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संक्रमण से बचने को जरूरी है सैनिटाइजर का प्रयोग: उलमा
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संक्रमण से बचने को जरूरी है सैनिटाइजर का प्रयोग: उलमा
गजरौलाशिव। कोरोना संक्रमण के दौर में सैनिटाइजर के प्रयोग को लेकर बरेलवी उलमा के फतवे पर बिजनौर के उलमा की राय अलग है। उनका कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग उचित है। क्योंकि यह संक्रमण फैलने से रोकता है। सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है, लेकिन इसका प्रयोग सिर्फ हाथ धोने के लिए किया जाता है।
जमीयत उलमा बिजनौर के सेक्रेटरी शमीम अहमद कासमी का कहना है कि सैनिटाइजर दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। शरीयत इसे इस्तेमाल करने की खुली इजाजत देता है। खांसी के सिरप में भी अल्कोहल होता है, वह भी दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ही ये भी एक दवाई है। जिसे हाथ धोने, घर साफ करने, कार्यालय व धार्मिक स्थलों को सैनिटाइज करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
जामा मस्जिद चाहशीरी बिजनौर के इमाम-ओ-खतीब मौलाना वरीस अहमद कासमी ने बताया कि बीमारी से बचाव के लिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार भी साफ-सफाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित कर रही है। जो शख्स इसके इस्तेमाल न करने का भ्रम फैला रहा है वह सरासर गलत है।
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जुमा उल हदी एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक मौलाना हामिद मुर्तजवी के अनुसार कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सैनिटाइज का इस्तेमाल सही है। इबादतगाहों में सैनिटाइज किया जा सकता है। इसमें कोई गुरेज नहीं है। सैनिटाइजर कीटाणुनाशक है।
उधर, बरेलवी मसलक के मौलाना असलम रजा का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था काबिल-ए तारीफ है मगर जिन शर्तों के साथ इबादतगाहों को खोलने की इजाजत दी है वह रुह-ए इबादत के खिलाफ है। इबादतगाह जैसी पवित्र जगह को सैनिटाइज कराना उसकी पवित्रता से मजाक है, क्योंकि सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है जो नापाक है। सुरक्षा के लिहाज से पांच लोग ही इबादतगाहों में इबादत करते रहें। इबादतगाहों को सैनिटाइजर से न धुलकर साबुन या सर्फ से धो सकते हैं।
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गजरौलाशिव। कोरोना संक्रमण के दौर में सैनिटाइजर के प्रयोग को लेकर बरेलवी उलमा के फतवे पर बिजनौर के उलमा की राय अलग है। उनका कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग उचित है। क्योंकि यह संक्रमण फैलने से रोकता है। सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है, लेकिन इसका प्रयोग सिर्फ हाथ धोने के लिए किया जाता है।
जमीयत उलमा बिजनौर के सेक्रेटरी शमीम अहमद कासमी का कहना है कि सैनिटाइजर दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। शरीयत इसे इस्तेमाल करने की खुली इजाजत देता है। खांसी के सिरप में भी अल्कोहल होता है, वह भी दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे ही ये भी एक दवाई है। जिसे हाथ धोने, घर साफ करने, कार्यालय व धार्मिक स्थलों को सैनिटाइज करने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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जामा मस्जिद चाहशीरी बिजनौर के इमाम-ओ-खतीब मौलाना वरीस अहमद कासमी ने बताया कि बीमारी से बचाव के लिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार भी साफ-सफाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित कर रही है। जो शख्स इसके इस्तेमाल न करने का भ्रम फैला रहा है वह सरासर गलत है।
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जुमा उल हदी एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक मौलाना हामिद मुर्तजवी के अनुसार कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सैनिटाइज का इस्तेमाल सही है। इबादतगाहों में सैनिटाइज किया जा सकता है। इसमें कोई गुरेज नहीं है। सैनिटाइजर कीटाणुनाशक है।
उधर, बरेलवी मसलक के मौलाना असलम रजा का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था काबिल-ए तारीफ है मगर जिन शर्तों के साथ इबादतगाहों को खोलने की इजाजत दी है वह रुह-ए इबादत के खिलाफ है। इबादतगाह जैसी पवित्र जगह को सैनिटाइज कराना उसकी पवित्रता से मजाक है, क्योंकि सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है जो नापाक है। सुरक्षा के लिहाज से पांच लोग ही इबादतगाहों में इबादत करते रहें। इबादतगाहों को सैनिटाइजर से न धुलकर साबुन या सर्फ से धो सकते हैं।