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गैंगस्टर एक्ट में दो को पांच-पांच साल का सश्रम कारावास
Updated Thu, 27 Sep 2018 11:57 PM IST
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गैंगस्टर एक्ट में दो लोगों को पांच-पांच साल का सश्रम कारावास
20 साल पुराने मुकदमे में कोर्ट ने दिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। गैंगस्टर एक्ट के 20 साल पुराने मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश/गैंगस्टर कोर्ट नरेंद्र कुमार ने दो आरोपियों को मुजरिम करार देते हुए पांच-पांच साल कड़ी कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला थाना दातागंज का है। एसएसआई ब्रजराज सिंह ने नौ अक्तूबर 1998 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह अपनी पुलिस पार्टी के साथ वांछित अपराधियों की तलाश में थे। पुलिस पार्टी थाना क्षेत्र के गांव नौनी टिकन्ना पहुंची तो मालूम हुआ कि गांव के नौशे, छुट्टन खां पुत्रगण लल्लू खां, तवारक पुत्र मुबारक अली, इकरार पुत्र अनवार खां का एक संगठित गिरोह है। यह गिरोह जनता में भय और आतंक फैलाकर और लूट, अपहरण, हत्या जैसे गंभीर अपराध करके अवैध तरीके से धन की उगाही करता है। इस मामले से पहले नौशे और उसके गिरोह पर गांव के मानपाल की अपहरण कर हत्या, पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमले और अपहरण के कई मामले दर्ज थे। पुलिस ने विवेचना के बाद नौशे, तवारक, इकरार, और छुट्टन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इकरार और छुट्टन की दौराने विचरण मृत्यु हो गई।
गैंगस्टर कोर्ट न्यायाधीश नरेंद्र कुमार चतुर्थ ने पत्रावली का अवलोकन किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद नौशे और तवारक को मुजरिम करार देते हुये पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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20 साल पुराने मुकदमे में कोर्ट ने दिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। गैंगस्टर एक्ट के 20 साल पुराने मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश/गैंगस्टर कोर्ट नरेंद्र कुमार ने दो आरोपियों को मुजरिम करार देते हुए पांच-पांच साल कड़ी कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला थाना दातागंज का है। एसएसआई ब्रजराज सिंह ने नौ अक्तूबर 1998 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह अपनी पुलिस पार्टी के साथ वांछित अपराधियों की तलाश में थे। पुलिस पार्टी थाना क्षेत्र के गांव नौनी टिकन्ना पहुंची तो मालूम हुआ कि गांव के नौशे, छुट्टन खां पुत्रगण लल्लू खां, तवारक पुत्र मुबारक अली, इकरार पुत्र अनवार खां का एक संगठित गिरोह है। यह गिरोह जनता में भय और आतंक फैलाकर और लूट, अपहरण, हत्या जैसे गंभीर अपराध करके अवैध तरीके से धन की उगाही करता है। इस मामले से पहले नौशे और उसके गिरोह पर गांव के मानपाल की अपहरण कर हत्या, पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमले और अपहरण के कई मामले दर्ज थे। पुलिस ने विवेचना के बाद नौशे, तवारक, इकरार, और छुट्टन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इकरार और छुट्टन की दौराने विचरण मृत्यु हो गई।
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गैंगस्टर कोर्ट न्यायाधीश नरेंद्र कुमार चतुर्थ ने पत्रावली का अवलोकन किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद नौशे और तवारक को मुजरिम करार देते हुये पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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