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मां ने पुकारा तो दौड़े चले गए सिंबा-सिंबी
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गुलदार के शावक।
- फोटो : BIJNOR
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मां ने पुकारा तो दौड़े चले गए सिंबा-सिंबी
रजनीश त्यागी
बिजनौर। ममता और मां का दुलार के मामले में कई बार जानवर इंसान को भी पीछे छोड़ देते हैं। ऐसा ही मामला नजीबाबाद रेंज के गांव मेमन सादात में देखने को मिला है। सूखे कुएं में गिरे गुलदार के दो शावकों सिंबा-सिंबी को वन विभाग ने रेस्क्यू कर निकाला और उनकी मां से मिलाने के प्रयास शुरू कर दिए। शुक्रवार रात मादा गुलदार की दहाड़ सुन वन विभाग ने पिंजरा खोल दिया और मां की पुकार सुन दोनों शावक दौड़कर उसके पास चले गए।
शुक्रवार की दोपहर नजीबाबाद रेंज के अंतर्गत ग्राम मेमन सादात में एक सूखे कुएं में गुलदार के दो शावक गिर गए थे। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन अफसरों की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में दोनों शावकों को इंसानी गंध से दूर रखने का प्रयास किया गया और उन्हें एक पिंजरे में बंद कर दिया। दोनों शावकों की उम्र तीन से चार माह के बीच थी। वन अफसरों को आसपास के खेतों से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनाई देने लगी। पिंजरे में बंद सिंबा-सिंबी की हलचल भी बढ़ गई। पिंजरा खोलते ही मां की आवाज के पीछे दोनों शावकों ने दौड़ लगा दी। (संवाद)
हिंसक हो सकती थी मादा गुलदार
डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि गुलदार को यदि उनके शावक न मिलते तो वह उन्हें जंगल में तलाशती। ऐसे में उसके हिंसक होने की आशंका भी रहती है। दोनों शावक अपनी मां के साथ चले गए हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा।
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वर्चस्व की जंग में मारा गया गुलदार
कोतवाली देहात (बिजनौर)। थाना क्षेत्र के ग्राम मूसेपुर के जंगल में एक गुलदार मृत अवस्था में मिला। वन विभाग की टीम ने गुलदार की मौत का कारण आपसी लड़ाई से होने का अनुमान लगाया है। मरने वाले गुलदार के मुंह पर पंजे और दांतों के निशान हैं।
मानव गंध से बचाकर रखा था शावकों को
रजनीश त्यागी
बिजनौर। सिंबा-सिंबी को मां से मिलाना वन विभाग के लिए कम बड़ी चुनौती नहीं थी। मानव गंध के संपर्क में आने पर मादा गुलदार उन्हें छोड़ सकती थी और जंगल में छोड़ने पर दूसरे जानवर शिकार बना सकते थे। ऐसे में वन विभाग ने उन्हें मादा गुलदार से मिलाने की कोशिश शुरू की। हालांकि ग्रामीण इसका विरोध कर रहे थे। दोनों शावकों के मादा गुलदार के पास पहुंचने पर वन विभाग ने राहत की सांस महसूस की।
शुक्रवार की दोपहर नजीबाबाद रेंज के अंतर्गत ग्राम मेमन सादात में एक सूखे कुएं में गुलदार के दो शावक गिर गए थे। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन अफसरों की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में दोनों शावकों को इंसानी गंध से दूर रखने का प्रयास किया गया और उन्हें एक पिंजरे में बंद कर दिया। इनका नाम सिंबा-सिंबी रखा। ग्रामीण भी इन्हें यहां से भेजने की जिद पर अड़े थे। उम्मीद यही थी कि इन्हें किसी चिड़ियाघर भेजा जाएगा। शाम ढलते ही जब अंधेरा हुआ तो वन अफसरों को आसपास के खेतों से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनाई देने लगी। वन अफसरों ने समझने में देर नहीं लगाई कि शावकों की मां इनकी तलाश कर रही है। डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि दोनों शावक अपनी मां के साथ चले गए हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा, दोनों शावकों को रेस्क्यू भी किया गया और उनकी मां से भी मिला दिया गया।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। ममता और मां का दुलार के मामले में कई बार जानवर इंसान को भी पीछे छोड़ देते हैं। ऐसा ही मामला नजीबाबाद रेंज के गांव मेमन सादात में देखने को मिला है। सूखे कुएं में गिरे गुलदार के दो शावकों सिंबा-सिंबी को वन विभाग ने रेस्क्यू कर निकाला और उनकी मां से मिलाने के प्रयास शुरू कर दिए। शुक्रवार रात मादा गुलदार की दहाड़ सुन वन विभाग ने पिंजरा खोल दिया और मां की पुकार सुन दोनों शावक दौड़कर उसके पास चले गए।
शुक्रवार की दोपहर नजीबाबाद रेंज के अंतर्गत ग्राम मेमन सादात में एक सूखे कुएं में गुलदार के दो शावक गिर गए थे। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन अफसरों की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में दोनों शावकों को इंसानी गंध से दूर रखने का प्रयास किया गया और उन्हें एक पिंजरे में बंद कर दिया। दोनों शावकों की उम्र तीन से चार माह के बीच थी। वन अफसरों को आसपास के खेतों से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनाई देने लगी। पिंजरे में बंद सिंबा-सिंबी की हलचल भी बढ़ गई। पिंजरा खोलते ही मां की आवाज के पीछे दोनों शावकों ने दौड़ लगा दी। (संवाद)
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हिंसक हो सकती थी मादा गुलदार
डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि गुलदार को यदि उनके शावक न मिलते तो वह उन्हें जंगल में तलाशती। ऐसे में उसके हिंसक होने की आशंका भी रहती है। दोनों शावक अपनी मां के साथ चले गए हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा।
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वर्चस्व की जंग में मारा गया गुलदार
कोतवाली देहात (बिजनौर)। थाना क्षेत्र के ग्राम मूसेपुर के जंगल में एक गुलदार मृत अवस्था में मिला। वन विभाग की टीम ने गुलदार की मौत का कारण आपसी लड़ाई से होने का अनुमान लगाया है। मरने वाले गुलदार के मुंह पर पंजे और दांतों के निशान हैं।
मानव गंध से बचाकर रखा था शावकों को
रजनीश त्यागी
बिजनौर। सिंबा-सिंबी को मां से मिलाना वन विभाग के लिए कम बड़ी चुनौती नहीं थी। मानव गंध के संपर्क में आने पर मादा गुलदार उन्हें छोड़ सकती थी और जंगल में छोड़ने पर दूसरे जानवर शिकार बना सकते थे। ऐसे में वन विभाग ने उन्हें मादा गुलदार से मिलाने की कोशिश शुरू की। हालांकि ग्रामीण इसका विरोध कर रहे थे। दोनों शावकों के मादा गुलदार के पास पहुंचने पर वन विभाग ने राहत की सांस महसूस की।
शुक्रवार की दोपहर नजीबाबाद रेंज के अंतर्गत ग्राम मेमन सादात में एक सूखे कुएं में गुलदार के दो शावक गिर गए थे। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन अफसरों की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में दोनों शावकों को इंसानी गंध से दूर रखने का प्रयास किया गया और उन्हें एक पिंजरे में बंद कर दिया। इनका नाम सिंबा-सिंबी रखा। ग्रामीण भी इन्हें यहां से भेजने की जिद पर अड़े थे। उम्मीद यही थी कि इन्हें किसी चिड़ियाघर भेजा जाएगा। शाम ढलते ही जब अंधेरा हुआ तो वन अफसरों को आसपास के खेतों से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनाई देने लगी। वन अफसरों ने समझने में देर नहीं लगाई कि शावकों की मां इनकी तलाश कर रही है। डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि दोनों शावक अपनी मां के साथ चले गए हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा, दोनों शावकों को रेस्क्यू भी किया गया और उनकी मां से भी मिला दिया गया।