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अपनों ने मुंह मोड़ा तो मोक्ष दिलाने आगे आए ‘गंगापुत्र’
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अपनों ने मुंह मोड़ा तो मोक्ष दिलाने में आगे आए ‘गंगापुत्र’
बिजनौर। कोरोना काल में शवों से अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया तो कुछ लोग मोक्ष दिलाने के लिए आगे आए हैं। नमामि गंगे गंगा विचार मंच की टीम ऐसे शवों का दाह संस्कार कराकर मुक्ति दिला रही है। टीम अपने पास से दाह संस्कार करने के लिए लकड़ी, सामग्री व अन्य सामान भी दे रही है। टीम के सदस्य खुद गंगा किनारे चिता बनाकर अब तक करीब आठ शवों का दाह संस्कार करा चुके हैं।
कोरोना से जिन लोगों की मौत हुई, अधिकांश मामलों में शवों को परिजन भी हाथ लगाने से बच रहे थे। अभी भी रोजाना गंगा बैराज पर दाह संस्कार करने के लिए शव आ रहे हैं। शवों का दाह संस्कार कराने में ऐसे भी लोग रहे जिनके पास लकड़ी के लिए पैसा नहीं था और वे खुद दाह संस्कार नहीं कर सकते। कोरोना काल में लकड़ी का मूल्य भी 400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1400 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। ऐसे में गरीब के लिए अंतिम संस्कार करना भी आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।
जिला अस्पताल में कई मौत ऐसी हुई, जिनके परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया तो पुलिस शव लेकर गंगा बैराज घाट गई। शवों का दाह संस्कार करने से भी परिजनों ने मुंह मोड़ लिया। ऐसे शवों का दाह संस्कार करने का नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक ने बीड़ा उठाया। उन्होंने गंगा बैराज पर इश्तेहार लगवाए और उन पर मोबाइल नंबर लिखवाए। कहा कि जिन लोगों को लकड़ी व अन्य सामान की जरूरत है, वे इस नंबर पर संपर्क कर लें। गंगा बैराज पर सौरभ सिंघल ने लकड़ी, सामग्री, घी, चीनी व उपलों की व्यवस्था करा दी। टीम के कई सदस्य बैराज पर सक्रिय कर दिए। जो भी इस तरह का शव आया उसे टीम के सदस्यों ने खुद ही विधि विधान से दाह संस्कार किया। अब तक ये टीम आठ से ज्यादा ऐसे शवों का दाह संस्कार कर चुकी है। कहा कि भविष्य में भी जो ऐसे शव आएंगे तो उनका भी दाह संस्कार कराया जाएगा।
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बैराज पर ही कराए जा रहे कर्मकांड
हरिद्वार में लोग अस्थियां विसर्जित करने के साथ कर्मकांड करने नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे लोगों ने बैराज पर ही अस्थियां विसर्जित कराने के साथ कर्मकांड कराना शुरू कर दिया है। नमामि गंगे टीम से जुड़े पंडित अभिषेक शास्त्री के मुताबिक लोग अस्थियां विसर्जित करने बैराज आ रहे हैं। दसवां के सभी कर्मकांड वे खुद गंगा बैराज पर करा रहे हैं।
टीम के सदस्य करा रहे दाह संस्कार
नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल के मुताबिक एक शव का दाह संस्कार कराने में ढाई क्विंटल लकड़ी, घी, सामग्री, चीनी, उपले व अन्य सामान दिया जा रहा है। बैराज पर रहने वाली टीम के सदस्य उमेश व अमन अन्य लोगों को साथ लेकर खुद शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। कोरोना से किसी की मौत हुई हो या सामान्य मौत सभी शवों का वे दाह संस्कार करने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को शवों के दाह संस्कार के लिए 40 क्विंटल और लकड़ी मंगवाकर बैराज पर रखवा दी है। बाकी सामान भी वहां रखा गया है।
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बिजनौर। कोरोना काल में शवों से अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया तो कुछ लोग मोक्ष दिलाने के लिए आगे आए हैं। नमामि गंगे गंगा विचार मंच की टीम ऐसे शवों का दाह संस्कार कराकर मुक्ति दिला रही है। टीम अपने पास से दाह संस्कार करने के लिए लकड़ी, सामग्री व अन्य सामान भी दे रही है। टीम के सदस्य खुद गंगा किनारे चिता बनाकर अब तक करीब आठ शवों का दाह संस्कार करा चुके हैं।
कोरोना से जिन लोगों की मौत हुई, अधिकांश मामलों में शवों को परिजन भी हाथ लगाने से बच रहे थे। अभी भी रोजाना गंगा बैराज पर दाह संस्कार करने के लिए शव आ रहे हैं। शवों का दाह संस्कार कराने में ऐसे भी लोग रहे जिनके पास लकड़ी के लिए पैसा नहीं था और वे खुद दाह संस्कार नहीं कर सकते। कोरोना काल में लकड़ी का मूल्य भी 400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1400 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। ऐसे में गरीब के लिए अंतिम संस्कार करना भी आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।
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जिला अस्पताल में कई मौत ऐसी हुई, जिनके परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया तो पुलिस शव लेकर गंगा बैराज घाट गई। शवों का दाह संस्कार करने से भी परिजनों ने मुंह मोड़ लिया। ऐसे शवों का दाह संस्कार करने का नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक ने बीड़ा उठाया। उन्होंने गंगा बैराज पर इश्तेहार लगवाए और उन पर मोबाइल नंबर लिखवाए। कहा कि जिन लोगों को लकड़ी व अन्य सामान की जरूरत है, वे इस नंबर पर संपर्क कर लें। गंगा बैराज पर सौरभ सिंघल ने लकड़ी, सामग्री, घी, चीनी व उपलों की व्यवस्था करा दी। टीम के कई सदस्य बैराज पर सक्रिय कर दिए। जो भी इस तरह का शव आया उसे टीम के सदस्यों ने खुद ही विधि विधान से दाह संस्कार किया। अब तक ये टीम आठ से ज्यादा ऐसे शवों का दाह संस्कार कर चुकी है। कहा कि भविष्य में भी जो ऐसे शव आएंगे तो उनका भी दाह संस्कार कराया जाएगा।
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बैराज पर ही कराए जा रहे कर्मकांड
हरिद्वार में लोग अस्थियां विसर्जित करने के साथ कर्मकांड करने नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे लोगों ने बैराज पर ही अस्थियां विसर्जित कराने के साथ कर्मकांड कराना शुरू कर दिया है। नमामि गंगे टीम से जुड़े पंडित अभिषेक शास्त्री के मुताबिक लोग अस्थियां विसर्जित करने बैराज आ रहे हैं। दसवां के सभी कर्मकांड वे खुद गंगा बैराज पर करा रहे हैं।
टीम के सदस्य करा रहे दाह संस्कार
नमामि गंगे गंगा विचार मंच के जिला संयोजक सौरभ सिंघल के मुताबिक एक शव का दाह संस्कार कराने में ढाई क्विंटल लकड़ी, घी, सामग्री, चीनी, उपले व अन्य सामान दिया जा रहा है। बैराज पर रहने वाली टीम के सदस्य उमेश व अमन अन्य लोगों को साथ लेकर खुद शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। कोरोना से किसी की मौत हुई हो या सामान्य मौत सभी शवों का वे दाह संस्कार करने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को शवों के दाह संस्कार के लिए 40 क्विंटल और लकड़ी मंगवाकर बैराज पर रखवा दी है। बाकी सामान भी वहां रखा गया है।