कहते हैं कि संपत्ति हो या फिर मामूली बात। मौका मिलने पर खून के रिश्ते भी अपनों की परवाह नहीं करते। फिर चाहे अंजाम कैसा ही हो। ऐसा ही हुआ बिनावर क्षेत्र के गांव अमानाबाद में। करीब पांच साल पहले रिंकी पुत्री वीरपाल की उस समय गोली लगने से मौत हो गई थी जब उसी के परिवार के वर्मा और प्यारे पुत्रगण जागनलाल ने गांव के ही वीरेंद्र के साथ वादी रामेंद्र पर उस वक्त हमला बोल दिया था जब तीनों नशे में धुत थे।
प्रभारी डीजीसी मुकेश बाबू यादव ने बताया कि चूंकि रामेंद्र से उनकी पहले से रंजिश चल रही थी सो दोनों सगे भाइयों ने नशे में चूर होकर रामेंद्र को ठिकाने लगाने का मन बना लिया था। उसी इरादे से उन्होंनेे रामेंद्र को गोली मारी जो रिंकी के माथे में जा घुसी थी। श्री यादव ने बताया कि इस घटना की जांच में पुलिस ने इस तत्व को पकड़ा था कि दोनों पक्षों में किसी बात को लेकर रंजिश चल रही है।
इधर, घटना के जानकार लोग बताते हैं कि दोनों पक्षों में चल रही रंजिश को खत्म कराने के लिए उनके नाते-रिश्तेदारों ने प्रयास भी किया था, लेकिन दोनों पक्षों में बात नहीं बनी थी। जैसा कि लोगों को अंदेशा था वही हुआ और रिंकी की हत्या हो गई। कोर्ट ने जब सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई वादी पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया। कहा था कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था कि दबंगों को जरूर सजा मिलेगी।