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हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भैया दूज का पर्व
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बिजनौर में भैयादूज पर भाई को तिलक करती बहन।
- फोटो : BIJNOR
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भाइयों को तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना की
बिजनौर। भाई-बहन के अटूट स्नेह के प्रतीक भैया दूज का पर्व जिले भर में पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर भाई की दीर्घायु की कामना की तो भाइयों ने भी बहनों को रक्षा का वचन देने के साथ-साथ उन्हें दक्षिणा के साथ आकर्षक एवं कीमती उपहार भेंट किए।
प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। पवित्र रिश्ते के त्योहार भाई दूज को मनाने के लिए बहन-भाइयों में खासा उत्साह दिखाई दिया। कुछ बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक करने के लिए अपने मायके पहुंची तो कुछ भाई भी अपनी बहनों से तिलक कराने के लिए उनके आवास पर गए। मंगलवार को सुबह से ही भाई-बहनों का एक-दूसरे के घरों में आना जाना लगा रहा। मान्यता है कि इस दिन भाई-बहन को साथ-साथ यमुना स्नान करना, तिलक लगवाना तथा बहन के घर जाकर भोजन करना अतिशुभ और विशेष फलदायी होता है। इस दिन बहन भाई की दीर्घायु होने के लिए पूजा करती हैं तथा अपने सुहाग की सलामती के लिए हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती हैं। इसी दिन सूर्य की पुत्री जमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया था। इस त्योहार को यम द्वितीया या भैया दूज कहते हैं। भैया दूज पर रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन एवं प्रमुख चौराहों पर भीड़ रही। इस दौरान डग्गामार वाहन चालकों ने मनमाना किराया वसूलकर खूब चांदी काटी। जल्दी पहुंचने के लिए महिलाओं ने डग्गामार वाहन चालकों को मनमाना किराया दिया। वहीं कुछ महिलाएं अपने पतियों के साथ निजी वाहनों से अपने मायके गईं तो कुछ भाई अपनी बहनों के घर पहुंचे।
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बिजनौर। भाई-बहन के अटूट स्नेह के प्रतीक भैया दूज का पर्व जिले भर में पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर भाई की दीर्घायु की कामना की तो भाइयों ने भी बहनों को रक्षा का वचन देने के साथ-साथ उन्हें दक्षिणा के साथ आकर्षक एवं कीमती उपहार भेंट किए।
प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। पवित्र रिश्ते के त्योहार भाई दूज को मनाने के लिए बहन-भाइयों में खासा उत्साह दिखाई दिया। कुछ बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक करने के लिए अपने मायके पहुंची तो कुछ भाई भी अपनी बहनों से तिलक कराने के लिए उनके आवास पर गए। मंगलवार को सुबह से ही भाई-बहनों का एक-दूसरे के घरों में आना जाना लगा रहा। मान्यता है कि इस दिन भाई-बहन को साथ-साथ यमुना स्नान करना, तिलक लगवाना तथा बहन के घर जाकर भोजन करना अतिशुभ और विशेष फलदायी होता है। इस दिन बहन भाई की दीर्घायु होने के लिए पूजा करती हैं तथा अपने सुहाग की सलामती के लिए हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करती हैं। इसी दिन सूर्य की पुत्री जमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया था। इस त्योहार को यम द्वितीया या भैया दूज कहते हैं। भैया दूज पर रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन एवं प्रमुख चौराहों पर भीड़ रही। इस दौरान डग्गामार वाहन चालकों ने मनमाना किराया वसूलकर खूब चांदी काटी। जल्दी पहुंचने के लिए महिलाओं ने डग्गामार वाहन चालकों को मनमाना किराया दिया। वहीं कुछ महिलाएं अपने पतियों के साथ निजी वाहनों से अपने मायके गईं तो कुछ भाई अपनी बहनों के घर पहुंचे।
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