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खुले में शौच को जा रहे 30 स्कूलों के बच्चे
Updated Thu, 11 Oct 2018 12:27 AM IST
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बदायूं। जिले को खुले में शौच से मुक्त कराने को पूरा प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। शासन ने पहले जिले को दो अक्तूबर गांधी जयंती पर ओडीएफ करने का फरमान दिया था। इसके लिए गरीब पात्र लोगों के लिए घरों में शौचालय बनवाने को शासन से सहायता राशि दी गई। शासन ने यह भी निर्देश दिए थे कि कोई विद्यालय ऐसा न रहे जहां पर शौचालय की व्यवस्था न हो, लिहाजा शासन की गाइड लाइन के मुताबिक जिले में 68 ऐसे विद्यालयों को चिह्नित किया गया, जहां पढ़ने वाले बच्चे मजबूरी में खुले में शौच को जा रहे हैं। इन विद्यालयों में शौचालय बनवाने का जिम्मा जिला पंचायती राज विभाग को दिया गया लेकिन विभाग ने शायद इसे गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह रही कि आज भी 30 स्कूलों में शौचालय नहीं बन पाए हैं। जाहिर है कि इसमें पंचायत राज विभाग की लापरवाही रही है।
केंद्र और राज्य सरकार का पूरा फोकस स्वच्छ भारत मिशन पर है, प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री खुद श्रमदान के जरिए जनता को स्वच्छता का संदेश दे चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि लोगों को खुले में शौच से जाने से रोका जाए। इसके लिए शासन की योजना के तहत हर गरीब पात्र व्यक्ति को अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये की धनराशि दी गई। यह धनराशि दो किस्तों में दी जाती है। पहली किस्त के रूप में छह हजार रुपये से काम शुरू हो जाने के बाद दूसरी किस्त जारी होती है। हालांकि प्रशासन के दावे यही हैं कि जिले के अधिकतर ग्राम ओडीएफ हो चुके हैं। भले ही प्रशासनिक दावों के विपरीत स्थिति अलग है। शासन-प्रशासन का जोर सरकारी शिक्षण संस्थाओं में भी शौचालय बनवाने पर रहा है। शासन के फरमान के बाद जिला अधिकारी ने संबंधित महकमों के साथ बैठक लेकर शासन की मंशा से अवगत कराया। ऐसे में जब बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ड डीएम को दी, तो यह तथ्य निकल कर आया कि 68 विद्यालय ऐसे थे जिनमें शौचालय नहीं थे। डीएम ने डीपीआरओ कार्यालय को शौचालय बनाने का काम दिया। इसके बाद में विभाग की ओर 38 स्कूलों में शौचालय का निर्माण हो गया। लेकिन अब तक 30 विद्यालय ऐसे है, जहां पर आज तक शौचालय नहीं बन सके हैं।
ये हैं विद्यालय, जहां पर अब तक नहीं हैं शौचालय
-ब्लाक अंबियापुर में पांच, जगत में दो, दातागंज में तीन, सालारपुर में एक, दहगवां में 11, उसावां में नौ, बिसौली में दो, ब्लाक उझानी में एक, उझानी नगर में दो विद्यालय है।
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शासन की मंशा के अनुरूप काम कराया जा रहा है, विद्यालयों के जो भी शौचालय खराब है उन्हें सहीं कराया जा रहा है। जो बनने हैं वहां पर तेजी से निर्माण कराया जाएगा।
-शाशिकांत पांडेय, डीपीआरओ
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केंद्र और राज्य सरकार का पूरा फोकस स्वच्छ भारत मिशन पर है, प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री खुद श्रमदान के जरिए जनता को स्वच्छता का संदेश दे चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि लोगों को खुले में शौच से जाने से रोका जाए। इसके लिए शासन की योजना के तहत हर गरीब पात्र व्यक्ति को अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये की धनराशि दी गई। यह धनराशि दो किस्तों में दी जाती है। पहली किस्त के रूप में छह हजार रुपये से काम शुरू हो जाने के बाद दूसरी किस्त जारी होती है। हालांकि प्रशासन के दावे यही हैं कि जिले के अधिकतर ग्राम ओडीएफ हो चुके हैं। भले ही प्रशासनिक दावों के विपरीत स्थिति अलग है। शासन-प्रशासन का जोर सरकारी शिक्षण संस्थाओं में भी शौचालय बनवाने पर रहा है। शासन के फरमान के बाद जिला अधिकारी ने संबंधित महकमों के साथ बैठक लेकर शासन की मंशा से अवगत कराया। ऐसे में जब बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ड डीएम को दी, तो यह तथ्य निकल कर आया कि 68 विद्यालय ऐसे थे जिनमें शौचालय नहीं थे। डीएम ने डीपीआरओ कार्यालय को शौचालय बनाने का काम दिया। इसके बाद में विभाग की ओर 38 स्कूलों में शौचालय का निर्माण हो गया। लेकिन अब तक 30 विद्यालय ऐसे है, जहां पर आज तक शौचालय नहीं बन सके हैं।
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ये हैं विद्यालय, जहां पर अब तक नहीं हैं शौचालय
-ब्लाक अंबियापुर में पांच, जगत में दो, दातागंज में तीन, सालारपुर में एक, दहगवां में 11, उसावां में नौ, बिसौली में दो, ब्लाक उझानी में एक, उझानी नगर में दो विद्यालय है।
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शासन की मंशा के अनुरूप काम कराया जा रहा है, विद्यालयों के जो भी शौचालय खराब है उन्हें सहीं कराया जा रहा है। जो बनने हैं वहां पर तेजी से निर्माण कराया जाएगा।
-शाशिकांत पांडेय, डीपीआरओ