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‘अस्पताल बंद है! अगले दिन आकर दवा लेना’
Updated Mon, 03 Sep 2018 11:25 PM IST
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‘अस्पताल बंद है! अगले
दिन आकर दवा लेना’
बुखार से तपते भाई-बहन के इलाज में टालमटोल करते रहे स्वास्थ्य कर्मी
चिकित्साधीक्षक ने भनक लगने पर इमरजेंसी में कराया इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। पीरवट्टू में सगे भाई-बहन राकेश पाली के बेटे मोहन (आठ) और पांच वर्षीय बेटी उपासना की हालत बिगड़ गई। दंपति दोनों बच्चों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे तो अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। स्वास्थ्य कर्मियों से उन्होंने बच्चों की हालत का हवाला देकर फरियाद की तो उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। यहां तक कह दिया गया कि अस्पताल बंद है अगले दिन आना। वह गनीमत रही जो एक रहमदिल इंसान ने चिकित्साधीक्षक निरंजन सिंह को फोन कर दिया। चिकित्साधीक्षक ने डॉक्टर को भेजकर दोनों बच्चों का इमरजेंसी में इलाज शुरू कराया।
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कछला और बुटला में भी नहीं बैठते डॉक्टर
उझानी। जिले में बुखार से मौतों के बाद भी सेहत महकमें की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। कछला प्राथमिक स्वास्थ्य और बुटला न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास इलाके के मरीज पहुंचते हैं लेकिन इलाके के लोगों की माने तो डॉक्टर नियमित नहीं पहुंचते। दोनों ही स्थानों पर फार्मेसिस्ट के सहारे काम चला लिया जाता है। कछला निवासी हरीओम ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बजाय मरीजों को निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है।
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‘अस्पताल बंद है! अगले
दिन आकर दवा लेना’
बुखार से तपते भाई-बहन के इलाज में टालमटोल करते रहे स्वास्थ्य कर्मी
चिकित्साधीक्षक ने भनक लगने पर इमरजेंसी में कराया इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। पीरवट्टू में सगे भाई-बहन राकेश पाली के बेटे मोहन (आठ) और पांच वर्षीय बेटी उपासना की हालत बिगड़ गई। दंपति दोनों बच्चों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे तो अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। स्वास्थ्य कर्मियों से उन्होंने बच्चों की हालत का हवाला देकर फरियाद की तो उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। यहां तक कह दिया गया कि अस्पताल बंद है अगले दिन आना। वह गनीमत रही जो एक रहमदिल इंसान ने चिकित्साधीक्षक निरंजन सिंह को फोन कर दिया। चिकित्साधीक्षक ने डॉक्टर को भेजकर दोनों बच्चों का इमरजेंसी में इलाज शुरू कराया।
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कछला और बुटला में भी नहीं बैठते डॉक्टर
उझानी। जिले में बुखार से मौतों के बाद भी सेहत महकमें की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। कछला प्राथमिक स्वास्थ्य और बुटला न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास इलाके के मरीज पहुंचते हैं लेकिन इलाके के लोगों की माने तो डॉक्टर नियमित नहीं पहुंचते। दोनों ही स्थानों पर फार्मेसिस्ट के सहारे काम चला लिया जाता है। कछला निवासी हरीओम ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बजाय मरीजों को निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ता है।
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