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शतावरी की खेती कर मुनाफा कमा रहे विपिन कुमार
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बिजनौर में प्रगतिशील किसान को सम्मानित करते डीएम उमेश मिश्रा व एसपी डॉ धर्मवीर सिंह।
- फोटो : BIJNOR
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शतावरी की खेती कर मुनाफा कमा रहे विपिन कुमार
बिजनौर। गांव मुबारकपुर तालन के युवा किसान विपिन कुमार औषधि शतावरी की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं। नेपाली शतावरी एक औषधीय जड़ी बूटी है। इस प्रगतिशील युवा किसान को बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा व एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
गांव मुबारकपुर तालन के प्रगतिशील किसान विपिन कुमार सिंह पुत्र लाखन सिंह नेपाली शतावरी नाम की औषधीय जड़ी बूटी का तीन साल से उत्पादन कर रहे हैं। विपिन कुमार ने बताया यह फसल 18 माह की है। इसका पेड़ कांटेदार झाड़ीनुमा होता है। इसी कारण इस फसल में किसी भी जानवर द्वारा कोई नुकसान भी नहीं होता है। उन्होंने बरेली के एक किसान से इसकी खेती की जानकारी ली और उन्हीं से इसका बीज भी लिया था। यह रेतीली जमीन में भी अच्छी पैदावार देती है। उन्होंने यह फसल 2020 में पांच बीघा जमीन में लगाई थी। इसकी सूखी जड़ों की कीमत बाजार में 500 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है। इसकी सूखी जड़ लगभग 15 क्विंटल तक निकल जाती है। इसकी मंडी दिल्ली व नीचम (मध्य प्रदेश) है। इसके अलावा आयुर्वेदिक कंपनी भी इसे खरीद लेती हैं। वह अपनी फसल डेरियों व आयुर्वेदिक कंपनी को बेच रहे हैं।
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बिजनौर। गांव मुबारकपुर तालन के युवा किसान विपिन कुमार औषधि शतावरी की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं। नेपाली शतावरी एक औषधीय जड़ी बूटी है। इस प्रगतिशील युवा किसान को बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा व एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
गांव मुबारकपुर तालन के प्रगतिशील किसान विपिन कुमार सिंह पुत्र लाखन सिंह नेपाली शतावरी नाम की औषधीय जड़ी बूटी का तीन साल से उत्पादन कर रहे हैं। विपिन कुमार ने बताया यह फसल 18 माह की है। इसका पेड़ कांटेदार झाड़ीनुमा होता है। इसी कारण इस फसल में किसी भी जानवर द्वारा कोई नुकसान भी नहीं होता है। उन्होंने बरेली के एक किसान से इसकी खेती की जानकारी ली और उन्हीं से इसका बीज भी लिया था। यह रेतीली जमीन में भी अच्छी पैदावार देती है। उन्होंने यह फसल 2020 में पांच बीघा जमीन में लगाई थी। इसकी सूखी जड़ों की कीमत बाजार में 500 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है। इसकी सूखी जड़ लगभग 15 क्विंटल तक निकल जाती है। इसकी मंडी दिल्ली व नीचम (मध्य प्रदेश) है। इसके अलावा आयुर्वेदिक कंपनी भी इसे खरीद लेती हैं। वह अपनी फसल डेरियों व आयुर्वेदिक कंपनी को बेच रहे हैं।
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