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सच्चे मन से जो भी आता है मां के द्वार, पूरी होती है हर मुराद
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वजीरगंज (बदायूं)। आंवला रोड पर स्थित राजराजेश्वरी मंगला माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। सच्चे मन से जो भक्त यहां शीश नवाने आता है उसकी हर मुराद पूरी होती है। ऐतिहासिक दृष्टि से मंदिर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके संबंध में कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। वर्तमान में यहां देवी का विशाल मेला चल रहा है, जिसमें हजारों लोग प्रतिदिन दर्शन करने आते हैं। यहां काफी संख्या में लोग मुंडन कराने आते हैं तो लकड़ी का सामान भी लोगों को आकर्षित करता है।
मंदिर के इतिहास पर नजर डालें तो कहा जाता है कि यह सिद्धपीठ द्वापर युग से भी पहले का है। आंवला रोड पर नगर से करीब डेढ़ किमी दूर टीले पर माता का विशाल भव्य मंदिर है। यह टीला और माता का दरबार मुख्य सड़क से लगभग 150 मीटर दूर है। ये अभिलेखों में गैर आबाद मई भवानीगंज के रकबे में दर्ज है। मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार बने हैं। प्राचीन ब्रह्मदेव अर्थात पीपल का वृक्ष भी मंदिर के इतिहास का साक्षी है। परिसर के मध्य में स्थित माता का मंदिर, पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न मूर्ति के रूप में साक्षात महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती के रूप में विराजमान हैं। मंदिर पर प्रत्येक सोमवार को भक्तों का तांता लगता है। यहां के पुजारी कल्लू बताते हैं कि माता रानी के दरबार में बहुत दूर-दूर से हजारों भक्तगण आते हैं और माता रानी को चुनरी व नारियल चढ़ाते हैं। उनका परिवार सात पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहा है। महंत नारायण गिरी कहते हैं कि यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। इसका द्वापर युग के इतिहास में वर्णन मिलता है। बताया जाता है कि पांडवों ने भी अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ समय व्यतीत किया था। वह बताते हैं कि माता रानी के दर्शन का लाभ तभी मिलता है जब श्रद्धालु बरी बाबा के दर्शन करते हैं। 2017-18 में नगर पंचायत द्वारा बनवाया गया रेन बसेरा इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है।
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मंदिर के इतिहास पर नजर डालें तो कहा जाता है कि यह सिद्धपीठ द्वापर युग से भी पहले का है। आंवला रोड पर नगर से करीब डेढ़ किमी दूर टीले पर माता का विशाल भव्य मंदिर है। यह टीला और माता का दरबार मुख्य सड़क से लगभग 150 मीटर दूर है। ये अभिलेखों में गैर आबाद मई भवानीगंज के रकबे में दर्ज है। मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार बने हैं। प्राचीन ब्रह्मदेव अर्थात पीपल का वृक्ष भी मंदिर के इतिहास का साक्षी है। परिसर के मध्य में स्थित माता का मंदिर, पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न मूर्ति के रूप में साक्षात महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती के रूप में विराजमान हैं। मंदिर पर प्रत्येक सोमवार को भक्तों का तांता लगता है। यहां के पुजारी कल्लू बताते हैं कि माता रानी के दरबार में बहुत दूर-दूर से हजारों भक्तगण आते हैं और माता रानी को चुनरी व नारियल चढ़ाते हैं। उनका परिवार सात पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहा है। महंत नारायण गिरी कहते हैं कि यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। इसका द्वापर युग के इतिहास में वर्णन मिलता है। बताया जाता है कि पांडवों ने भी अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ समय व्यतीत किया था। वह बताते हैं कि माता रानी के दर्शन का लाभ तभी मिलता है जब श्रद्धालु बरी बाबा के दर्शन करते हैं। 2017-18 में नगर पंचायत द्वारा बनवाया गया रेन बसेरा इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है।
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