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गन्ने के साथ उड़द, मूंग की खेती से बढ़ेगी भूमि की उर्वरक क्षमता

Mon, 07 Feb 2022 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 11:54 PM IST
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With sugarcane, urad, moong cultivation will increase income
गन्ने के साथ उड़द, मूंग की खेती बढ़ाएगी आमदनी
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धामपुर। कृषि विभाग इस बार क्षेत्र में करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में उड़द, मूंग की खेती कराएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सुझाव दिया जा रहा है कि किसान उड़द, मूंग की खेती को वसंतकालीन गन्ने की बुवाई के साथ करें। इससे उड़द, मूंग की दाल भी होगी और जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी। क्योंकि इन फसलों की जड़ों में पर्याप्त नाइट्रोजन होती है।
धामपुर विकास क्षेत्र में पिछली बार करीब 26 हजार हेक्टेयर में उड़द, मूंग की गन्ने के साथ सहफसली खेती कराई थी। जिसका परिणाम बहुत ही बेहतर निकला। उड़द और मूंग की फसल लेने के बाद किसानों ने गन्ने की पैदावार भी बढ़िया ली। अब किसानों को सहफसली गन्ने की खेती करने का शौक पैदा हो गया है। धामपुर कृषि उप संभाग में करीब 13 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल है। अबकी बार 26 से बढ़ाकर करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की वसंतकालीन बुवाई के साथ उड़द, मूंग की फसल की बुवाई कराने का लक्ष्य है। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
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चुनाव न होते तो आ गया होता बीज
कृषि बीज भंडार के प्रभारी मनीष कुमार का कहना है कि अभी विभाग की ओर से उड़द, मूंग के उन्नतशील प्रजाति के बीज की आवक नहीं हुई है। पर जल्द ही बीज के आने की संभावना बनी है। चुनाव न होते तो अब तक यह बीज आ जाता।
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कुछ खास करने की जरूरत नहीं
अधिकारियों का कहना है कि किसानों को उड़द, मूंग की फसल लेने को कुछ खास करने की जरूरत नहीं है। जब वह गन्ने की बुवाई कर दें, तो बाद में प्रति बीघा डेढ़ से लेकर दो किलोग्राम उड़द , मूंग के बीज को खेत में बिखेर कर पाटा लगा दें। जब फसल तैयार हो जाए तो उसे काट कर घर ले जाएं। उसके बाद गन्ने की निराई, गुड़ाई करने में लग जाएं। बगैर कुछ किए कम लागत पर प्रति बीघा डेढ़ से दो क्विंटल उड़द, मूंग की फसल को प्राप्त किया जा सकता है।

75 प्रतिशत के अनुदान पर जिप्सम उपलब्ध
अधिकारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से 75 प्रतिशत के अनुदान पर किसानों को जिप्सम उपलब्ध कराया जा रहा है। गोदाम पर पर्याप्त मात्रा में जिप्सम उपलब्ध है। जिप्सम का सरकारी रेट 505 रुपये प्रति बोरा है। जबकि किसानों को 75 प्रतिशत का अनुदान पर किसान को दिया जा रहा है।
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