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Budaun News: अभिलेखों के सत्यापन में फंसे 12 सामुदायिक चिकित्सा अधिकारी
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आवेदन के वक्त दिए प्रपत्रों में सत्यापन के दौरान मिल रही काफी भिन्नता
जिला अस्पताल में प्रशिक्षण ले रहे 50 सीएचओ, पांच सदस्यों की टीम ने शुरू की जांच
अब तक जिले के 153 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर की जा चुकी है सीएचओ की तैनाती
बदायूं। सरकार ने चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) बनाए हैं। इन पर सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों (सीएचओ) की तैनाती की जा रही है। 12 सीएचओ ऐसे हैं जिन्होंने आवेदन के समय जो अभिलेख दिए थे, सत्यापन के दौरान उनमें भिन्नता मिल रही है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद पांच सदस्यों की समिति इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
जिले में कुल 352 एचडब्ल्यूसी हैं। इनमें अब तक 153 एचडब्ल्यूसी पर सीएचओ की तैनाती हो चुकी है। एचडब्ल्यूसी पर तैनाती से पहले सीएचओ को जिला अस्पताल में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान ही उनका सत्यापन किया जाता है। जिला अस्पताल में इन दिनों प्रशिक्षण ले रहे 50 सीएचओ के अभिलेखों के सत्यापन का काम चल रहा है। इसमें 12 सीएचओ ऐसे मिले हैं जिनके अभिलेखों का मिलान नहीं हो रहा। नौकरी के लिए ऑनलाइन आवेदन के वक्त इन सीएचओ ने जो प्रमाण पत्र दिए थे। सत्यापन में जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य अभिलेखों में भिन्नता पाई जा रही है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. सनोज मिश्रा, जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कप्तान सिंह, ईएनटी डॉ. एस सिद्दीकी, डीपीएम एनएचएम कमलेश शर्मा और स्टाफ नर्स शशी गंगवार की कमेटी ने यह गड़बड़ी पकड़ी है।
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सत्यापन के समय सबसे ज्यादा मामले जाति प्रमाण पत्र संबंधी सामने आ रहे हैं। कुछ जाति प्रमाण पत्र फर्जी भी निकले हैं। आवेदन के साथ दिए गए अन्य दस्तावेजों में भी गड़बड़ी सामने आई है। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने वाले इन सीएचओ के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक गई है। फिलहाल मामले में कमेटी की जांच चल रही है।
मंगलवार को सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने भी पूरा प्रकरण संज्ञान ले लिया है। उन्होंने कुछ सीएचओ के दस्तावेजों का सीएचओ के आवेदन के लिए जारी गाइड लाइन का मिलान भी किया। इसमें भी गड़बड़ी सामने आई है।
डीपीएम बोले- लखनऊ मीटिंग में हूं,
नोडल ने रिसीव नहीं की कॉल
एचडब्ल्यूसी की स्थापना आयुष्मान भारत मिशन के तहत की गई है। मिशन के तहत एनएचएम के अंतर्गत सीएचओ की तैनाती की जा रही है। सीएचओ के संबंध में बात करने पर एनएचएम के डीपीएम और सत्यापन समिति के नामित सदस्य कमलेश शर्मा ने कहा कि वह अभी लखनऊ मीटिंग में हैं। बाद में बात करेंगे। नोडल अधिकारी सुनील कुमार को कॉल करने पर उन्होंने कहा कि वह जिले में नए हैं। वह केवल आयुष्मान भारत मिशन के तहत आयुष्मान कार्डों का काम देखते हैं। इस संबंध में नोडल अधिकारी डॉ. सनोज मिश्रा सकते हैं। कई बार कॉल करने पर भी डॉ. मिश्रा ने कॉल रिसीव नहीं की।
जिला अस्पताल में 50 सीएचओ का प्रशिक्षण चल रहा है। पांच सदस्यों की समिति जांच और सत्यापन में लगी है। सत्यापन के दौरान 12 सीएचओ के अभिलेखों में गड़बड़ी मिली हैं। जाति प्रमाण पत्र संबंधी गड़बड़ी ज्यादा है। जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कह सकता हूं।
- डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस
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जिला अस्पताल में प्रशिक्षण ले रहे 50 सीएचओ, पांच सदस्यों की टीम ने शुरू की जांच
अब तक जिले के 153 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर की जा चुकी है सीएचओ की तैनाती
बदायूं। सरकार ने चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) बनाए हैं। इन पर सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों (सीएचओ) की तैनाती की जा रही है। 12 सीएचओ ऐसे हैं जिन्होंने आवेदन के समय जो अभिलेख दिए थे, सत्यापन के दौरान उनमें भिन्नता मिल रही है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद पांच सदस्यों की समिति इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
जिले में कुल 352 एचडब्ल्यूसी हैं। इनमें अब तक 153 एचडब्ल्यूसी पर सीएचओ की तैनाती हो चुकी है। एचडब्ल्यूसी पर तैनाती से पहले सीएचओ को जिला अस्पताल में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान ही उनका सत्यापन किया जाता है। जिला अस्पताल में इन दिनों प्रशिक्षण ले रहे 50 सीएचओ के अभिलेखों के सत्यापन का काम चल रहा है। इसमें 12 सीएचओ ऐसे मिले हैं जिनके अभिलेखों का मिलान नहीं हो रहा। नौकरी के लिए ऑनलाइन आवेदन के वक्त इन सीएचओ ने जो प्रमाण पत्र दिए थे। सत्यापन में जाति प्रमाण पत्र समेत अन्य अभिलेखों में भिन्नता पाई जा रही है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. सनोज मिश्रा, जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कप्तान सिंह, ईएनटी डॉ. एस सिद्दीकी, डीपीएम एनएचएम कमलेश शर्मा और स्टाफ नर्स शशी गंगवार की कमेटी ने यह गड़बड़ी पकड़ी है।
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सत्यापन के समय सबसे ज्यादा मामले जाति प्रमाण पत्र संबंधी सामने आ रहे हैं। कुछ जाति प्रमाण पत्र फर्जी भी निकले हैं। आवेदन के साथ दिए गए अन्य दस्तावेजों में भी गड़बड़ी सामने आई है। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने वाले इन सीएचओ के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक गई है। फिलहाल मामले में कमेटी की जांच चल रही है।
मंगलवार को सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम ने भी पूरा प्रकरण संज्ञान ले लिया है। उन्होंने कुछ सीएचओ के दस्तावेजों का सीएचओ के आवेदन के लिए जारी गाइड लाइन का मिलान भी किया। इसमें भी गड़बड़ी सामने आई है।
डीपीएम बोले- लखनऊ मीटिंग में हूं,
नोडल ने रिसीव नहीं की कॉल
एचडब्ल्यूसी की स्थापना आयुष्मान भारत मिशन के तहत की गई है। मिशन के तहत एनएचएम के अंतर्गत सीएचओ की तैनाती की जा रही है। सीएचओ के संबंध में बात करने पर एनएचएम के डीपीएम और सत्यापन समिति के नामित सदस्य कमलेश शर्मा ने कहा कि वह अभी लखनऊ मीटिंग में हैं। बाद में बात करेंगे। नोडल अधिकारी सुनील कुमार को कॉल करने पर उन्होंने कहा कि वह जिले में नए हैं। वह केवल आयुष्मान भारत मिशन के तहत आयुष्मान कार्डों का काम देखते हैं। इस संबंध में नोडल अधिकारी डॉ. सनोज मिश्रा सकते हैं। कई बार कॉल करने पर भी डॉ. मिश्रा ने कॉल रिसीव नहीं की।
जिला अस्पताल में 50 सीएचओ का प्रशिक्षण चल रहा है। पांच सदस्यों की समिति जांच और सत्यापन में लगी है। सत्यापन के दौरान 12 सीएचओ के अभिलेखों में गड़बड़ी मिली हैं। जाति प्रमाण पत्र संबंधी गड़बड़ी ज्यादा है। जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कह सकता हूं।
- डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस