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चीनी मिल चलाने से वेब ग्रुप ने खड़े किए हाथ
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Updated Fri, 22 Jun 2018 12:19 AM IST
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बिजनौर। बसपा सरकार में चीनी मिलों को बेचने के मामले की सीबीआई जांच शुरू होने के बाद बिजनौर और चांदपुर मिलों के अगले पेराई सत्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सीबीआई जांच के शिकंजे में फंसी इन चीनी मिलों को बैंकों ने कर्ज देने से इंकार कर दिया है। इसके चलते चीनी मिल अधिकारियों ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पेराई सत्र 2018-19 में मिलों को चलाने से इंकार कर दिया है। साथ ही गन्ना सुरक्षण प्रक्रिया में इन दोनों चीनी मिलों को भी शामिल नहीं करने को कहा है। मिल नहीं चलती है तो दोनों चीनी मिलों से जुड़े 25600 किसानों के गन्ने की पेराई की समस्या खड़ी होगी।
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वर्ष 2009 में बसपा शासनकाल में सहकारी क्षेत्र की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल पौंटी चड्ढा की वेब इंडस्ट्रीज को बेच दी गई थीं। तब बिजनौर की चीनी मिल 50 करोड़ 60 लाख और चांदपुर शुगर मिल 80 करोड़ 25 लाख में बेची गई थीं, जबकि उस समय मिलों के पास उपलब्ध चीनी, जमीन और मशीनरी की कीमत ही अरबों रुपये में थीं। उस समय भी भाजपा ने चीनी मिलों की बिक्री में घोटाले का आरोप लगाया था। अब प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो चीनी मिलों के बिक्री मामले की सीबीआई जांच शुरू करा दी गई।
नहीं कराया जा मिलों की मरम्मत का काम
जिलाधिकारी और डीसीओ के भेजे गए पत्र में मिल अधिकारियों ने दावा किया कि दोनों चीनी मिलों को नियमानुसार खरीदा गया था, अब सरकार इसकी सीबीआई जांच करा रही है। इससे मिलों की छवि को नुकसान हुआ है और बैंकों ने ऋण देने से इंकार कर दिया है। बिना ऋण के चीनी मिलों को चलाना संभव नहीं है. मिलों की मशीनों का रिपेयरिंग काम भी नहीं किया जा रहा है। डीसीओ यशपाल सिंह ने डीएम को पत्र प्रेेषित किए जाने की पुष्टि की है और उन्होंने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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इस सत्र का गन्ना मूल्य भी है बकाया
बिजनौर शुगर मिल से 9600 किसान जुड़े हैं। इन किसानों का आठ हजार 22 हेक्टेयर जमीन में खड़ा गन्ना मिल में पेराई के लिए दिया जाता है। इसके अलावा चांदपुर शुगर मिल में 16 हजार किसान गन्ना देते हैं। इस मिल में 14 हजार 773 हेक्टेयर जमीन में खड़े गन्ने की पेराई होती है। दोनों शुगर मिलों ने अब तक गन्ना भुगतान भी नहीं किया है। बिजनौर शुगर मिल पर 40 करोड़ और चांदपुर शुगर मिल पर 56 करोड़ रुपये गन्ना बकाया है।
-बैंक बिजनौर और चांदपुर चीनी को ऋण देने से मनाकर रहे हैं, इसलिए बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल के अधिकारी मिलने के लिए समय मांग रहे हैं। मेरी अभी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई है, हो सकता है मिल अधिकारी उनके कार्यालय में पत्र दे गए हों, अभी यह पत्र मैंने देखा नहीं है। अटल कुमार, जिलाधिकारी बिजनौर
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