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अधिकारी अंजान, सेहत से खिलवाड़ बगैर डॉक्टर के चल रहा हजरतपुर अस्पताल
Updated Wed, 03 Oct 2018 11:57 PM IST
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दातागंज। जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का हर सरकार द्वारा वायदा किया जाता है। हाल के कुछ दिनों में क्षेत्र में तेज बुखार समेत अन्य संक्रामक रोगों से दर्जनों लोगों की मौत भी हो चुकी है। मगर हजरतपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कई माह से डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। यहां तैनात दो वार्ड ब्वाय ही मरीजों का इलाज करते हैं। जाहिर है कि क्षेत्र की जनता के स्वास्थ्य से यहां पर खिलबाड़ किया जा रहा है।
तहसील क्षेत्र में हजरतपुर बड़ा गांव हैं। थाने से चंद कदम पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। यह अस्पताल इस वक्त बदहाल है। अस्पताल में छह-सात माह से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। खास बात तो यह है कि क्षेत्र में तेज बुखार के अलावा कई अन्य जानलेवा बीमारियां फैलीं हुई हैं। दर्जनों लोगों की मौत भी हो चुकी है। बीमारियों पर नियंत्रण पाने को लखनऊ की टीमों को लगाया गया, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर को तैनात नहीं किया गया। यहां पर मात्र दो वार्ड ब्वाय ही तैनात हैं। वही अस्पताल को खोलते हैं और मरीजों का इलाज करते हैं। क्षेत्र के लोग कहते हैं कि अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के बारे में अनेक बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई है, लेकिन किसी ने उन्हें दूर करने के प्रयास नहीं किए हैं।
वर्जन-
डॉक्टरों की कमी है। विभाग द्वारा डॉक्टरों की तैनाती के संबंध में समय-समय पर शासन को पत्र भेजे जाते हैं। डॉक्टरों के आने पर अस्पताल में तैनाती की जाएगी।
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- डॉ. मंजीत सिंह, एसीएमओ
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तहसील क्षेत्र में हजरतपुर बड़ा गांव हैं। थाने से चंद कदम पर ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। यह अस्पताल इस वक्त बदहाल है। अस्पताल में छह-सात माह से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। खास बात तो यह है कि क्षेत्र में तेज बुखार के अलावा कई अन्य जानलेवा बीमारियां फैलीं हुई हैं। दर्जनों लोगों की मौत भी हो चुकी है। बीमारियों पर नियंत्रण पाने को लखनऊ की टीमों को लगाया गया, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर को तैनात नहीं किया गया। यहां पर मात्र दो वार्ड ब्वाय ही तैनात हैं। वही अस्पताल को खोलते हैं और मरीजों का इलाज करते हैं। क्षेत्र के लोग कहते हैं कि अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं के बारे में अनेक बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई है, लेकिन किसी ने उन्हें दूर करने के प्रयास नहीं किए हैं।
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वर्जन-
डॉक्टरों की कमी है। विभाग द्वारा डॉक्टरों की तैनाती के संबंध में समय-समय पर शासन को पत्र भेजे जाते हैं। डॉक्टरों के आने पर अस्पताल में तैनाती की जाएगी।
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- डॉ. मंजीत सिंह, एसीएमओ