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जिले में बढ़ गया गेहूं का रकबा
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जिले में बढ़ गया गेहूं का रकबा
बिजनौर। इस बार जिले की चीनी मिल जल्दी चलने का फायदा किसानों को मिला है। इस बार गेहूं का रकबा जिले में बढ़ गया है। कुछ किसानों ने कृषि विभाग के सर्वे के बाद तक भी गेहूं बोया है। अगर दिसंबर के मध्य में बारिश न होती तो गेहूं का रकबा और अधिक बढ़ता। अब मौसम सामान्य होने से गेहूं की लेट हुई फसल के भी ठीकठाक पैदावार देने के आसार हैं।
जिले में गन्ने के बाद गेहूं का रकबा सबसे अधिक रहता है। गेहूं का रकबा चीनी मिलों के पेराई सत्र पर निर्भर करता है। अगर चीनी मिल देरी से पेराई शुरू करती हैं तो गेहूं का रकबा घट जाता है, लेकिन अगर चीनी मिल नवंबर में गन्ना पेरना शुरू कर देती हैं तो गेहूं का रकबा बढ़ जाता है। गन्ने का खेत खाली करके किसान उसमें गेहूं बोते हैं। जिले में वर्तमान पेराई सत्र में चीनी मिलों ने दस नवंबर तक पेराई शुरू कर दी थी। इसका फायदा किसानों को मिला है। पिछले साल जिले में गन्ने का रकबा 1,48,627 हेक्टेयर था। यह रकबा इस साल बढ़कर 1,49,447 हेक्टेयर हो गया है। यह आंकड़े 25 दिसंबर तक बोए गए गेहूं के हैं। हालांकि किसानों को दिसंबर के मध्य में हुई बारिश से खामियाजा किसानों को उठाना पड़ा है। बारिश की वजह से काफी गेहूं लेट बोया गया है। कई किसानों ने तो दिसंबर के अंत तक गेहूं बोया है। जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार चीनी मिलें जल्दी चलने से किसानों के खेत समय से खाली हुए। इससे गेहूं का रकबा बढ़ गया है। काफी किसानों ने 25 रदिसंबर के बाद भी गन्ना बोया है।
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बिजनौर। इस बार जिले की चीनी मिल जल्दी चलने का फायदा किसानों को मिला है। इस बार गेहूं का रकबा जिले में बढ़ गया है। कुछ किसानों ने कृषि विभाग के सर्वे के बाद तक भी गेहूं बोया है। अगर दिसंबर के मध्य में बारिश न होती तो गेहूं का रकबा और अधिक बढ़ता। अब मौसम सामान्य होने से गेहूं की लेट हुई फसल के भी ठीकठाक पैदावार देने के आसार हैं।
जिले में गन्ने के बाद गेहूं का रकबा सबसे अधिक रहता है। गेहूं का रकबा चीनी मिलों के पेराई सत्र पर निर्भर करता है। अगर चीनी मिल देरी से पेराई शुरू करती हैं तो गेहूं का रकबा घट जाता है, लेकिन अगर चीनी मिल नवंबर में गन्ना पेरना शुरू कर देती हैं तो गेहूं का रकबा बढ़ जाता है। गन्ने का खेत खाली करके किसान उसमें गेहूं बोते हैं। जिले में वर्तमान पेराई सत्र में चीनी मिलों ने दस नवंबर तक पेराई शुरू कर दी थी। इसका फायदा किसानों को मिला है। पिछले साल जिले में गन्ने का रकबा 1,48,627 हेक्टेयर था। यह रकबा इस साल बढ़कर 1,49,447 हेक्टेयर हो गया है। यह आंकड़े 25 दिसंबर तक बोए गए गेहूं के हैं। हालांकि किसानों को दिसंबर के मध्य में हुई बारिश से खामियाजा किसानों को उठाना पड़ा है। बारिश की वजह से काफी गेहूं लेट बोया गया है। कई किसानों ने तो दिसंबर के अंत तक गेहूं बोया है। जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार चीनी मिलें जल्दी चलने से किसानों के खेत समय से खाली हुए। इससे गेहूं का रकबा बढ़ गया है। काफी किसानों ने 25 रदिसंबर के बाद भी गन्ना बोया है।
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