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पीसीएफ ने एसआईटी को नहीं सौंपे खाद घोटाले के रिकॉर्ड
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पीसीएफ ने एसआईटी को नहीं सौंपे खाद घोटाले के रिकॉर्ड
बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले को पीसीएफ ने एक मजाक बना लिया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे विभाग कोई कार्रवाई ही नहीं कराना चाहता। घोटाले के संबंध में एसआईटी को कोई रिकॉर्ड नहीं सौंपे गए हैं। एसआईटी द्वारा दो बार रिकॉर्ड मांगे जा चुके हैं, फिर भी आज की कल किया जा रहा है। इससे पुलिस की जांच प्रभावित हो रही है।
करीब पंद्रह दिन पहले प्रकाश में आए तीन करोड़ के खाद घोटाले के मामले में शुरू से लापरवाही बरती जा रही है। इसका पता चलने के बाद विभागीय अधिकारियों को तहरीर देने में ही तीन दिन लग गए थे। जब तहरीर दी गई तो रिपोर्ट दर्ज होने में तीन दिन लगे। इससे विभागीय अधिकारियों को घोटाले के बारे में कब पता चला, इसका आज तक खुलासा नहीं हुआ। घोटालेबाज आपस में मिलीभगत करके तीन करोड़ की खाद कैसे डकार गए, इसका भी पता नहीं चलने दिया। इस मामले को पीसीएफ अधिकारियों के लिए गंभीरता से लेना चाहिए था। जिन्होंने घोटाला किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करानी थी, कार्रवाई को पहल करनी थी लेकिन विभाग द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है। और तो और अब तक घोटाले से संबंधित रिकॉर्ड भी एसआईटी को नहीं सौपे गए हैं। एसआईटी दो बार रिकॉर्ड मांग चुकी है। चार दिन पहले पीसीएफ अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि वह रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं। इसके बावजूद एसआईटी को रिकार्ड नहीं सौंपे गए। सूत्रों की माने तो पीसीएफ के कुछ अधिकारी स्वयं अंदरखाने घोटालेबाजों की मदद कर रहे हैं। इससे एसआईटी की विवेचना लंबित हो रही है।
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बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले को पीसीएफ ने एक मजाक बना लिया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे विभाग कोई कार्रवाई ही नहीं कराना चाहता। घोटाले के संबंध में एसआईटी को कोई रिकॉर्ड नहीं सौंपे गए हैं। एसआईटी द्वारा दो बार रिकॉर्ड मांगे जा चुके हैं, फिर भी आज की कल किया जा रहा है। इससे पुलिस की जांच प्रभावित हो रही है।
करीब पंद्रह दिन पहले प्रकाश में आए तीन करोड़ के खाद घोटाले के मामले में शुरू से लापरवाही बरती जा रही है। इसका पता चलने के बाद विभागीय अधिकारियों को तहरीर देने में ही तीन दिन लग गए थे। जब तहरीर दी गई तो रिपोर्ट दर्ज होने में तीन दिन लगे। इससे विभागीय अधिकारियों को घोटाले के बारे में कब पता चला, इसका आज तक खुलासा नहीं हुआ। घोटालेबाज आपस में मिलीभगत करके तीन करोड़ की खाद कैसे डकार गए, इसका भी पता नहीं चलने दिया। इस मामले को पीसीएफ अधिकारियों के लिए गंभीरता से लेना चाहिए था। जिन्होंने घोटाला किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करानी थी, कार्रवाई को पहल करनी थी लेकिन विभाग द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है। और तो और अब तक घोटाले से संबंधित रिकॉर्ड भी एसआईटी को नहीं सौपे गए हैं। एसआईटी दो बार रिकॉर्ड मांग चुकी है। चार दिन पहले पीसीएफ अधिकारियों द्वारा कहा गया था कि वह रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं। इसके बावजूद एसआईटी को रिकार्ड नहीं सौंपे गए। सूत्रों की माने तो पीसीएफ के कुछ अधिकारी स्वयं अंदरखाने घोटालेबाजों की मदद कर रहे हैं। इससे एसआईटी की विवेचना लंबित हो रही है।
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