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ऐसे कैसे हो पाएगा ओडीएफ का सपना पूरा, शहर से सटे मरझिया का यह हाल

Fri, 11 Aug 2017 07:19 PM IST
Updated Fri, 11 Aug 2017 07:19 PM IST
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ऐसे कैसे हो पाएगा ओडीएफ का सपना पूरा, शहर से सटे मरझिया का यह हाल
बदायूं। शहर से सटा जगत ब्लाक का मझिया गांव। दिन शुक्रवार, समय सुबह करीब छह बजे। दो महिलाएं हाथ में पानी का डिब्बा लिए शौच को जा रहीं थीं। वहीं आसपास के खेतों में ग्रामीण काम कर रहे थे। इनकी वजह से महिलाओं को कुछ लज्जा भी आ रही थी। इसके बावजूद उनका खुले में शौच को जाना मजबूरी था। वजह, उनके घर में शौचालय नहीं है।
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केंद्र में मोदी सरकार को आए तीन साल से ज्यादा गुजर गए। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया, तभी से शौचालय बनाने और गांवों को ओडीएफ करने पर जोर है। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, शासन और जिले में बैठे अधिकारी तक शौचालय बनाने और गांवों को ओडीएफ बनाने पर जोर दे रहे हैं। कई बार अभियान भी चलाए जा चुके हैं। ग्राम स्तर पर नोडल अधिकारी भी तैनात हैं। शौचालय बनाने को सरकार की ओर से आर्थिक मदद भी दी जा रही है। बावजूद इसके जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां अब तक शौचालय नहीं हैं या फिर हैं तो पूरे गांव में चार-छह। इनमें से ही जिला मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर बसा मझिया गांव है। 350 परिवारों वाले मझिया गांव की आबादी करीब 3600 है। यहां 1200 वोटर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यहां केवल नौ घरों में ही शौचालय हैं। इनमें से छह परिवार ही शौचालय का प्रयोग करते हैं। बाकी तीन शौचालयों का दूसरे कामों में प्रयोग किया जा रहा है। यानी 341 परिवार खुले में शौच को जाते हैं।
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‘गरीबी बनी मजबूरी’
पूनम ने बताया कि हम मेहनत मजदूरी करके बमुश्किल पेट पालते हैं। शौचालय बनवाने के लिए हमारे पास पैसे ही नहीं है। खेते में शौच तो मजबूरी में जाते हैं। कीड़े-मकौड़े काटने का डर भी लगा रहता है।
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‘नेता और अधिकारी नहीं सुनते’ मझिया गांव निवासी प्रभू दयाल का कहना है कि खुले में शौच के लिए जाते हैं, तो खेत वाले भी बुरा भला कहते हैं। मगर करें तो क्या? खुद शौचालय बनवा नहीं सकते। नेता और अधिकारी गरीबों की सुनते नहीं हैं।
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केवल वोट मांगने के समय आते हैं नेता
कलावती ने बताया कि खेत में शौच करने जाना हमें भी अच्छा नहीं लगता। इज्जत और जान का खतरा भी रहता है। पैरों में कांटे, कंकड़ भी चुभते हैं। नेता तो केवल वोट मांगने के समय आते और बड़ी-बड़ी बातें करके चले जाते हैं।
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नन्हे का कहना है कि प्रधान जी से कई बार कहा। विकास भवन के चक्कर भी लगाए। मगर गरीबों की कहीं कोई सुनवाई नहीं है। सरकार की सब बातें हवा हवाई हैं। दो-चार घरों को छोड़कर यहां सभी खुले में शौच करने जाते हैं।
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वर्जन
शौचालय का पैसा लाभार्थियों को दिलाने के लिए सीडीओ से कई बार मिले हैं। एक-दो दिन में शौचालय बनाने के लिए स्वीकृत हुई रकम गांव वालों को मिल जाएगी। हमारे गांव में 101 शौचालय पहले के बने हुए हैं।
-धर्मवती, प्रधान
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गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए लगातार मेहनत की जा रही है। पात्र लोगों की सूची तैयार की जा रही है। लोग अपने शौचालय बनवाएं। पात्रता के आधार पर पैसा दे दिया जाएगा।

-शशिकांत शर्मा, प्रभारी डीपीआरओ
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मेरी अभी पोस्टिंग हुई है। ज्वाइन करने के बाद दुर्घटना की वजह से छुट्टी पर था। इससे गांव के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। मुझे जो जानकारी है इसके अनुसार मझिया गांव में अब तक 165 शौचालय बन चुके हैं।
-मनोज, पंचायत सचिव
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