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अब नकद भुगतान नहीं कर सकेंगे प्रधान जी
Updated Sun, 17 Dec 2017 11:33 PM IST
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बदायूं। शासन ने अब ग्राम पंचायत स्तर को भी कैशलेस करने की व्यवस्था की गई है। ग्राम पंचायत का कोई भी काम अब नकद भुगतान से नहीं होगा। सामान्य कामों के लिए भी भुगतान बैंक ट्रांजेक्शन के माध्यम से किया जा सकेगा। शासन ने घोटालों को रोकने के लिए यह व्यवस्था की है। माना जा रहा है कि इसमें ज्यादा पारदर्शिता रहेगी।
नए वित्तीय वर्ष से सभी ग्राम पंचायतें पूरी तरह से कैशलेस हो जाएंगी। इस नई कैशलेस व्यवस्था की वजह से काम करने की तरीकों में बदलाव आएगा। जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और घोटालों को रोका जा सकेगा। कैशलेस व्यवस्था के बाद में सीधा रुपये (प्रधान व सचिव) ग्राम पंचायत के खातों में आया करेगा। उसके बाद संबंधित ठेकेदार के खातों में रुपये भेजा सकेगा। वहीं अगर ग्राम पंचायत सीधे मजदूर से काम कराती है, तो उसका भी रुपया संबंधित मजदूर के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। उसे नकद पेमेंट नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक अलग से सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसमें हर विकास कार्य की जानकारी देनी होगी। वहीं, इसके लिए जारी और भुगतान की गई धनराशि की भी पूरी जानकारी देनी होगी।
इंसेट--
पहले ग्राम पंचायत का कुछ रुपये सीधे लखनऊ से संबंधित खाते में जाता था। बाकी रुपये जिला कोषागार के खाते में भेजा जाता था। उसके बाद में संबंधित ग्राम पंचायत को दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब पूरा रुपये ग्राम पंचायत के खाते में सीधे लखनऊ से भेजा जाएगा।
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इंसेट--
पहले ग्राम पंचायत की ओर से पांच हजार रुपये तक पेमेंट नकद कर दिया जाता था। पांच हजार से ज्यादा का पेमेंट चेक या खातों में ट्रांसफर किया जाता था, लेकिन अब ग्राम पंचायत की ओर से कोई भी पेमेंट नकद नहीं किया जाया करेगा। वह सीधे संबंधित ठेकेदार या मजदूर के खाते में जाया करेगा।
वर्जन
शासन की मंशा के अनुरूप काम किया जाएगा। पहले धनराशि जिला कोषागार में आती थी, उसके बाद में संबंधित ग्राम पंचायतों के खाते में जाती थी, लेकिन अब यह सीधा रुपये लखनऊ से ग्राम पंचायतों के खातों में पहुंचेगा। वहीं से इसकी मॉनीटरिंग होगी। इसके लिए साफ्टवेयर बनाया गया है। संबंधित ग्राम पंचायत को आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। उसमें काम की प्रगति व खर्च किए गए रुपये का हिसाब की जानकारी देनी होगी। वहीं, ग्राम पंचायत की ओर से ठेकेदार या मजदूर को नकद पेमेंट नहीं किया जाएगा।
- राजेश कुमार मौर्य, डीपीआरओ
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नए वित्तीय वर्ष से सभी ग्राम पंचायतें पूरी तरह से कैशलेस हो जाएंगी। इस नई कैशलेस व्यवस्था की वजह से काम करने की तरीकों में बदलाव आएगा। जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और घोटालों को रोका जा सकेगा। कैशलेस व्यवस्था के बाद में सीधा रुपये (प्रधान व सचिव) ग्राम पंचायत के खातों में आया करेगा। उसके बाद संबंधित ठेकेदार के खातों में रुपये भेजा सकेगा। वहीं अगर ग्राम पंचायत सीधे मजदूर से काम कराती है, तो उसका भी रुपया संबंधित मजदूर के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। उसे नकद पेमेंट नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक अलग से सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसमें हर विकास कार्य की जानकारी देनी होगी। वहीं, इसके लिए जारी और भुगतान की गई धनराशि की भी पूरी जानकारी देनी होगी।
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पहले ग्राम पंचायत का कुछ रुपये सीधे लखनऊ से संबंधित खाते में जाता था। बाकी रुपये जिला कोषागार के खाते में भेजा जाता था। उसके बाद में संबंधित ग्राम पंचायत को दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब पूरा रुपये ग्राम पंचायत के खाते में सीधे लखनऊ से भेजा जाएगा।
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पहले ग्राम पंचायत की ओर से पांच हजार रुपये तक पेमेंट नकद कर दिया जाता था। पांच हजार से ज्यादा का पेमेंट चेक या खातों में ट्रांसफर किया जाता था, लेकिन अब ग्राम पंचायत की ओर से कोई भी पेमेंट नकद नहीं किया जाया करेगा। वह सीधे संबंधित ठेकेदार या मजदूर के खाते में जाया करेगा।
वर्जन
शासन की मंशा के अनुरूप काम किया जाएगा। पहले धनराशि जिला कोषागार में आती थी, उसके बाद में संबंधित ग्राम पंचायतों के खाते में जाती थी, लेकिन अब यह सीधा रुपये लखनऊ से ग्राम पंचायतों के खातों में पहुंचेगा। वहीं से इसकी मॉनीटरिंग होगी। इसके लिए साफ्टवेयर बनाया गया है। संबंधित ग्राम पंचायत को आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। उसमें काम की प्रगति व खर्च किए गए रुपये का हिसाब की जानकारी देनी होगी। वहीं, ग्राम पंचायत की ओर से ठेकेदार या मजदूर को नकद पेमेंट नहीं किया जाएगा।
- राजेश कुमार मौर्य, डीपीआरओ