फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Villagers raise hands by building temporary bridge

अस्थायी पुल बनाने में ग्रामीणों ने खड़े किए हाथ

Mon, 10 Feb 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2020 12:03 AM IST
विज्ञापन
Villagers raise hands by building temporary bridge
अस्थायी पुल बनाने से ग्रामीणों ने खड़े किए हाथ
विज्ञापन

शेरकोट/धामपुुर। नंदगांव, नयागांव, नाथाडोई गांव के लोगों ने गांव नयागांव में खो नदी पर कांवड़ियों के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल बनाने में असमर्थता जताते हुए प्रशासन को इसका जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण इस बार पुल निर्माण नहीं हो पाएगा। पुल का निर्माण करने में लाखों की लागत आती है। इस पुल के निर्माण होने से कांवड़ियों का नगीना से शेरकोट आने तक का करीब 20 किमी लंबा मार्ग कम हो जाता है।

क्षेत्र के गांव नंदगांव नयागांव, नाथाडोई, करनाला आदि गांवों के रामवीर सिंह, धर्मवीर सिंह, महेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, डा. घासीराम, ड. राजेंद्र, प्रधान हरज्ञान सिंह का कहना है कि महाशिवरात्रि पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर शिवभक्त गुजरते हैं। नयागांव में पिछले 15 सालों से श्रमदान कर खो नदी पर अस्थायी तौर पर लकड़ी के पुल निर्माण शुरू किया जाता है, पर इस बार अभी तक इसका निर्माण शुरू नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि वह इस पुल का निर्माण कराने की मांग को लेकर कई बार तहसीलदार चंद्रकांता, एसडीएम धीरेंद्र सिंह, डीएम रमाकांत पांडेय से मिले। अधिकारियों के भरोसे के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि उनके द्वारा खो नदी पर लकड़ी का अस्थाई पुल का निर्माण करने से नगीना से शेरकोट को आने वाले शिवभक्तों की डगर आसान हो जाती है। यदि शिवभक्त नगीना से हाईवे 74 से होते हुए शेरकोट आते हैं तो उनको यहां तक आने में करीब 30 किमी लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यदि शेरकोट में नयागांव में खो नदी पर लकड़ी के अस्थायी पुल का निर्माण कर दिया जाता है तो 30 किमी के सापेक्ष यह यात्रा करीब 12 किमी ही रह जाती है। विडंबना है कि ग्रामीण इस बार इस पुल का निर्माण करने में असमर्थ हैं। उनके पास संसाधनों का टोटा है। इस पुल का निर्माण करने और महाशिवरात्रि पर्व के संपन्न हो जाने के बाद पुल का वहां से हटाने में करीब 15 दिन लगते हैं। इन 15 दिनों तक काम करने में तीन सौ रुपये प्रतिदिन के 15 मजदूरों को लगाया जाता है। इसके अलावा गांव के लोग ट्रैक्टरों ट्रालियों से अपने स्तर से अलग श्रमदान करते हैं। ग्रामीणों ने डीएम से पुल का अस्थाई निर्माण कराने में सहयोग की मांग की है।
विज्ञापन

जांच कर समस्या का निदान कराएंगे: एसडीएम
एसडीएम धीरेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसा मामला ग्रामीणों की ओर से संज्ञान में नहीं लाया गया है। वह जांच कराकर समस्या का निदान कराने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed