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पत्ती काटकर जोतने को मिलेंगे मल्चर और हल
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पत्ती काटकर जोतने को मिलेंगे मल्चर और हल
बिजनौर। किसानों को गन्ने की पत्ती जलाने से रोकने के लिए गन्ना विभाग अब उन्हें मल्चर और हल उधार देगा। सभी समितियों पर मल्चर उपलब्ध रहेंगे। किसान समिति से जाकर मल्चर लेंगे और पत्ती को जमीन के साथ जोतकर वापस कर देंगे। इसके अलावा किसानों को ट्रैक्टर से चलने वाला एफएनबी हल भी उधार दिया जाएगा। सभी समितियों के अलावा नजीबाबाद सहकारी चीनी मिल पर ये यंत्र उधार मिलेंगे।
किसान गन्ने की छिलाई के बाद पत्ती को जला देते हैं। खासतौर पर गेहूं बोने वाले खेतों में तो पत्ती जला ही दी जाती है। पत्ती जलाने से प्रदूषण तो होता ही है, खाद में प्रयोग की जा सकने वाली पत्ती भी जलकर राख हो जाती है। पिछले साल गन्ना विभाग ने हर गन्ना पर्ची पर पत्ती न जलाने का संदेश लिखा था। इस बार गन्ना समितियों पर गन्ना विभाग मल्चर रखवा रहा है। मल्चर मशीन से पत्ती को खेत के साथ जोता जा सकता है। इससे यह मिट्टी के साथ मिलकर खाद बन जाती है। गन्ना विभाग हर समिति पर दो मल्चर रखवाएगा। इसके अलावा दो एफएनबी हल भी लगवाए जा रहे हैं। किसान मल्चर लेकर समिति से जा सकते हैं और जमीन जोतकर वापस कर देंगे। इसके लिए किसान को गन्ना समिति का सदस्य होना होगा। सभी नौ समितियों के अलावा नजीबाबाद चीनी मिल क्षेत्र के किसानों के लिए दो मल्चर और एक एफएनबी हल अलग से मंगवाए जा रहे हैं।
पैड़ी की पत्ती फूंकते हैं किसान
किसानों के पास करीब सवा लाख हेक्टेअर गन्ने की पैड़ी है। किसान पैड़ी की पत्ती को फूंक देते हैं जबकि यह पत्ती मिट्टी में जुतकर खेत की उर्वरक क्षमता को बढ़ाती है। किसान इस बारे में जागरूक नहीं हो रहे हैं।
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पत्ती न जलाएं किसान
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह का कहना है कि किसानों के लिए समितियों पर मल्चर व एफएनबी हल रखवाए जाएंगे। किसान पत्ती न जलाएं और उसे खेत में जोतें। इससे जमीन की उर्वरा क्षमता बढ़ेगी।
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बिजनौर। किसानों को गन्ने की पत्ती जलाने से रोकने के लिए गन्ना विभाग अब उन्हें मल्चर और हल उधार देगा। सभी समितियों पर मल्चर उपलब्ध रहेंगे। किसान समिति से जाकर मल्चर लेंगे और पत्ती को जमीन के साथ जोतकर वापस कर देंगे। इसके अलावा किसानों को ट्रैक्टर से चलने वाला एफएनबी हल भी उधार दिया जाएगा। सभी समितियों के अलावा नजीबाबाद सहकारी चीनी मिल पर ये यंत्र उधार मिलेंगे।
किसान गन्ने की छिलाई के बाद पत्ती को जला देते हैं। खासतौर पर गेहूं बोने वाले खेतों में तो पत्ती जला ही दी जाती है। पत्ती जलाने से प्रदूषण तो होता ही है, खाद में प्रयोग की जा सकने वाली पत्ती भी जलकर राख हो जाती है। पिछले साल गन्ना विभाग ने हर गन्ना पर्ची पर पत्ती न जलाने का संदेश लिखा था। इस बार गन्ना समितियों पर गन्ना विभाग मल्चर रखवा रहा है। मल्चर मशीन से पत्ती को खेत के साथ जोता जा सकता है। इससे यह मिट्टी के साथ मिलकर खाद बन जाती है। गन्ना विभाग हर समिति पर दो मल्चर रखवाएगा। इसके अलावा दो एफएनबी हल भी लगवाए जा रहे हैं। किसान मल्चर लेकर समिति से जा सकते हैं और जमीन जोतकर वापस कर देंगे। इसके लिए किसान को गन्ना समिति का सदस्य होना होगा। सभी नौ समितियों के अलावा नजीबाबाद चीनी मिल क्षेत्र के किसानों के लिए दो मल्चर और एक एफएनबी हल अलग से मंगवाए जा रहे हैं।
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पैड़ी की पत्ती फूंकते हैं किसान
किसानों के पास करीब सवा लाख हेक्टेअर गन्ने की पैड़ी है। किसान पैड़ी की पत्ती को फूंक देते हैं जबकि यह पत्ती मिट्टी में जुतकर खेत की उर्वरक क्षमता को बढ़ाती है। किसान इस बारे में जागरूक नहीं हो रहे हैं।
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पत्ती न जलाएं किसान
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह का कहना है कि किसानों के लिए समितियों पर मल्चर व एफएनबी हल रखवाए जाएंगे। किसान पत्ती न जलाएं और उसे खेत में जोतें। इससे जमीन की उर्वरा क्षमता बढ़ेगी।