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हिंदी हैं हम : हिंदी सेवा को अपना धर्म मानते हैं नरेंद्र सिंह नीहार
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नरेन्द्र सिंह नीहार।
- फोटो : BIJNOR
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हिंदी हैं हम : हिंदी सेवा को अपना धर्म मानते हैं नरेंद्र सिंह नीहार
धामपुर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में हिंदी प्रवक्ता पद पर कार्यरत नरेंद्र सिंह नीहार हिंदी भाषा और साहित्य के संवर्धन और संयोजन को अपना ध्येय और धर्म मानते हैं।
मूल रूप से जनपद बिजनौर के ग्राम जैतरा धामपुर निवासी नरेंद्र सिंह नीहार 28 वर्षों से दिल्ली में अध्यापन कार्य में संलग्न हैं। विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ाते हैं, घर में हिंदी साहित्य की रचना करते हैं और समाज में हिंदी के प्रति सम्मान और लगाव उत्पन्न करने के लिए हिंदी की रचनात्मक कार्यशालाओं का आयोजन करते हैं। उन्होंने अपने कार्य को संगठित और स्थायित्व देने के उद्देश्य से वर्ष 2012 में हिंदी की गूंज संस्था की स्थापना की। वर्तमान में उक्त संस्था की नेपाल सहित 12 शाखाएं हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान दे रही हैं। भारत के बाहर नेपाल, मारीशस, यूएई, कनाडा तथा जापान के साहित्यकारों के साथ मिलकर हिंदी की सेवा कर रहे हैं।
नरेंद्र सिंह नीहार की अब तक पांच पुस्तकें व 15 कविता पोस्टर आ चुके हैं। वे आकाशवाणी नजीबाबाद, आकाशवाणी दिल्ली और टीवी के कई चैनलों पर कविता पाठ कर चुके हैं। विकास, अनुभव, प्रेरणा, राष्ट्र भाषा हिंदी और अंतिम प्रवक्ता मैग्जीन और न्यूज लेटर्स में संपादन भी करते रहे हैं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में संकलित मैराथन मुशायरा जो दादरी, गाजियाबाद में आयोजित किया गया था, उसमें भागीदारी निभा चुके हैं। नरेन्द्र सिंह नीहार के काव्य संग्रह देश बड़ा है की चर्चित कविता देश बड़ा हो जायेगा मैसूर विश्वविद्यालय में बीए हिंदी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनी। संप्रति महाराष्ट्र राज्य की शोलापुर यूनिवर्सिटी ने एमए हिंदी के पाठ्यक्रम में बाल साहित्य के अंतर्गत नरेन्द्र सिंह नीहार के प्रथम काव्य संग्रह हंसने दो मुस्काने दो को शामिल किया है।
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धामपुर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में हिंदी प्रवक्ता पद पर कार्यरत नरेंद्र सिंह नीहार हिंदी भाषा और साहित्य के संवर्धन और संयोजन को अपना ध्येय और धर्म मानते हैं।
मूल रूप से जनपद बिजनौर के ग्राम जैतरा धामपुर निवासी नरेंद्र सिंह नीहार 28 वर्षों से दिल्ली में अध्यापन कार्य में संलग्न हैं। विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ाते हैं, घर में हिंदी साहित्य की रचना करते हैं और समाज में हिंदी के प्रति सम्मान और लगाव उत्पन्न करने के लिए हिंदी की रचनात्मक कार्यशालाओं का आयोजन करते हैं। उन्होंने अपने कार्य को संगठित और स्थायित्व देने के उद्देश्य से वर्ष 2012 में हिंदी की गूंज संस्था की स्थापना की। वर्तमान में उक्त संस्था की नेपाल सहित 12 शाखाएं हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान दे रही हैं। भारत के बाहर नेपाल, मारीशस, यूएई, कनाडा तथा जापान के साहित्यकारों के साथ मिलकर हिंदी की सेवा कर रहे हैं।
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नरेंद्र सिंह नीहार की अब तक पांच पुस्तकें व 15 कविता पोस्टर आ चुके हैं। वे आकाशवाणी नजीबाबाद, आकाशवाणी दिल्ली और टीवी के कई चैनलों पर कविता पाठ कर चुके हैं। विकास, अनुभव, प्रेरणा, राष्ट्र भाषा हिंदी और अंतिम प्रवक्ता मैग्जीन और न्यूज लेटर्स में संपादन भी करते रहे हैं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में संकलित मैराथन मुशायरा जो दादरी, गाजियाबाद में आयोजित किया गया था, उसमें भागीदारी निभा चुके हैं। नरेन्द्र सिंह नीहार के काव्य संग्रह देश बड़ा है की चर्चित कविता देश बड़ा हो जायेगा मैसूर विश्वविद्यालय में बीए हिंदी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनी। संप्रति महाराष्ट्र राज्य की शोलापुर यूनिवर्सिटी ने एमए हिंदी के पाठ्यक्रम में बाल साहित्य के अंतर्गत नरेन्द्र सिंह नीहार के प्रथम काव्य संग्रह हंसने दो मुस्काने दो को शामिल किया है।
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