{"_id":"66d79d273f5791c8300fc084","slug":"111-babies-born-in-15-days-70-born-in-candlelight-badaun-news-c-123-1-sbly1018-125217-2024-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: 15 दिन में जन्मे 111 बच्चे, मोमबत्ती की रोशनी में पैदा हुए 70","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: 15 दिन में जन्मे 111 बच्चे, मोमबत्ती की रोशनी में पैदा हुए 70
Wed, 04 Sep 2024 05:05 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Wed, 04 Sep 2024 05:05 AM IST
विज्ञापन
उसहैत के पीएचसी का प्रसव केंद्र। संवाद
उसहैत/बदायूं। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र उसहैत के हालात स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवालियां निशान खड़ा कर रहे हैं। यहां प्रसव केंद्र में पिछले 15 दिनों में 111 बच्चों का जन्म हुआ। चौकाने वाली बात यह है कि इनमें से 70 बच्चे रात में मोमबत्ती की रोशनी में पैदा हुए। व्यवस्था ने भले ही किनारा कर लिया हो लेकिन जिंदगियों को बचाने के लिए अगर किसी की तारीफ की जा सकती है तो वह हैं यहां की स्टाफ नर्से।
उसहैत के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चार स्टाफ नर्स तैनात हैं। इंद्रा, विनीता, पूजा, प्रमिला। चिकित्सा प्रभारी के रूप में डाक्टर रजिया की तैनाती है। लेकिन वह शाम चार बजे तक चली जाती हैं। स्टाफ नर्सों की छह-छह घंटे के हिसाब से ड्यूटी लगती है। प्रसव केंद्र में एक समय में एक ही स्टाफ नर्स रहती है इसके अलावा एक दाई रहती हैं। दाई को संविदा पर रखा गया है। कोई डाक्टर रात में नहीं रहती। अगर प्रसव के दौरान किसी की हालत बिगड़ी तो वह भगवान भरोसे है। चार दिन पहले यहां स्टाफ नर्स इंद्रा ने दाई के सहयोग से एक ही रात में पांच डिलीवरी कराई। इनमें चार लड़कियां पैदा हुई व एक लड़का। खास बात यह है कि बिजली न होने पर मोमबत्ती की रोशनी में स्टाफ नर्स पूरी रात डिलीवरी कराती रही।
पड़ताल करने पर पता चला कि 15 से 31 अगस्त तक यहां प्रसव केंद्र में 111 डिलीवरी स्टाफ नर्सों ने कराईं। इनमें 70 डिलीवरी रात में हुईं। सभी सकुशल हुईं। चूंकि रात में अधिकांश समय बिजली नहीं रहती लिहाजा मोमबत्ती के सहारे प्रसव कराने पड़ते हैं। स्टाफ नर्सों का कहना है कि कई बार कहा गया लेकिन यहां जेनरेटर की व्यवस्था नहीं हो पाई। कोई अधिकारी हाल देखने नहीं आया।
विज्ञापन
स्वास्थ्य केंद्र पर जेनरेटर तक नहीं
स्वास्थ्य केंद्र पर 2020 तक एक जेनरेटर था। जिसको कोविड महामारी के दौरान आसफ़पुर पीएचसी पर शिफ्ट कर दिया गया। 2020 के बाद से ही बिजली न होने पर रात में यहां मोमबत्ती की रोशनी और गर्मी के बीच प्रसव किए जाते हैं। पीएचसी पर एक छोटा इन्वर्टर है, जो महज चार-पांच घंटे ही चल पाता है।
हालत बिगड़ने पर भेज दिया जाता है उसावां सीएचसी
स्टाफ नर्सों ने बताया कि जिन प्रसव को वह सफलतापूर्वक करा लेती है , उन्हीं महिलाओं को यहां रोका जाता है। हालत गंभीर होने पर एंबुलेंस से गर्भवती को उसावां सीएचसी पर भेजा जाता है। वहां से महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
अस्पताल में रोजाना मरीजों को देख रहे हैं। प्रसव कराने का काम स्टाफ नर्स का है। यहां संविदा पर दाई भी रखी गई हैं। अगर किसी गर्भवती की हालत बिगड़ती है तो उसे उसावां सीएचसी रेफर कर दिया जाता है। जेनरेटर के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। - डा. रजिया, प्रभारी स्वास्थ्य केंद्र
विज्ञापन
उसहैत के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चार स्टाफ नर्स तैनात हैं। इंद्रा, विनीता, पूजा, प्रमिला। चिकित्सा प्रभारी के रूप में डाक्टर रजिया की तैनाती है। लेकिन वह शाम चार बजे तक चली जाती हैं। स्टाफ नर्सों की छह-छह घंटे के हिसाब से ड्यूटी लगती है। प्रसव केंद्र में एक समय में एक ही स्टाफ नर्स रहती है इसके अलावा एक दाई रहती हैं। दाई को संविदा पर रखा गया है। कोई डाक्टर रात में नहीं रहती। अगर प्रसव के दौरान किसी की हालत बिगड़ी तो वह भगवान भरोसे है। चार दिन पहले यहां स्टाफ नर्स इंद्रा ने दाई के सहयोग से एक ही रात में पांच डिलीवरी कराई। इनमें चार लड़कियां पैदा हुई व एक लड़का। खास बात यह है कि बिजली न होने पर मोमबत्ती की रोशनी में स्टाफ नर्स पूरी रात डिलीवरी कराती रही।
विज्ञापन
पड़ताल करने पर पता चला कि 15 से 31 अगस्त तक यहां प्रसव केंद्र में 111 डिलीवरी स्टाफ नर्सों ने कराईं। इनमें 70 डिलीवरी रात में हुईं। सभी सकुशल हुईं। चूंकि रात में अधिकांश समय बिजली नहीं रहती लिहाजा मोमबत्ती के सहारे प्रसव कराने पड़ते हैं। स्टाफ नर्सों का कहना है कि कई बार कहा गया लेकिन यहां जेनरेटर की व्यवस्था नहीं हो पाई। कोई अधिकारी हाल देखने नहीं आया।
विज्ञापन
स्वास्थ्य केंद्र पर जेनरेटर तक नहीं
स्वास्थ्य केंद्र पर 2020 तक एक जेनरेटर था। जिसको कोविड महामारी के दौरान आसफ़पुर पीएचसी पर शिफ्ट कर दिया गया। 2020 के बाद से ही बिजली न होने पर रात में यहां मोमबत्ती की रोशनी और गर्मी के बीच प्रसव किए जाते हैं। पीएचसी पर एक छोटा इन्वर्टर है, जो महज चार-पांच घंटे ही चल पाता है।
हालत बिगड़ने पर भेज दिया जाता है उसावां सीएचसी
स्टाफ नर्सों ने बताया कि जिन प्रसव को वह सफलतापूर्वक करा लेती है , उन्हीं महिलाओं को यहां रोका जाता है। हालत गंभीर होने पर एंबुलेंस से गर्भवती को उसावां सीएचसी पर भेजा जाता है। वहां से महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
अस्पताल में रोजाना मरीजों को देख रहे हैं। प्रसव कराने का काम स्टाफ नर्स का है। यहां संविदा पर दाई भी रखी गई हैं। अगर किसी गर्भवती की हालत बिगड़ती है तो उसे उसावां सीएचसी रेफर कर दिया जाता है। जेनरेटर के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। - डा. रजिया, प्रभारी स्वास्थ्य केंद्र