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धान की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार
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धान की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार
बिजनौर। इस साल जुलाई के 12 दिन 15 साल में अब तक सबसे सूखे रहे हैं। जुलाई में अब तक केवल छह एमएम ही बारिश हुई है। कम बारिश का असर धान की बुवाई पर भी पड़ रहा है। 15 जुलाई तक धान की बुवाई शत प्रतिशत तक हो जाती है, लेकिन इस बार अब तक करीब 60 प्रतिशत धान ही लगाया गया है। किसान बारिश होने तक धान की बुवाई को टालने की कोशिश कर रहे हैं।
भीषण गर्मी हो रही है और बादल जिले से रूठे हुए चल रहे हैं। जिले में जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक हर हाल में मानसून आ जाता है। कई बार तो मानसून आने से पहले ही प्री मानसून बारिश हो जाती है, लेकिन इस बार अब तक न मानसून आया है और न ही प्री-मानसून बारिश हुई है। जिले में जुलाई में औसतन 337.5 एमएम बारिश होती है। बारिश होने के साथ ही किसान धान की बुवाई शुरू कर देते हैं। बारिश नहीं हुई तो इस बार किसान धान की बुवाई से भी परहेज कर रहे हैं। जिले में 55 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में धान बोया जाता है। 15 जुलाई तक धान की बुवाई पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार धान की बुवाई भी बारिश की वजह से प्रभावित हो रही है। धान की अब तक केवल 60 प्रतिशत तक ही बुवाई हुई है। जिले में पिछले 15 साल में जुलाई के 12 दिन में इतनी कम बारिश नहीं हुई है जितनी कम इस साल हुई है। बादल छाने के बाद भी बारिश नहीं हो रही है। नगीना स्थित मौसम वेधशाला के प्रेक्षक सतीश कुमार के अनुसार बारिश होने के आसार कई दिन से बने हुए हैं। जल्दी ही बारिश होने की संभावना है। जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्रा के अनुसार किसान बारिश की इंतजार में हैं। अभी पूरी बुवाई नहीं हो पाई है।
साल बारिश साल बारिश
2007 57.4 2015 243
2008 93.9 2016 78
2009 15.8 2017 117
2010 324 2018 60
2011 59.6 2019 317
2012 37.2 2020 129.8
2013 6.6 2021 6
2014 66.4
नोट: बारिश एमएम में है। बारिश के आंकड़े मौसम वेधशाला नगीना से लिए गए हैं।
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बिजनौर। इस साल जुलाई के 12 दिन 15 साल में अब तक सबसे सूखे रहे हैं। जुलाई में अब तक केवल छह एमएम ही बारिश हुई है। कम बारिश का असर धान की बुवाई पर भी पड़ रहा है। 15 जुलाई तक धान की बुवाई शत प्रतिशत तक हो जाती है, लेकिन इस बार अब तक करीब 60 प्रतिशत धान ही लगाया गया है। किसान बारिश होने तक धान की बुवाई को टालने की कोशिश कर रहे हैं।
भीषण गर्मी हो रही है और बादल जिले से रूठे हुए चल रहे हैं। जिले में जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह तक हर हाल में मानसून आ जाता है। कई बार तो मानसून आने से पहले ही प्री मानसून बारिश हो जाती है, लेकिन इस बार अब तक न मानसून आया है और न ही प्री-मानसून बारिश हुई है। जिले में जुलाई में औसतन 337.5 एमएम बारिश होती है। बारिश होने के साथ ही किसान धान की बुवाई शुरू कर देते हैं। बारिश नहीं हुई तो इस बार किसान धान की बुवाई से भी परहेज कर रहे हैं। जिले में 55 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन में धान बोया जाता है। 15 जुलाई तक धान की बुवाई पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार धान की बुवाई भी बारिश की वजह से प्रभावित हो रही है। धान की अब तक केवल 60 प्रतिशत तक ही बुवाई हुई है। जिले में पिछले 15 साल में जुलाई के 12 दिन में इतनी कम बारिश नहीं हुई है जितनी कम इस साल हुई है। बादल छाने के बाद भी बारिश नहीं हो रही है। नगीना स्थित मौसम वेधशाला के प्रेक्षक सतीश कुमार के अनुसार बारिश होने के आसार कई दिन से बने हुए हैं। जल्दी ही बारिश होने की संभावना है। जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्रा के अनुसार किसान बारिश की इंतजार में हैं। अभी पूरी बुवाई नहीं हो पाई है।
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साल बारिश साल बारिश
2007 57.4 2015 243
2008 93.9 2016 78
2009 15.8 2017 117
2010 324 2018 60
2011 59.6 2019 317
2012 37.2 2020 129.8
2013 6.6 2021 6
2014 66.4
नोट: बारिश एमएम में है। बारिश के आंकड़े मौसम वेधशाला नगीना से लिए गए हैं।