{"_id":"5b3246684f1c1b684d8b87fa","slug":"21530021480-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले मेंबाढ़ को लेकर सौ गांव संवेदनशील चिह्नित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले मेंबाढ़ को लेकर सौ गांव संवेदनशील चिह्नित
Updated Tue, 26 Jun 2018 07:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो-15,16
बाढ़ को लेकर सौ गांव संवेदनशील चिह्नित
जिले में 29 बाढ़ चौकियां बनीं, शासन से मांगीं तीन मोटर बोट
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। इस साल गर्मी ने बीते कई वर्षों के रिकार्ड ध्वस्त किए हैं। लोग परेशान भी हो गए हैं। गर्मी को देखते हुए इस बार बारिश अच्छी होने की संभावना है। जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जिले में करीब 100 गांव ऐसे चिह्नित किए है, जो बाढ़ की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। बाढ़ से उन गांवों मेें होने वाली तबाही को रोकने के लिए इस बार 29 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं, जहां पर हर समय कर्मचारी और ग्राम स्तर पर गठित टीम मुस्तैदी से तैनात रहेंगी। इतिहास के पन्नों को पलट कर देखने पर प्रशासन ने जो इंतजाम किए हैं। उसमें शासन से तीन मोटर बोट भी मांगी गईं हैं।
जिले में कई साल से सामान्य से कम बरसात हुई है। इस साल मौसम विभाग ने सामान्य से ज्यादा बरसात होने की संभावना जताई है। मौसम विभाग के इस अनुमान को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की पूरी योजना तैयार कर ली है। अभी जिले के लगभग 100 से ज्यादा गांव बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। इसमें सबसे ज्यादा सहसवान, बदायूं और दातागंज क्षेत्र में बाढ़ का खतरा ज्यादा मंडराता है। इसको देखते हुए प्रशासन ने 29 बाढ़ चौकियों को स्थापित किया है। इन चौकियों पर स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास, पशु पालन विभाग, सिंचाई, बाढ़ खंड समेत सभी विभागों के अधिकारियों की तैनाती की गई है।
-----
अनुबंध पर की नावों की व्यवस्था
जिला प्रशासन के पास अभी कोई भी नाव सही हालत में नहीं है। इसको लेकर इस बार प्रशासन ने बदायूं तहसील के लिए 20, सहसवान तहसील के लिए आठ और दातागंज तहसील के लिए छह नावों का अधिग्रहण किया है। साथ ही तीन मोटर बोट की शासन से मांग की हैं।
विज्ञापन
----
यह रहेगी व्यवस्था
पेयजल व्यवस्था, पशुओं के चारे की व्यवस्था, मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ्य, मनुष्यों, पशुओं तथा मकानों आदि हानि होने पर, खाद्य, रोजगार, सुरक्षा की व्यवस्था, शासकीय अनुदान का वितरण एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति।
----
बाढ़ सुरक्षा चौकियां
सहसवान, धापड़, मालपुर ततैरा, आंतर, औरंगाबाद टप्पा जामनी, कछला भूडा भदरौल, कादरचौक, रसूलपुर पुठी, बदायूं, चौसिंगा, हुसैनपुर खेड़ा, गंडाह, पढ़ेली, कमां, समरेर, गलहौती, डांडी, आदमपुर बिसरिया, नगरिया खन्नू, हजरतपुर, सरेली, भुण्डी, कटरा सहादतगंज, हथनी भूड, उसहैत, उसावां, अकबरपुर, पथरामई।
--------------
क्या बोले लोग
--
फोटो-17-
बाढ़ आने से सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान होता है। अगर प्रशासन इसको लेकर अभी से काम करना शुरू कर दे और बाढ़ के आने का इंतजार न करें, तो परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
-कप्तान सिंह, धापड़
---
फोटो-18-
2013 की बाढ़ में गांव पूरी तरह से तबाह हो गया था। गांव के सभी लोगों को जहां जगह मिली, वहां पर बांध दिया गया। प्रशासन ऐसी नौबत आने ही क्यों देता है। अगर वह पहले से तैयारी करे तो काफी हद तक नियंत्रण हो सकता है।
- गुड्डन, टाटपुर
---
फोटो-19-
अभी तो प्रशासन की तैयारियों पूरी है लेकिन वक्त आने पर सब कम हो जाता है। यह हर साल का काम है। केवल दिखावा किया जाता है। अगर काम करना है तो पहलेे से करें।
-वेदप्रकाश, पूर्व प्रधान टाटपुर
--
फोटो-20-
कागजों में सभी प्रकार का काम समय से पहले पूरा हो जाता है। जबकि हकीकत बिल्कुल ही अलग होती है। जो आमजन के लिए मुश्किल खड़ा कर देती है। जिस का दर्द लोगों को तमाम उम्र याद रहता है।
-जसपाल साहू, रसूलपुर बेला
-----------
बाढ़ को लेकर प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। शासन के दिशा-निर्देशों पर काम किया जा रहा है। साथ ही बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी गई हैं। वहीं गांवों में टीम भी गठित कर दी है। जो लगातार बाढ़ आने की जानकारी देती रहेंगी।
-महेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
विज्ञापन
बाढ़ को लेकर सौ गांव संवेदनशील चिह्नित
जिले में 29 बाढ़ चौकियां बनीं, शासन से मांगीं तीन मोटर बोट
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। इस साल गर्मी ने बीते कई वर्षों के रिकार्ड ध्वस्त किए हैं। लोग परेशान भी हो गए हैं। गर्मी को देखते हुए इस बार बारिश अच्छी होने की संभावना है। जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जिले में करीब 100 गांव ऐसे चिह्नित किए है, जो बाढ़ की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। बाढ़ से उन गांवों मेें होने वाली तबाही को रोकने के लिए इस बार 29 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं, जहां पर हर समय कर्मचारी और ग्राम स्तर पर गठित टीम मुस्तैदी से तैनात रहेंगी। इतिहास के पन्नों को पलट कर देखने पर प्रशासन ने जो इंतजाम किए हैं। उसमें शासन से तीन मोटर बोट भी मांगी गईं हैं।
जिले में कई साल से सामान्य से कम बरसात हुई है। इस साल मौसम विभाग ने सामान्य से ज्यादा बरसात होने की संभावना जताई है। मौसम विभाग के इस अनुमान को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की पूरी योजना तैयार कर ली है। अभी जिले के लगभग 100 से ज्यादा गांव बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। इसमें सबसे ज्यादा सहसवान, बदायूं और दातागंज क्षेत्र में बाढ़ का खतरा ज्यादा मंडराता है। इसको देखते हुए प्रशासन ने 29 बाढ़ चौकियों को स्थापित किया है। इन चौकियों पर स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास, पशु पालन विभाग, सिंचाई, बाढ़ खंड समेत सभी विभागों के अधिकारियों की तैनाती की गई है।
विज्ञापन
-----
अनुबंध पर की नावों की व्यवस्था
जिला प्रशासन के पास अभी कोई भी नाव सही हालत में नहीं है। इसको लेकर इस बार प्रशासन ने बदायूं तहसील के लिए 20, सहसवान तहसील के लिए आठ और दातागंज तहसील के लिए छह नावों का अधिग्रहण किया है। साथ ही तीन मोटर बोट की शासन से मांग की हैं।
विज्ञापन
----
यह रहेगी व्यवस्था
पेयजल व्यवस्था, पशुओं के चारे की व्यवस्था, मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ्य, मनुष्यों, पशुओं तथा मकानों आदि हानि होने पर, खाद्य, रोजगार, सुरक्षा की व्यवस्था, शासकीय अनुदान का वितरण एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति।
----
बाढ़ सुरक्षा चौकियां
सहसवान, धापड़, मालपुर ततैरा, आंतर, औरंगाबाद टप्पा जामनी, कछला भूडा भदरौल, कादरचौक, रसूलपुर पुठी, बदायूं, चौसिंगा, हुसैनपुर खेड़ा, गंडाह, पढ़ेली, कमां, समरेर, गलहौती, डांडी, आदमपुर बिसरिया, नगरिया खन्नू, हजरतपुर, सरेली, भुण्डी, कटरा सहादतगंज, हथनी भूड, उसहैत, उसावां, अकबरपुर, पथरामई।
--------------
क्या बोले लोग
--
फोटो-17-
बाढ़ आने से सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान होता है। अगर प्रशासन इसको लेकर अभी से काम करना शुरू कर दे और बाढ़ के आने का इंतजार न करें, तो परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
-कप्तान सिंह, धापड़
---
फोटो-18-
2013 की बाढ़ में गांव पूरी तरह से तबाह हो गया था। गांव के सभी लोगों को जहां जगह मिली, वहां पर बांध दिया गया। प्रशासन ऐसी नौबत आने ही क्यों देता है। अगर वह पहले से तैयारी करे तो काफी हद तक नियंत्रण हो सकता है।
- गुड्डन, टाटपुर
---
फोटो-19-
अभी तो प्रशासन की तैयारियों पूरी है लेकिन वक्त आने पर सब कम हो जाता है। यह हर साल का काम है। केवल दिखावा किया जाता है। अगर काम करना है तो पहलेे से करें।
-वेदप्रकाश, पूर्व प्रधान टाटपुर
--
फोटो-20-
कागजों में सभी प्रकार का काम समय से पहले पूरा हो जाता है। जबकि हकीकत बिल्कुल ही अलग होती है। जो आमजन के लिए मुश्किल खड़ा कर देती है। जिस का दर्द लोगों को तमाम उम्र याद रहता है।
-जसपाल साहू, रसूलपुर बेला
-----------
बाढ़ को लेकर प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। शासन के दिशा-निर्देशों पर काम किया जा रहा है। साथ ही बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी गई हैं। वहीं गांवों में टीम भी गठित कर दी है। जो लगातार बाढ़ आने की जानकारी देती रहेंगी।
-महेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व