{"_id":"5b26a9e84f1c1b614d8b6d48","slug":"11529260520-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंखे तोड़ रहे दम, गर्मी में मरीजों का हाल बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंखे तोड़ रहे दम, गर्मी में मरीजों का हाल बेहाल
Updated Mon, 18 Jun 2018 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो-- 6 से 10
पंखे तोड़ रहे दम, गर्मी में मरीजों का हाल बेहाल
जिला अस्पताल: वार्डों में बढ़ी उमस, सफाई व्यवस्था ध्वस्त मरीज हाथ के पंखे डुलाने को मजबूर, कई बैड पर लगे हैं निजी पंखे
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की वैसे भी हालत खराब है, वे अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। ऊपर से जिला अस्पताल की लचर व्यवस्था ने उनको अधिक परेशानी में डाल दिया है। इस भीषण गर्मी में इमरजेंसी और वार्डों में लगे पंखे मर-मर कर चल रहे हैं। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे इन पंखों की शक्ति खत्म हो चुकी है, उन्हें जबरदस्ती घुमाया जा रहा है। इनकी चाल कम होने से ये शोपीस बनकर रह गए हैं। इनसे मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इस व्यवस्था से परेशान कई मरीजों ने खुद के पंखे लगा लिए हैं। बाकी मरीज हाथ का पंखा डुलाने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। साफ-सफाई से लेकर रोजाना अलग-अलग मामलों की आए दिन पोल खुल रही है। यहां जुआ-शराब तो आम बात हो गई है। मरीजों पर ध्यान न देना, जैसे यहां के स्टाफ की आदत बन चुकी है। कहने को यहां डॉक्टर और कर्मचारी तैनात हैं, परंतु अव्यवस्थाओं को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मनमर्जी से काम कर रहे हैं। इनका कार्य ठीक तो ठीक, नहीं तो कोई कहने वाला या जवाब मांगने वाला तक नहीं है। शायद यही वजह है कि मरीजों की शिकायतें खत्म नहीं होती और वे अव्यवस्थाओं के चलते आधा-अधूरा इलाज करवाकर अस्पताल से चले जाते हैं। वैसे यहां उन्हीं लोगों की चलती है, जो नेता या अधिकारी के करीबी होते हैं। डॉक्टर से लेकर कर्मचारी भी उन्हीं की बात मानते हैं। बाकी मरीजों की स्थिति क्या है। इस पर कोई गौर नहीं देता। अस्पताल के वार्डों में फैली अव्यवस्थाएं शायद इसी का परिणाम हैं। कहीं पंखा नहीं चल रहा है तो कहीं गंदगी की भरमार है। अस्पताल में मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। सभी वार्डों में दो-एक बैड छोड़कर सभी फुल चल रहे हैं। इन वार्डों में अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित मरीज अपना इलाज करा रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल के वार्डों में उमस भी बढ़ गई है। अस्पताल के वार्डों में पंखे तो लगे हैं लेकिन इनके लगे होने से न लगे होने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इनकी चाल इतनी धीमी हो गई है कि मरीजों तक इनकी हवा नहीं पहुंच रही है। इसके अलावा वार्डों में फैली गंदगी मरीजों को परेशानी में डाले हुए है। गर्मी, उमस से परेशान मरीजों को दुर्गंध की वजह से सांस लेना दूभर हो गया है। इस समस्या के बारे में कई मरीजों ने सीएमएस और डॉक्टरों से शिकायत भी की थी परंतु आज तक पंखे सही नहीं हो सके और न ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त हुई।
--
नर्क की जिंदगी जी रहे बर्न पेशेंट
इस गर्मी के मौसम में जले मरीज नर्क की जिंदगी जी रहे हैं। वैसे इनके लिए जिला अस्पताल में अलग से बर्न वार्ड बना हुआ है। इनको गर्मी में ठंड का अहसास हो सके इसके लिए दो एसी लगवाया गए हैं। परंतु यह देखने के लिए हैं। इनमें एक एसी पूरी तरह से खराब है और दूसरा भी दम तोड़ रहा है। बाकी पंखे भी मरीजों को कोई खास राहत नहीं दे रहे हैं। ऊपर से इस वार्ड में दुर्गंध पूरी तरह से रम गई है।
विज्ञापन
---------
आवारा कुत्तों ने वार्डों को बनाया घर
जिला अस्पताल में वैसे भी एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म हो गई है। वहीं आवारा कुत्तों ने अस्पताल के वार्डों को अपना घर बना लिया है। मरीजों को साफ-सफाई चाहिए तो कुत्ते यहां बीमारी फैलाने का काम कर रहे हैं। अन्य जानवर भी अस्पताल में आना बंद नहीं हुए हैं। दिनभर परिसर में घूमते हुए दिखाई देते हैं।
---------------
क्या कहते हैं मरीज
फोटो-11
हम कल अस्पताल में भर्ती हुए थे। शाम डॉक्टर ने देखा था। रात जो स्टाफ था, बुलाने पर तुरंत आया, परंतु दिन वाले ने तो झांक कर तक नहीं देखा। पेट में दर्द होता रहा। एक नर्स कुर्सी पर बैठीं नाश्ता करती रहीं।
-रमेश, पडौलिया
--
फोटो-12
मेरी सास राजवती एक जून को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती र्हुइं थीं। उनके चोट आई थी। तभी से इनका इलाज चल रहा है लेकिन अब तक कोई फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर तक उन्हें देखने के लिए नहीं आते।
-नीरज, घटपुरी
--
फोटो-13
मुझे तीन दिन से सर्दी, बुखार और खांसी है। तभी से मैं इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हूं। न तो मेरे स्वास्थ्य ठीक हो रहा है और न ही यहां की व्यवस्थाएं ठीक हो रहीं हैं। और तो और बेड को चादर तक नहीं दी है।
-सुखलाल, दातागंज
--
फोटो-14
इमरजेंसी वार्ड में सबसे अधिक उमस बन रही है। ऊपर से पंखे भी धोखा दे रहे हैं और कुछ दुर्गंध सी आ रही है। ऐसा लगता है कि जैसे तीमारदारी करते-करते मैं स्वयं बीमार पड़ जाऊंगा। साफ-सफाई हो तो कुछ राहत हो।
-रिंकी, गद्दी चौक
वर्जन-
जिला अस्पताल में पंखे हल्के चलने का मुख्य कारण लो वोल्टेज है। अब वोल्टेज सही आए तो पंखे भी तेज चलें और मरीजों को परेशानी नहीं हो। बाकी साफ-सफाई और अन्य समस्याओं का निपटारा शिकायत आने पर खत्म करा दिया जाता है।
-डॉ. आरएस यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल
विज्ञापन
पंखे तोड़ रहे दम, गर्मी में मरीजों का हाल बेहाल
जिला अस्पताल: वार्डों में बढ़ी उमस, सफाई व्यवस्था ध्वस्त मरीज हाथ के पंखे डुलाने को मजबूर, कई बैड पर लगे हैं निजी पंखे
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की वैसे भी हालत खराब है, वे अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। ऊपर से जिला अस्पताल की लचर व्यवस्था ने उनको अधिक परेशानी में डाल दिया है। इस भीषण गर्मी में इमरजेंसी और वार्डों में लगे पंखे मर-मर कर चल रहे हैं। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे इन पंखों की शक्ति खत्म हो चुकी है, उन्हें जबरदस्ती घुमाया जा रहा है। इनकी चाल कम होने से ये शोपीस बनकर रह गए हैं। इनसे मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इस व्यवस्था से परेशान कई मरीजों ने खुद के पंखे लगा लिए हैं। बाकी मरीज हाथ का पंखा डुलाने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। साफ-सफाई से लेकर रोजाना अलग-अलग मामलों की आए दिन पोल खुल रही है। यहां जुआ-शराब तो आम बात हो गई है। मरीजों पर ध्यान न देना, जैसे यहां के स्टाफ की आदत बन चुकी है। कहने को यहां डॉक्टर और कर्मचारी तैनात हैं, परंतु अव्यवस्थाओं को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मनमर्जी से काम कर रहे हैं। इनका कार्य ठीक तो ठीक, नहीं तो कोई कहने वाला या जवाब मांगने वाला तक नहीं है। शायद यही वजह है कि मरीजों की शिकायतें खत्म नहीं होती और वे अव्यवस्थाओं के चलते आधा-अधूरा इलाज करवाकर अस्पताल से चले जाते हैं। वैसे यहां उन्हीं लोगों की चलती है, जो नेता या अधिकारी के करीबी होते हैं। डॉक्टर से लेकर कर्मचारी भी उन्हीं की बात मानते हैं। बाकी मरीजों की स्थिति क्या है। इस पर कोई गौर नहीं देता। अस्पताल के वार्डों में फैली अव्यवस्थाएं शायद इसी का परिणाम हैं। कहीं पंखा नहीं चल रहा है तो कहीं गंदगी की भरमार है। अस्पताल में मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। सभी वार्डों में दो-एक बैड छोड़कर सभी फुल चल रहे हैं। इन वार्डों में अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित मरीज अपना इलाज करा रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल के वार्डों में उमस भी बढ़ गई है। अस्पताल के वार्डों में पंखे तो लगे हैं लेकिन इनके लगे होने से न लगे होने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इनकी चाल इतनी धीमी हो गई है कि मरीजों तक इनकी हवा नहीं पहुंच रही है। इसके अलावा वार्डों में फैली गंदगी मरीजों को परेशानी में डाले हुए है। गर्मी, उमस से परेशान मरीजों को दुर्गंध की वजह से सांस लेना दूभर हो गया है। इस समस्या के बारे में कई मरीजों ने सीएमएस और डॉक्टरों से शिकायत भी की थी परंतु आज तक पंखे सही नहीं हो सके और न ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त हुई।
विज्ञापन
--
नर्क की जिंदगी जी रहे बर्न पेशेंट
इस गर्मी के मौसम में जले मरीज नर्क की जिंदगी जी रहे हैं। वैसे इनके लिए जिला अस्पताल में अलग से बर्न वार्ड बना हुआ है। इनको गर्मी में ठंड का अहसास हो सके इसके लिए दो एसी लगवाया गए हैं। परंतु यह देखने के लिए हैं। इनमें एक एसी पूरी तरह से खराब है और दूसरा भी दम तोड़ रहा है। बाकी पंखे भी मरीजों को कोई खास राहत नहीं दे रहे हैं। ऊपर से इस वार्ड में दुर्गंध पूरी तरह से रम गई है।
विज्ञापन
---------
आवारा कुत्तों ने वार्डों को बनाया घर
जिला अस्पताल में वैसे भी एंटी रैबीज वैक्सीन खत्म हो गई है। वहीं आवारा कुत्तों ने अस्पताल के वार्डों को अपना घर बना लिया है। मरीजों को साफ-सफाई चाहिए तो कुत्ते यहां बीमारी फैलाने का काम कर रहे हैं। अन्य जानवर भी अस्पताल में आना बंद नहीं हुए हैं। दिनभर परिसर में घूमते हुए दिखाई देते हैं।
---------------
क्या कहते हैं मरीज
फोटो-11
हम कल अस्पताल में भर्ती हुए थे। शाम डॉक्टर ने देखा था। रात जो स्टाफ था, बुलाने पर तुरंत आया, परंतु दिन वाले ने तो झांक कर तक नहीं देखा। पेट में दर्द होता रहा। एक नर्स कुर्सी पर बैठीं नाश्ता करती रहीं।
-रमेश, पडौलिया
--
फोटो-12
मेरी सास राजवती एक जून को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती र्हुइं थीं। उनके चोट आई थी। तभी से इनका इलाज चल रहा है लेकिन अब तक कोई फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर तक उन्हें देखने के लिए नहीं आते।
-नीरज, घटपुरी
--
फोटो-13
मुझे तीन दिन से सर्दी, बुखार और खांसी है। तभी से मैं इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हूं। न तो मेरे स्वास्थ्य ठीक हो रहा है और न ही यहां की व्यवस्थाएं ठीक हो रहीं हैं। और तो और बेड को चादर तक नहीं दी है।
-सुखलाल, दातागंज
--
फोटो-14
इमरजेंसी वार्ड में सबसे अधिक उमस बन रही है। ऊपर से पंखे भी धोखा दे रहे हैं और कुछ दुर्गंध सी आ रही है। ऐसा लगता है कि जैसे तीमारदारी करते-करते मैं स्वयं बीमार पड़ जाऊंगा। साफ-सफाई हो तो कुछ राहत हो।
-रिंकी, गद्दी चौक
वर्जन-
जिला अस्पताल में पंखे हल्के चलने का मुख्य कारण लो वोल्टेज है। अब वोल्टेज सही आए तो पंखे भी तेज चलें और मरीजों को परेशानी नहीं हो। बाकी साफ-सफाई और अन्य समस्याओं का निपटारा शिकायत आने पर खत्म करा दिया जाता है।
-डॉ. आरएस यादव, सीएमएस, जिला अस्पताल