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मृदा परीक्षण के पश्चात ही करें उर्वरक का उपयोग
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बिजनौर। किसान गोष्ठी में उप कृषि निदेशक गिरीश चंद ने कहा कि फसलों में निर्धारित मात्रा से अधिक मात्रा में यूरिया का उपयोग किया जा रहा है। इससे जहां पर्यावरण में प्रदूषण, भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है, वहीं किसानों की लागत भी बढ़ रही है। उन्होंने आह्वान किया कि मृदा परीक्षण के पश्चात ही उर्वरक का उपयोग आवश्यक मात्रा में किया जाएं।
यह बात उन्होंने कृषि भवन के सभागार में सहकारी संस्था इफ्को की ओर से आयोजित किसान गोष्ठी में कहीं। कहा कि खड़ी फसल में नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए नैनों यूरिया तरल का स्प्रे किए जाएं, जिससे किसान की लागत भी घटेगी तथा पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि सभी विक्रेता वास्तविक बीज की ही बिक्री करें। जिस प्रजाति के बीच की बिक्री करें, उसको अपने लाइसेंस पर आवश्यक रूप से दर्ज करा लें।
इफ्को के मुख्य प्रबंधक शैलेंद्र सिहं ने बताया कि इफ्को द्वारा नैनो यूरिया तरल का आविष्कार किया गया। यह उत्पाद खड़ी फसल में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके 4 से 6 मिलीलीटर मात्रा को एक लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में 2-3 स्प्रे करना लाभकारी है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीन सिंह ने बताया कि भूमि में जीवांश की कमी होती जा रही है, जिसको पूरा करने के लिए गोबर की खाद, हरी खाद का उपयोग करना चाहिए। गोबर की खाद की कमी की अवस्था में तरल जैव उर्वरक का उपयोग गोबर की खाद में मिलाकर करना चाहिए। इससे भूमि में सूक्ष्मजीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। रवी त्रिवेदी ने फसलों में लगने वाले रोग तथा बीमारियों व उनकी रोकथाम तथा लक्षणों के बारे में चर्चा की।
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यह बात उन्होंने कृषि भवन के सभागार में सहकारी संस्था इफ्को की ओर से आयोजित किसान गोष्ठी में कहीं। कहा कि खड़ी फसल में नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए नैनों यूरिया तरल का स्प्रे किए जाएं, जिससे किसान की लागत भी घटेगी तथा पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि सभी विक्रेता वास्तविक बीज की ही बिक्री करें। जिस प्रजाति के बीच की बिक्री करें, उसको अपने लाइसेंस पर आवश्यक रूप से दर्ज करा लें।
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इफ्को के मुख्य प्रबंधक शैलेंद्र सिहं ने बताया कि इफ्को द्वारा नैनो यूरिया तरल का आविष्कार किया गया। यह उत्पाद खड़ी फसल में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके 4 से 6 मिलीलीटर मात्रा को एक लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में 2-3 स्प्रे करना लाभकारी है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रवीन सिंह ने बताया कि भूमि में जीवांश की कमी होती जा रही है, जिसको पूरा करने के लिए गोबर की खाद, हरी खाद का उपयोग करना चाहिए। गोबर की खाद की कमी की अवस्था में तरल जैव उर्वरक का उपयोग गोबर की खाद में मिलाकर करना चाहिए। इससे भूमि में सूक्ष्मजीवों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। रवी त्रिवेदी ने फसलों में लगने वाले रोग तथा बीमारियों व उनकी रोकथाम तथा लक्षणों के बारे में चर्चा की।
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