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आरक्षण समाप्त करने का षड़यंत्र रच रही सरकार

Wed, 18 Jul 2018 11:25 PM IST
Updated Wed, 18 Jul 2018 11:25 PM IST
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आरक्षण समाप्त करने का षड़यंत्र रच रही सरकार
फोटो -18
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‘आरक्षण समाप्त करने का
षड्यंत्र रच रही सरकार’
संसद में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने पिछड़ों, दलितों, अनुसूचित जनजातियों और अल्पसंख्यकों के आरक्षण पर भेदभाव का मामला बुधवार को संसद में उठाया। उन्होंने यूजीसी के पांच मार्च के सर्कुलर का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न विद्यालयों में 60 प्रतिशत पिछड़ों, 22 प्रतिशत दलितों और 7.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति सहित लगभग 85 प्रतिशत लोगों के साथ विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में अन्याय हो रहा है। सन 1997 में अनुसूचित जाति और 2007 में पिछड़ी जाति के लोगों को आरक्षण मिला था। 2018 में यह आरक्षण बर्दाश्त नहीं हो रहा है। जहां पहले 200 पदों का रोस्टर बना था और विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को सामान्य यूनिट मानकर आरक्षण मिला था। इसे एक षड्यंत्र के तहत समाप्त किया जा रहा है। अभी हाल ही में कई विश्वविद्यालयों के विज्ञापन आए, जिनमें पंजाब विश्वविद्यालय के 58 पदों में मात्र 2, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में 63 में मात्र पांच और कानपुर विश्वविद्यालय में 15 में शून्य, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 113 में मात्र 37, सपूर्णानंद काशी विश्वविद्यालय में 52 मेे मात्र 8, बीएचयू में 99 में 20 पद आरक्षित हैं। केंद्र सरकार दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ होने का खोखला दावा करती है। जबकि सच्चाई यह है कि इन सभी वर्गों के साथ अत्याचार और अन्याय किया जा रहा है।
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