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देश के लिए मेडल जीतना चाहता है विवेक
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देश के लिए मेडल जीतना चाहता है विवेक
बिजनौर। गांव चंदनपुरा निवासी विवेक राणा ब्राजील में होने वाली विशेष बच्चों की दौड़ में हिस्सा लेने के लिए दिन रात मेहनत कर रहा है। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल जीत चुका विवेक अपने जैसे बाकी बच्चों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। वह पैरा ओलंपिक में भारत की ओर से खेलकर स्वर्ण पदक जीतना चाहता है।
बचपन से ही विवेक सुन और बोल नहीं पाता है। उसे अभिभावकों ने मेरठ में विशेष बच्चों के स्कूल में भर्ती कराया तो उसने पहली बार 100 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया और प्रथम आया। यहीं से उसका दौड़ के लिए जुनून बन गया और उसने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। विशेष बच्चों की दौड़ में उसने चेन्नई, रांची, बंगलूरू, हैदराबाद, रुद्रपुर आदि में हिस्सा लिया था। मेरठ में आयोजित 24 किलोमीटर मिनी मैराथन में विवेक ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। 100 मीटर से लेकर पांच किलोमीटर तक की रेस में वह हिस्सा लेता है। अब तक वह 50 से अधिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीत चुका है। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी वह पदक जीत चुका है। कोई ऐसी रेस नहीं रही जिसमे उसने पदक न जीता हो।
अब ब्राजील में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए विवेक मेहनत कर रहा है। यूपी ट्रायल में उसका चयन हो गया है और अब दिल्ली में ही ट्रायल होना है। विवेक के पिता यशपाल सिंह और उसकी मां चंद्रमणि भी उसकी तरह सांकेतिक भाषा में बात करना सीख गए हैं। यशपाल सिंह बताते हैं उन्होंने अपने बेटे को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन अभी तक किसी भी राजनीतिक या संस्था द्वारा उनकी मदद नहीं की गई है। अब उनके सामने आर्थिक समस्या आने लगी है।
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बिजनौर। गांव चंदनपुरा निवासी विवेक राणा ब्राजील में होने वाली विशेष बच्चों की दौड़ में हिस्सा लेने के लिए दिन रात मेहनत कर रहा है। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल जीत चुका विवेक अपने जैसे बाकी बच्चों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। वह पैरा ओलंपिक में भारत की ओर से खेलकर स्वर्ण पदक जीतना चाहता है।
बचपन से ही विवेक सुन और बोल नहीं पाता है। उसे अभिभावकों ने मेरठ में विशेष बच्चों के स्कूल में भर्ती कराया तो उसने पहली बार 100 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया और प्रथम आया। यहीं से उसका दौड़ के लिए जुनून बन गया और उसने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। विशेष बच्चों की दौड़ में उसने चेन्नई, रांची, बंगलूरू, हैदराबाद, रुद्रपुर आदि में हिस्सा लिया था। मेरठ में आयोजित 24 किलोमीटर मिनी मैराथन में विवेक ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। 100 मीटर से लेकर पांच किलोमीटर तक की रेस में वह हिस्सा लेता है। अब तक वह 50 से अधिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीत चुका है। तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी वह पदक जीत चुका है। कोई ऐसी रेस नहीं रही जिसमे उसने पदक न जीता हो।
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अब ब्राजील में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए विवेक मेहनत कर रहा है। यूपी ट्रायल में उसका चयन हो गया है और अब दिल्ली में ही ट्रायल होना है। विवेक के पिता यशपाल सिंह और उसकी मां चंद्रमणि भी उसकी तरह सांकेतिक भाषा में बात करना सीख गए हैं। यशपाल सिंह बताते हैं उन्होंने अपने बेटे को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन अभी तक किसी भी राजनीतिक या संस्था द्वारा उनकी मदद नहीं की गई है। अब उनके सामने आर्थिक समस्या आने लगी है।
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