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‘कोरोना वायरस को हराकर ही लेंगे दम’

Sun, 17 May 2020 09:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2020 09:30 PM IST
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'We will take the power to beat the corona virus'
लैब टेक्नीशियन कल्याण सिंह। - फोटो : BIJNOR
‘कोरोना वायरस को हराकर ही लेंगे दम’
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बिजनौर। समाज की रक्षा के लिए कोरोना की जंग में योद्धा बने चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपने परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं। अधिकांश कोरोना योद्धाओं का ड्यूटी करने के बाद परिवार से अलग रहना और खाना होता है। मरीजों की देखरेख और सैंपलिंग से लेकर उपचार तक में चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती है। सरकारी अस्पतालों और अन्य क्वारंटीन सेंटरों में अपने फर्ज की ड्यूटी को अंजाम देने के लिए सभी चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ पूरी निष्ठा से कोरोना को हराने में जुटा हुआ है। फोन पर बच्चों व परिजनों का कुशलक्षेम जानकर इनके चेहरे पर चमक देखी जा रही है।
कर्तव्य से बढ़कर कुछ नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंदक के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर देवेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ कोरोना के संभावित मरीजों के इलाज में लगे हैं। उनका कहना है कि कर्तव्य पहले होता है। उससे बढ़कर कुछ नहीं है। देश और समाज की सुरक्षा करने का जिम्मा हमारे कंधों पर है। ऐसे में हम अपने कर्तव्यों से किनारा नहीं कर सकते।
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घर की समस्याएं बाद में
जिला अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर संजय कुमार ने बताया कि वे अपने घर से करीब 100 किलोमीटर दूर रहते हैं। उन्होंने बताया कि घर की कुछ समस्याएं जरूर हैं, लेकिन समाज की सुरक्षा के लिए हमें जो जिम्मेदारी मिली है, हमें सबसे पहले उसे निपटाना है। घर की समस्याएं बाद में देखी जा सकती हैं। फिलहाल मरीजों को इलाज देना ही उनकी प्राथमिकता है।
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कोरोना हारेगा तो हम जीतेंगे
लैब टेक्नीशियन कल्याण सिंह का कहना है कि कोरोना हमारे लिए एक युद्ध की तरह है। हमारे लिए राष्ट्र पहले है, बाकी सभी चीजें बाद में। यदि कोरोना हारेगा तो तभी हम जीत सकेंगे। इसमें हर कोई अपना योगदान दे रहा है।

तनाव दूर करने को मरीजों को हंसाते हैं
लैब टेक्नीशियन कपिल कुमार बताते हैं कि संभावित और पॉजिटिव मरीजों की सैंपलिंग करना उनका काम है। वे अब तक लगभग 300 सैंपल लेकर जांच के लिए भेज चुके हैं। जिन मरीजों का भी सैंपल लिया जाता है, वह स्वत: ही परेेशान हो उठता है। कोरोना वार्ड अथवा क्वारंटीन सेंटरों में भर्ती मरीजों के अंदर अकेले रहने के कारण उन्हें काफी मानसिक तनाव होता है। ऐसे में वे मरीजों को हंसाने का प्रयास करते हैं, जिससे कोई परेशानी न रहें।

डॉ संजय कुमार।

डॉ संजय कुमार।- फोटो : BIJNOR

डॉक्टर देवेंद्र कुमार।

डॉक्टर देवेंद्र कुमार।- फोटो : BIJNOR

लैब टेक्नीशियन कपिल कुमार।

लैब टेक्नीशियन कपिल कुमार।- फोटो : BIJNOR

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