धामपुर। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ की ओर से आयोजित चार दिवसीय समारोह कार्यक्रम के तीसरे दिन नाट्य प्रस्तुति जी जैसी आपकी मर्जी का मंचन किया गया। जिसमें दर्शाया गया कि इक्कीसवीं सदी में आजादी के बाद भी पुरुष प्रधान समाज में आलोचनाओं का दंश झेलने को विवश होना पड़ रहा है।
नगर के एक मंडप में आयोजित नाट्य समारोह के तीसरे दिन बुधवार को अतिथियों भाजपा नेता डाक्टर दीप सौरभ, संगीत नाटक अकादमी की सर्वेक्षण अधिकारी शैलजा कांत ने नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर कार्यक्रम शुभारंभ किया। ईश वंदना के बाद रंग प्रवाह सांस्कृतिक समिति बरेली के कलाकारों ने नाटक जी जैसी आपकी मर्जी का मंचन किया। नाटक के माध्यम से संदेश दिया कि महिलाओं का पौराणिक जमाने से उनका उत्पीड़न किया जाता रहा है। महिलाओं के व्यवहार पर पुरुष प्रधान में जरा जरा सी बातों पर उंगली उठती रही है। महिलाओं को आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है। महिलाओं को व्यवहार को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाएं दी जाती है। पढ़ने का हक, आर्थिक स्वतंत्रता और अपने फैसले खुद लेने का हक आज भी अधिकांश महिलाओं के लिए एक दूसरे से दिखने वाला सपना मात्र ही है। फिर भी इसे अनदेखा किया जाता है। नादिरा जहीर बब्बर द्वारा लिखित, डी प्रसाद (पप्पू वर्मा) के निर्देशन में मंचित नाटक में कलाकार पाखी, प्रदीप, कमला, पुष्पा, अरुण, रिचा जोशी, इलियास गाजी, संजीव कुमार ने अभिनय किया। कार्यक्रम में हिरदेश प्रताप सिंह, सुभाष जोशी, अजय चौहान, मोहित सिंह, लक्ष्मी नारायण, प्रदीप कुमार सक्सेना, राजकुमार गोस्वामी, प्रकाश गंगवार, मानेश यादव, रजत जोशी रहे। कार्यक्रम में नाट्यदीप फाउंडेशन के समन्वयक आदित्य सिंह, उदयराज सिंह, तेजेंद्र मौर्य, राजवीर माथुर, प्रकाश, आर्यकांत, अरुण कुमार, विजय जैन, दिनेश चंद नवीन रहे। संचालन नाट्यदीप फाउंडेशन के सचिव राजेंद्र चौधरी ने किया।