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ट्रैक्टर-ट्रॉली से दबा मिला उषा का शव
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 30 Mar 2017 11:28 PM IST
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हादसे के बाद भी जोड़ी वाली नाव से खेती करने गंगा पार जाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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मंडावर में गंगा की धारा में डूबी महिला उषा का शव नदी में ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबा मिला। बहती धारा में नीचे की तरफ रेत खोदकर किसी तरह शव निकाला गया। इस दौरान गंगा किनारे के आसपास के गांव वाले मौजूद रहे। महिला की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम कराया है।
बुधवार देर रात गंगा पार खेत से गांव दयालवाला के मजदूर लौट रहे थे। वे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से आ रहे थे। ये जोड़े वाली नाव पर ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सवार थे। बीच धारा में गियर बक्सा फेल होने से ट्रैक्टर-ट्राली गंगा नदी में समा गई था। ट्राली में गांव दयालवाला के करीब दो दर्जन मजदूर सवार थे। वे सब भी नदी में जा गिरे। नाव में सवार लोगों ने उनको बचा लिया था, लेकिन ट्रैक्टर चालक राजेंद्र की पत्नी उषा (40 वर्ष) का कुछ पता नहीं चला था। ग्रामीणओं ने रात को डेढ़ बजे तक टॉर्च, वाहनों की रोशनी आदि में उषा को नदी में तलाश किया।
सुबह को भी चार बजे से ही फिर से उषा की तलाश शुरू कर दी गई। गोताखोरों को उषा नदी में पड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दिखाई दी। गांववालों ने एक रस्सी उषा के शरीर पर बांधी। 12-15 गोताखोरों ने नदी में जाकर ट्रैक्टर के पास से हाथ व फावड़े से मिट्टी हटाई। करीब एक घंटे तक ऐसा ही करने पर उषा का शव करीब आठ बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे से निकला। रस्सी के सहारे गांव वालों ने शव को बाहर खींचा।
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उषा की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उषा के पांच बच्चे हैं। गांववालों के मुताबिक, उषा के परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है। इसीलिए वह भी पति का हाथ बंटाने के लिए मजदूरी करने गई थी। वहीं, बुधवार को गंगा में डूबने से बाल-बाल बचे गांववालों की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
मौत से खेलना बना नियति
खादर क्षेत्र के कई गांवों के खेत गंगापार हैं। खेत पर जाने के लिए किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली व बुग्गी जोड़ों वाली नाव से ही लेकर गंगा पार आते-जाते हैं। कई जगह गांव वाले नदी से पैदल होकर ही खेतों को जाते हैं। यह किसानों की दिनचर्या और पेट पालने का साधन है। पहले भी गंगापार खेतों पर जाने के दौरान किसान गंगा की धारा में डूबकर काल के गाल में समाते रहे हैं। बुधवार को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी बृहस्पतिवार सुबह किसान जोड़ों वाली नाव पर ट्रैक्टर-ट्रॉली आदि वाहन लेकर खेतों पर गए।
बुधवार देर रात गंगा पार खेत से गांव दयालवाला के मजदूर लौट रहे थे। वे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से आ रहे थे। ये जोड़े वाली नाव पर ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सवार थे। बीच धारा में गियर बक्सा फेल होने से ट्रैक्टर-ट्राली गंगा नदी में समा गई था। ट्राली में गांव दयालवाला के करीब दो दर्जन मजदूर सवार थे। वे सब भी नदी में जा गिरे। नाव में सवार लोगों ने उनको बचा लिया था, लेकिन ट्रैक्टर चालक राजेंद्र की पत्नी उषा (40 वर्ष) का कुछ पता नहीं चला था। ग्रामीणओं ने रात को डेढ़ बजे तक टॉर्च, वाहनों की रोशनी आदि में उषा को नदी में तलाश किया।
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सुबह को भी चार बजे से ही फिर से उषा की तलाश शुरू कर दी गई। गोताखोरों को उषा नदी में पड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दिखाई दी। गांववालों ने एक रस्सी उषा के शरीर पर बांधी। 12-15 गोताखोरों ने नदी में जाकर ट्रैक्टर के पास से हाथ व फावड़े से मिट्टी हटाई। करीब एक घंटे तक ऐसा ही करने पर उषा का शव करीब आठ बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे से निकला। रस्सी के सहारे गांव वालों ने शव को बाहर खींचा।
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उषा की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उषा के पांच बच्चे हैं। गांववालों के मुताबिक, उषा के परिवार की माली हालत अच्छी नहीं है। इसीलिए वह भी पति का हाथ बंटाने के लिए मजदूरी करने गई थी। वहीं, बुधवार को गंगा में डूबने से बाल-बाल बचे गांववालों की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
मौत से खेलना बना नियति
खादर क्षेत्र के कई गांवों के खेत गंगापार हैं। खेत पर जाने के लिए किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली व बुग्गी जोड़ों वाली नाव से ही लेकर गंगा पार आते-जाते हैं। कई जगह गांव वाले नदी से पैदल होकर ही खेतों को जाते हैं। यह किसानों की दिनचर्या और पेट पालने का साधन है। पहले भी गंगापार खेतों पर जाने के दौरान किसान गंगा की धारा में डूबकर काल के गाल में समाते रहे हैं। बुधवार को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी बृहस्पतिवार सुबह किसान जोड़ों वाली नाव पर ट्रैक्टर-ट्रॉली आदि वाहन लेकर खेतों पर गए।