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साहित्यिक संस्था की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन

Mon, 18 Oct 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 11:36 PM IST
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We are getting entangled in the realms of alphas...
उलझ रहे हैं हम अल्फाजों के दायरों में...
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नजीबाबाद। साहित्यिक परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं।
साहित्यिक संस्था मेरी कलम की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अधिकारी जानकी पालीवाल ने सरस्वती वंदना से किया। काव्य गोष्ठी में कवि व सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी डॉ. मीरा निवास ने पत्ता जब शाख से टूट कर बिखर गया, फिर जीवन उसका उजड़ गया..., कविता नामदेव ने उलझ रहे हैं हम अल्फाजों के दायरों में..., जानकी पालीवाल ने नहीं बनना मुझे बंद किताब, मुझे बनना खुली किताब..., मंजू जौहरी ने मीरा के तुम भजनों का जरा इक छंद बन जाना, बिखर जाए वहीं खुशबू वो तुम मकरंद बन जाना..., मधु प्रसाद ने इस महकती रात के आंचल तले इक गीत लिख दो..., कृष्ण कुमार पाठक ने दर्द से ही दर्द का उपचार होता है, अश्रु ही तो आंख का शृंगार होता है..., फूलमाला ने दो घरों को पाकर भी बेघर होती है नारी..., पूनम तिवारी ने लोग कहते हैं उम्मीद पर ही दुनिया कायम है..., नानकदेव गंधर्व ने बहुत खूबसूरत थी धरती तेरी, पर में वफा के दो फूल खिला न सका..., प्रतिभा पुरोहित ने अकेला राम लड़ रहा है दस मुंह वाले रावण से..., आदि रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन संस्था की अध्यक्ष डा. मंजू जौहरी ने किया।
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