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Bijnor News: नजीबाबाद - बाघ के शिकार पर आमने-सामने यूपी-उत्तराखंड के अफसर

Mon, 24 Jul 2023 11:35 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 24 Jul 2023 11:35 PM IST
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UP-Uttarakhand officers face to face on tiger hunting
-------- देहरादून के लिए खास
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- बढ़ापुर क्षेत्र में बाघ का शिकार होने की घटना को डीएफओ ने नकारा
- उत्तराखंड में जो शिकारी पकड़े गए उनके बयान में बढ़ापुर में बाघ मारने की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर/नजीबाबाद। उत्तराखंड के काशीपुर में बाघ की खाल और हड्डियों के साथ पकड़े गए आरोपियों ने बाघ का बढ़ापुर क्षेत्र में जहर देकर शिकार करने की बात स्वीकार की। इस घटना से बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद ने इन्कार किया है। उधर, उत्तराखंड में पूछताछ के दौरान पकड़े गए शिकारियों ने अपने बयान में बढ़ापुर के जंगलों से बाघ मारने की बात कही थी। इसे लेकर अब नजीबाबाद डीएफओ बाघ की खाल की जांच एनटीसीए के डाटा से कराने की बात कह रहे हैं। ताकि पता चल सके कि बाघ किस क्षेत्र के जंगलों में रहता था।

उत्तराखंड की एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो ने बाघ की सबसे बड़ी खाल और हड्डियों के साथ चार शिकारियों को गिरफ्तार किया था। बाघ का शिकार करने वाले बागीचा धारचूल कृष्ण कुमार, गोठी कालिका धारचूल पौड़ी गढ़वाल निवासी गजेंद्र सिंह, संजय कुमार और हरीश ने पूछताछ में बढ़ापुर के जंगल से बाघ को जहर देकर मारने का अपराध स्वीकार किया है।
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काशीपुर में शिकारियों के पकड़े जाने और खबर सुर्खियों में आने के बाद बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद ने क्षेत्र के बढ़ापुर रेंज में बाघ के शिकार होने के दावे को सिरे से नकार दिया। डीएफओ आशुतोष पांडेय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संपूर्ण भारत में टाइगर्स की गणना कैमरा ट्रैप पद्धति से कराई जाती है। कैमरा ट्रैप में कैद होने वाले सभी बाघों के चित्र नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी द्वारा संचारित कराए जाते हैं। प्रत्येक टाइगर के शरीर के स्ट्रिप्स का पैटर्न भिन्न-भिन्न होता है।
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डीएफओ ने कहा कि बाघ की खाल के स्ट्रिप का मिलान एनटीसीए के डाटा बेस से कराकर यह जांच की जा सकती है कि टाइगर गणना में शिकारियों द्वारा बरामद खाल से संबंधित बाघ किस रिपोर्ट में शामिल है। डीएफओ का दावा है कि हाल के वर्षों में बिजनौर वन प्रभाग नजीबाबाद के किसी भी रेंज में बाघ का शिकार नहीं हुआ है।

वन संरक्षक ने अलर्ट किया, बढ़ाई गश्त
उत्तराखंड में बाघ की खाल के साथ शिकारियों के पकड़े जाने के बाद बिजनौर वन विभाग सतर्क हो गया है। वन संरक्षक ने बिजनौर और नजीबाबाद डीएफओ को अपने क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कुछ दिन पहले शासन के इनपुट के बाद शिकारियों की तलाश में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर जांच बढ़ाई गई थी।


2012 में अमानगढ़ में हुआ था दो बाघों का शिकार
बिजनौर में बाघों का शिकार पहले भी हो चुका है। वर्ष 2012 में अमानगढ़ वन रेंज में शिकारियों ने दो बाघों का शिकार किया था। रेहड़ थाना पुलिस और वन विभाग ने इन शिकारियों को बाघों की खाल और हड्डी के साथ पकड़ा था। पूछताछ में इन शिकारियों ने खटका लगाकर अमानगढ़ वन रेंज में बाघों को मारने की बात स्वीकार की थी।
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