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ग्राम पंचायत निधि में 10.65 लाख की वित्तीय अनियमितताएं
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:16 AM IST
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डीपीआरओ का दो सचिवों के लिए कारण बताओ नोटिस
उसावां ब्लाक की ग्राम पंचायत रिजौला का मामला
ब्लॉक उसावां की ग्राम पंचायत की निधि में 10.65 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत सही पाए जाने पर डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत के दो सचिवों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
ग्राम पंचायत रिजोला की निधि से ग्राम पंचायत सचिव रहते हुए राजेश कुमार और नेम सिंह ने लाखों रुपये के कार्य कराए। जिला पंचायत राज अधिकारी से कामों में वित्तीय अनियमितता करके ग्राम निधि में गबन की शिकायत की गई थी। शिकायत की जांच डीपीआरओ ने सहायक विकास अधिकारी पंचायत से कराई। डीपीआरओ के मुताबिक, जांच में पाया गया कि 22 जनवरी 2016 से आठ फरवरी 2016 और छह मार्च से 17 जून 2016 के बीच करीब 10.65 लाख रुपये के काम कराए गए। इस दौरान ग्राम प्रधान के ससुर के ईंट भट्टा को भी भुगतान किया गया। जबकि यह ईंट भट्टा 2015 में ही बंद हो चुका था। शिकायत की जांच में वित्तीय अनियमिताओं की बात प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर दोनों सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि दोनों सचिवों को पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। उनका पक्ष जानने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय ग्राम पंचायत निधि में अनियमितताएं पाए जाने की बात को भी स्वीकार किया है।
उसावां ब्लाक की ग्राम पंचायत रिजौला का मामला
ब्लॉक उसावां की ग्राम पंचायत की निधि में 10.65 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत सही पाए जाने पर डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत के दो सचिवों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
ग्राम पंचायत रिजोला की निधि से ग्राम पंचायत सचिव रहते हुए राजेश कुमार और नेम सिंह ने लाखों रुपये के कार्य कराए। जिला पंचायत राज अधिकारी से कामों में वित्तीय अनियमितता करके ग्राम निधि में गबन की शिकायत की गई थी। शिकायत की जांच डीपीआरओ ने सहायक विकास अधिकारी पंचायत से कराई। डीपीआरओ के मुताबिक, जांच में पाया गया कि 22 जनवरी 2016 से आठ फरवरी 2016 और छह मार्च से 17 जून 2016 के बीच करीब 10.65 लाख रुपये के काम कराए गए। इस दौरान ग्राम प्रधान के ससुर के ईंट भट्टा को भी भुगतान किया गया। जबकि यह ईंट भट्टा 2015 में ही बंद हो चुका था। शिकायत की जांच में वित्तीय अनियमिताओं की बात प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर दोनों सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि दोनों सचिवों को पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। उनका पक्ष जानने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय ग्राम पंचायत निधि में अनियमितताएं पाए जाने की बात को भी स्वीकार किया है।
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