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Budaun News: धूल फांक रहे हैं सरकारी अस्पतालों के लिए 60 लाख से खरीदे गए 16 वेंटिलेटर

Fri, 15 Mar 2024 02:50 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 Mar 2024 02:50 AM IST
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16 ventilators purchased for Rs 60 lakh for government hospitals are gathering dust
बदायूं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत देखनी है तो राजकीय मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में आइए। सिर में गंभीर चोट, हार्ट अटैक सहित अन्य गंभीर रोगों के मरीज निजी अस्पतालों में जाने के लिए विवश हैं। लापरवाही का आलम यह है कि सीएचसी, पीएचसी और मेडिकल कॉलेज के लिए कोरोना काल में खरीदे गए साठ लाख रुपये से अधिक कीमत के 16 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
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सरकारी अस्पतालों हर दिन 20-25 गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर न चलने की वजह से रेफर किया जा रहा है। वेंटिलेटर चलाने के लिए न तो टेक्नीशियन हैं और न ही अब वेंटिलेटर चलने की स्थिति में है। अगर मरीज वेंटिलेटर पर आ गया तो उसका खर्च सामान्य व्यक्ति कई दिनों तक नहीं उठा सकता है। कारण ये कि वेंटिलेटर पर निजी अस्पताल में एक मरीज पर 24 घंटे में 1500-2000 हजार रुपये खर्च होते हैं। सरकारी अस्पताल में सिर्फ बेड की ही मामूली फीस ली जाती है। कई अस्पतालों में यह सुविधा निशुल्क है।
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केस- एक



इलाज संभव पर करना पड़ रहा रेफर

कुछ दिन पहले ही कांशीराम कॉलोनी नवादा निवासी राजू पर कुछ लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया था। सिर और कान के पास गंभीर चोट लगने से वह बेहोश हो गए थे। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर करना पड़ा, क्योंकि यहां वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिल पा रही थी।
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केस दो
सिर में गंभीर चोट, रेफर हुआ बच्चा

दो वर्षीय सिफ़ा के सिर में छत से गिर जाने के कारण गंभीर चोट आई थी। उसे मंगलवार सुबह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। वेंटिलेटर की व्यवस्था न होने के कारण उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ रेफर किया गया। यदि वेंटिलेटर की सुविधा होती तो जान बचाने के लिए अलीगढ़ तक भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ती।

कोरोना कॉल में खरीदे गए थे वेंटिलेटर

कोरोना काल में तीन बार में 16 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। इनमें नार्मल, फेस मास्क और मैकेनिकल वेटिंलेटर शामिल हैं। नार्मल श्रेणी के वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ से सवा दो लाख रुपये। फेस मास्क श्रेणी की 5.70 लाख रुपये व मैकेनिकल वेंटिलेटर की कीमत छह लाख रुपये से अधिक है।


इन मरीजों को पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत

सिर और सीने में गंभीर चोट, हार्ट अटैक, लकवा, लीवर और किडनी के काम नहीं करने व ऑपरेशन करने के बाद कुछ मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है।
वर्जन
कोरोना काल में वेंटिलेटर खरीदे गए थे। इनमें से 14 वेंटिलेटर सीएचसी व पीएचसी पर लगाए गए। जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में एक-एक वेंटिलेटर लगे हैं। सभी वेंटिलेटर की स्थिति देखी जाएगी। डेंगू-मलेरिया फैलने से पहले इनको ठीक कराया जाएगा। - डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ
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