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Bijnor News: कागजों में ही नहीं, हकीकत में भी संवेदशनील हैं गांव
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गांव हरेवली में लगा गंदगी का ढेर।
-पड़ताल में हुआ खुलासा, गांवों में गंदगी का अंबार, साफ नहीं हुई घास
-धरातल पर नहीं उतरा संचारी रोग नियंत्रण अभियान का काम
-संवेदनशील इलाकों में भी नहीं हुआ एंटी लार्वा का छिड़काव
-159 डेंगू रोगी जिले में साल 2023 में मिले थे
-14 मरीज मलेरिया के पिछले साल जिलेभर मिले
-100 प्रतिशत काम दिखा रहा अभियान में पंचायतीराज विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर/अफजलगढ़। कहने को तो सभी विभाग डेंगू, मलेरिया का प्रकोप कम करने में लगे हैं। मगर हकीकत में धरातल पर काम नजर नहीं आ रहा है। कागजों में ही नहीं, बल्कि मौके पर भी गांव संवेदनशील हैं। संचारी रोग नियंत्रण अभियान बीत जाने के बाद भी संवेदनशील इलाकों में सफाई नहीं हुई है। इसका खुलासा बुधवार को अमर उजाला की पड़ताल में हुआ।
बुधवार को अमर उजाला की टीम ने कासमपुरगढ़ी ब्लॉक के पांच संवेदनशील गांवों में पड़ताल की। इन गांवों में पिछले साल बुखार, डेंगू, मलेरिया के मरीज मिले थे। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने आफसाबाद चमन, सुआवाला, हरेवली, भगौता, शहजादपुर को संवेदनशील घोषित किया था। पड़ताल के दौरान गांवों में गंदगी के ढेर मिले। इतना ही नहीं नालों की सफाई नहीं हुई, जिससे सड़कों पर ही पानी फैलने लगा। गांव में घास और झाड़िया खड़ी मिलीं। हैरानी की बात ये है कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान में पंचायतीराज विभाग ने अपना 100 प्रतिशत काम दिखा रखा है, जबकि गांवों में साफ-सफाई, एंटी लार्वा छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं है।
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गांव में खड़ी नजर आई घास और झाड़ियां-
पड़ताल के दौरान आफसाबाद चमन में नालियां गदंगी से अटी पड़ी हैं। नाली अटी होने से पानी सड़कों पर फैल रहा है। गांव में घास भी खड़ी नजर आई, जबकि संचारी रोग नियंत्रण अभियान में साफ-सफाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कागजों के अलावा धरातल पर साफ-सफाई नजर नहीं आई।
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सड़कों पर फैल रहा पानी, नहीं निकासी की व्यवस्था
गांव सुआवाला में नालियों का पानी भी सड़कों पर भर रहा है। इससे कहीं न कहीं संक्रमण के चलते बिमारी फैलने का भय है। वहीं गांव के अंदर स्थित प्राथमिक विद्यालय के आगे और पीछे की ओर कूड़ियां बना दी गई हैं। इससे ग्रामीणों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गांव में संक्रामक बीमारी फैलने की संभावना है।
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पड़ताल में गांवों की हालत निकली खस्ता-
गांव हरेली, भगौता, शहजादपुर में भी यही स्थिति है। गांवों में न तो साफ-सफाई हुई है और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव, जिससे साफ जाहिर होता है कि सिर्फ कागजों में साफ-सफाई का काम चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव और साफ-सफाई हुए बहुत समय हो गया है।
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एंटी लार्वा का नहीं हुआ छिड़काव-
गांव आसफाबाद चमन निवासी सतेंद्र सिंह का कहना है गांव में सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं है। नाली चोक पड़ी हैं, जिसके कारण गंदगी हो रही है। न ही गांव में कीटनाशक का छिड़काव कराया गया है।
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पिछले साल गांव में फैला था भंयकर बुखार, नहीं हुई सफाई-
गांव आफसाबाद चमन निवासी कुशलेस कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष गांव में बुखार से करीब 10 की मौत हुई थी, जबकि 50 से ज्यादा बुखार की चपेट में थे। इसके बावजूद गांव में सफाई नहीं की जा रही है। नालियां कूड़े से भरी हैं, पानी की निकासी नहीं है।
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गांव में लगे गंदगी के अंबार-
गांव शहजादपुर निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में कई स्थानों पर गंदगी के अंबार लगे हैं। इससे बीमारी फैलने का भय है। गांव में अभी तक कीटनाशक दवाई का छिड़काव भी नहीं कराया गया है।
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गांव में फैल रही दुर्गंध-
हरेवली निवासी मोहम्मद इजहार का कहना है कि अस्पताल के आसपास भी गंदगी के ढेर लगे हैं। दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो रहा है। इससे संक्रमण व बीमारियां फैलने का डर है।
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एंटी लार्वा नहीं हुआ छिड़काव-
गांव भगौता निवासी मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि गांव के समीप ही कूड़े के ढेर लगे हैं। सफाई कर्मी ग्राम प्रधान के घर के आसपास सफाई कर चले जाते हैं। पानी की निकासी नहीं है। एंटी लार्वा का छिड़काव भी नहीं हुआ।
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वर्जन::
दूसरे विभागों से समन्वय कर गांवों में साफ-सफाई कराई जा रही है। ग्राम प्रधानों से भी कहा गया है कि अगर कीटनाश्क दवा की जरूरत है तो विभाग से ले सकता है। संवेदनशील गांवों में बुखार का प्रकोेप न रहे, इसके लिए तैयारी करने के निर्देश संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को दिए हैं।
....डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर
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-धरातल पर नहीं उतरा संचारी रोग नियंत्रण अभियान का काम
-संवेदनशील इलाकों में भी नहीं हुआ एंटी लार्वा का छिड़काव
-159 डेंगू रोगी जिले में साल 2023 में मिले थे
-14 मरीज मलेरिया के पिछले साल जिलेभर मिले
-100 प्रतिशत काम दिखा रहा अभियान में पंचायतीराज विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर/अफजलगढ़। कहने को तो सभी विभाग डेंगू, मलेरिया का प्रकोप कम करने में लगे हैं। मगर हकीकत में धरातल पर काम नजर नहीं आ रहा है। कागजों में ही नहीं, बल्कि मौके पर भी गांव संवेदनशील हैं। संचारी रोग नियंत्रण अभियान बीत जाने के बाद भी संवेदनशील इलाकों में सफाई नहीं हुई है। इसका खुलासा बुधवार को अमर उजाला की पड़ताल में हुआ।
बुधवार को अमर उजाला की टीम ने कासमपुरगढ़ी ब्लॉक के पांच संवेदनशील गांवों में पड़ताल की। इन गांवों में पिछले साल बुखार, डेंगू, मलेरिया के मरीज मिले थे। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने आफसाबाद चमन, सुआवाला, हरेवली, भगौता, शहजादपुर को संवेदनशील घोषित किया था। पड़ताल के दौरान गांवों में गंदगी के ढेर मिले। इतना ही नहीं नालों की सफाई नहीं हुई, जिससे सड़कों पर ही पानी फैलने लगा। गांव में घास और झाड़िया खड़ी मिलीं। हैरानी की बात ये है कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान में पंचायतीराज विभाग ने अपना 100 प्रतिशत काम दिखा रखा है, जबकि गांवों में साफ-सफाई, एंटी लार्वा छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं है।
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गांव में खड़ी नजर आई घास और झाड़ियां-
पड़ताल के दौरान आफसाबाद चमन में नालियां गदंगी से अटी पड़ी हैं। नाली अटी होने से पानी सड़कों पर फैल रहा है। गांव में घास भी खड़ी नजर आई, जबकि संचारी रोग नियंत्रण अभियान में साफ-सफाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कागजों के अलावा धरातल पर साफ-सफाई नजर नहीं आई।
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सड़कों पर फैल रहा पानी, नहीं निकासी की व्यवस्था
गांव सुआवाला में नालियों का पानी भी सड़कों पर भर रहा है। इससे कहीं न कहीं संक्रमण के चलते बिमारी फैलने का भय है। वहीं गांव के अंदर स्थित प्राथमिक विद्यालय के आगे और पीछे की ओर कूड़ियां बना दी गई हैं। इससे ग्रामीणों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गांव में संक्रामक बीमारी फैलने की संभावना है।
पड़ताल में गांवों की हालत निकली खस्ता-
गांव हरेली, भगौता, शहजादपुर में भी यही स्थिति है। गांवों में न तो साफ-सफाई हुई है और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव, जिससे साफ जाहिर होता है कि सिर्फ कागजों में साफ-सफाई का काम चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव और साफ-सफाई हुए बहुत समय हो गया है।
एंटी लार्वा का नहीं हुआ छिड़काव-
गांव आसफाबाद चमन निवासी सतेंद्र सिंह का कहना है गांव में सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं है। नाली चोक पड़ी हैं, जिसके कारण गंदगी हो रही है। न ही गांव में कीटनाशक का छिड़काव कराया गया है।
पिछले साल गांव में फैला था भंयकर बुखार, नहीं हुई सफाई-
गांव आफसाबाद चमन निवासी कुशलेस कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष गांव में बुखार से करीब 10 की मौत हुई थी, जबकि 50 से ज्यादा बुखार की चपेट में थे। इसके बावजूद गांव में सफाई नहीं की जा रही है। नालियां कूड़े से भरी हैं, पानी की निकासी नहीं है।
गांव में लगे गंदगी के अंबार-
गांव शहजादपुर निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में कई स्थानों पर गंदगी के अंबार लगे हैं। इससे बीमारी फैलने का भय है। गांव में अभी तक कीटनाशक दवाई का छिड़काव भी नहीं कराया गया है।
गांव में फैल रही दुर्गंध-
हरेवली निवासी मोहम्मद इजहार का कहना है कि अस्पताल के आसपास भी गंदगी के ढेर लगे हैं। दुर्गंध से लोगों का जीना दूभर हो रहा है। इससे संक्रमण व बीमारियां फैलने का डर है।
एंटी लार्वा नहीं हुआ छिड़काव-
गांव भगौता निवासी मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि गांव के समीप ही कूड़े के ढेर लगे हैं। सफाई कर्मी ग्राम प्रधान के घर के आसपास सफाई कर चले जाते हैं। पानी की निकासी नहीं है। एंटी लार्वा का छिड़काव भी नहीं हुआ।
वर्जन::
दूसरे विभागों से समन्वय कर गांवों में साफ-सफाई कराई जा रही है। ग्राम प्रधानों से भी कहा गया है कि अगर कीटनाश्क दवा की जरूरत है तो विभाग से ले सकता है। संवेदनशील गांवों में बुखार का प्रकोेप न रहे, इसके लिए तैयारी करने के निर्देश संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को दिए हैं।
....डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर