चमकेगा काष्ठकला उद्योग

अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर Updated Sat, 23 Mar 2019 11:15 PM IST
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नगीना में काष्ठ कला उद्योग में बनाए गए आइटम।
नगीना में काष्ठ कला उद्योग में बनाए गए आइटम। - फोटो : अमर उजाला

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बिजनौर में  कताई मिल में अब काष्ठ कला उद्योग परवान चढ़ेगा। इसके लिए शासन ने हरी झंडी दे दी है। कताई मिल में पट्टे आदि काटने का अधिकार डीएम को दे दिया गया है। सबसे पहले कताई मिल पर चढ़ा करीब 103 करोड़ का कर्ज उतारा जाएगा। बाकी पैसे को भी काष्ठकला में लगाया जाएगा। नगीना क्षेत्र में कताई मिल स्थित है। 2001 में मिल पर ताले लग गए थे। इससे हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। तभी से कताई मिल का संचालन फिर से करने की मांग चलती आ रही थी। कताई मिल हर चुनाव में चुनावी मुद्दा बनती है। मिल चलाने के लिए सभी नेता वादे करते थे, पर इसे पूरा नहीं किया गया। कुछ दिनों पहले कताई मिल को फिर से चलाने की बात चली थी। इसका सर्वे भी कराया गया था, लेकिन बाद में मिल चलाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। अब कताई मिल में काष्ठकला उद्योग को परवान चढ़ाने का प्रस्ताव बनाया गया है। मिल की जमीन में प्लॉट काटकर उद्यमियों को बेचे जाएंगे। उद्यमी यहां पर अपने प्लांट विकसित करके काष्ठ कला कारोबार से जुड़े आइटम बनाएंगे।
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105 करोड़ की कर्जदार है कताई मिल
कताई मिल पर पहले का करीब 105 करोड़ का बकाया है। यह बकाया काफी साल से मिल पर चल रहा है। अगर मिल को चलाना हो तो पहले मिल प्रशासन को यह राशि भुगतान में देनी होगी। इतनी बड़ी रकम लगाने के बाद भी मशीनों की मरम्मत, नई मशीन लगाने आदि पर भी काफी व्यय होगा। शासन इसलिए इतना रिस्क लेने को तैयार नहीं है।
मिल सकते हैं 346 करोड़
कताई मिल नगीना में बिजनौर रोड पर 53 एकड़ यानि 165 बीघा में बनी है। यहां पर जमीन के रेट 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हैं। एक बीघा जमीन में 840 मीटर होते हैं। यानि कताई मिल की एक बीघा जमीन की कीमत दो करोड़ दस लाख बीघा है। कताई मिल की पूरी जमीन 346 करोड़ से भी ज्यादा कीमत में बिक सकती है। हालांकि यहां रास्ते के लिए भी जमीन छोड़नी होगी।

चमक जाएगा काष्ठकला उद्योग
कताई मिल पर 105 करोड़ का कर्ज है। इसकी जमीन बेचकर 346 करोड़ मिल सकते हैं। कर्ज उतारने के बाद बाकी बची रकम को अगर जिले में काष्ठकला को चमकाने पर खर्च किया जाए तो यह उद्योग और चमकेगा।

दुनिया में मशहूर है काष्ठकला
जिले का काष्ठकला उद्योग दुनिया भर में मशहूर है। यहां बने काष्ठकला के नमूनों की विदेशों में भारी डिमांड है। लकड़ी के गहने, सिगारदारन, छड़ी आदि यहां के मशहूर आइटम हैं। लकड़ी के आइटम पर जैसी नक्काशी नगीना में होती है, ऐसी कहीं और देखने को नहीं मिलती है।

पहले आवास विकास को दी जा रही थी जमीन
पहले कताई मिल को आवास विकास प्राधिकरण को दिया जा रहा था। इसकी फाइल भी तैयार हो गई थी, लेकिन जमीन के मूल्य पर मामला अटक गया। इस जमीन की जितनी कीमत मांगी जा रही थी, उतनी आवास विकास प्राधिकरण देने को तैयार नहीं हुआ। इससे मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

मिली मंजूरी
उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा के अनुसार शासन से कताई मिल में काष्ठकला उद्योग विकसित करने के संबंध में मंजूरी मिली है। इस बारे में जरूरी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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