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गंडाह और सादुल्लागंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ जर्जर
Updated Mon, 12 Feb 2018 12:22 AM IST
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सीएचसी
- फोटो : अमर उजाला
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करोड़ों से बने अस्पतालों का नहीं मिल रहा जनता को लाभ
गंडाह और सादुल्लागंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ जर्जर
दातागंज।
तहसील क्षेत्र के अंतर्गत गंडाह और सादुल्लागंज में करोड़ों की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इन अस्पतालों में कभी डॉक्टर नहीं जाते। गंडाह का अस्पताल तो निर्माण के करीब 20 साल बाद भी हस्तांतरित नहीं हुआ है। सो वहां तैनात डॉक्टर गांव में ही एक चौपाल पर बैठकर मरीजों को देखते हैं। इन दोनों अस्पतालों से करीब 40 गांव जुड़े हैं। सो स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने की वजह से लोगों में निराशा है।
सरकार की मंशा हर व्यक्ति को बेहतर इलाज देने की है। सो सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाएं चला रही है। इस साल के बजट में भी सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छी खासी रकम दी है मगर तहसील क्षेत्र के गांव गंडाह में करीब दो दशक पहले बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। कार्यदायी संस्था ने काम करने के बाद भी इसे विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है। भवन जर्जर हो गया है। कैंपस में घास है। गांव के लोग कंडे पथवाते हैं। साथ ही जानवरों को बांधते हैं। यहां पर डॉ.जसपाल चौधरी की नियुक्ति हुई। सो वह अस्पताल भवन के जर्जर होने की वजह से जब भी गांव जाते हैं तब एक चौपाल पर बैठकर मरीजों को देखते हैं।
दूसरा गांव सादुल्लागंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी पूरी तरह जर्जर हो गया है। यहां पर डॉ अशोक राना की तैनाती है। यहां भी स्थिति काफी खराब है।
प्रधान सोहनपाल, पूर्व प्रधान उपदेश अग्निहोत्री, ईश्वरी सिंह, राजपाल सिंह, प्रवेश, चेतराम आदि ने बताया कि गांव सादुल्लागंज के अस्पताल के बारे में कई बार विभागीय अधिकारियों और शासन स्तर पर शिकायतें की गईं हैं मगर किसी ने आज तक ध्यान नहीं दिया है, जबकि इस अस्पताल से करीब 20 गांव जुड़े हैं। लोगों को कोई लाभ नहीं मिला है।
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अस्पताल में जिसकी तैनाती हुई है,उन्हें नियमित आना चाहिए। गंडाह का अस्पताल तो हस्तांतरित ही नहीं हुआ है। कौन सी संस्था ने निर्माण कराया और कब हुआ इस बारे में पता नहीं है । लोगों के लिए यह सफेद हाथी साबित हो रहा है। -डॉ.तहसीन, चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समरेर
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गंडाह और सादुल्लागंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ जर्जर
दातागंज।
तहसील क्षेत्र के अंतर्गत गंडाह और सादुल्लागंज में करोड़ों की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इन अस्पतालों में कभी डॉक्टर नहीं जाते। गंडाह का अस्पताल तो निर्माण के करीब 20 साल बाद भी हस्तांतरित नहीं हुआ है। सो वहां तैनात डॉक्टर गांव में ही एक चौपाल पर बैठकर मरीजों को देखते हैं। इन दोनों अस्पतालों से करीब 40 गांव जुड़े हैं। सो स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने की वजह से लोगों में निराशा है।
सरकार की मंशा हर व्यक्ति को बेहतर इलाज देने की है। सो सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाएं चला रही है। इस साल के बजट में भी सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छी खासी रकम दी है मगर तहसील क्षेत्र के गांव गंडाह में करीब दो दशक पहले बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। कार्यदायी संस्था ने काम करने के बाद भी इसे विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है। भवन जर्जर हो गया है। कैंपस में घास है। गांव के लोग कंडे पथवाते हैं। साथ ही जानवरों को बांधते हैं। यहां पर डॉ.जसपाल चौधरी की नियुक्ति हुई। सो वह अस्पताल भवन के जर्जर होने की वजह से जब भी गांव जाते हैं तब एक चौपाल पर बैठकर मरीजों को देखते हैं।
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दूसरा गांव सादुल्लागंज का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी पूरी तरह जर्जर हो गया है। यहां पर डॉ अशोक राना की तैनाती है। यहां भी स्थिति काफी खराब है।
प्रधान सोहनपाल, पूर्व प्रधान उपदेश अग्निहोत्री, ईश्वरी सिंह, राजपाल सिंह, प्रवेश, चेतराम आदि ने बताया कि गांव सादुल्लागंज के अस्पताल के बारे में कई बार विभागीय अधिकारियों और शासन स्तर पर शिकायतें की गईं हैं मगर किसी ने आज तक ध्यान नहीं दिया है, जबकि इस अस्पताल से करीब 20 गांव जुड़े हैं। लोगों को कोई लाभ नहीं मिला है।
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अस्पताल में जिसकी तैनाती हुई है,उन्हें नियमित आना चाहिए। गंडाह का अस्पताल तो हस्तांतरित ही नहीं हुआ है। कौन सी संस्था ने निर्माण कराया और कब हुआ इस बारे में पता नहीं है । लोगों के लिए यह सफेद हाथी साबित हो रहा है। -डॉ.तहसीन, चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समरेर