भर आईं आंखें: जिस बेटे को मान लिया था मरा, सोशल मीडिया पर उसे देख भावुक हुए परिजन, 20 साल बाद मिला
बिजनाैर के धामपुर क्षेत्र से नाैकरी करने गए बेटे को सोशल मीडिया के जरिए 20 साल बाद माता पिता का प्यार मिला। बताया गया कि युवक पंजाब में नाैकरी के लिए गया था, जहां उसे बंधक बनाकर रखा गया था।
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बिजनाैर के धामपुर थाना क्षेत्र के गांव बगदाद अंसार निवासी अब्दुल शकूर का पुत्र मोहम्मद नाजिम (35) 20 साल पहले पंजाब में नौकरी करने के लिए गया था। लेकिन उसे वहां पर कुछ लोगों ने बंधक बना लिया था। मारपीट कर उससे खेती-बाड़ी का काम करा रहे थे। पंजाब के बाबा रतन देव समिति के पदाधिकारियों ने पता लगने पर उसे किसी तरह से डेढ़ साल पहले डेरे से बंधन मुक्त कराया। अपने आश्रम में ले आए और निरंतर उसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करते रहे। सोशल मीडिया में फोटो के वायरल होने से नाजिम को उसके परिजन मिल गए। बृहस्पतिवार को परिजन आश्रम से अपने पुत्र नाजिम को घर ले आए। नाजिम को देख परिवार के लोग प्रसन्न हैं।
बगदाद अंसार निवासी अब्दुल शकूर का कहना है कि पुत्र नाजिम उनका छह पुत्र पुत्रियों में सबसे बड़ा पुत्र है। 15 वर्ष की अवस्था में वह पंजाब में नौकरी करने के लिए गया था।लगभग एक महीने तक नाजिम ने लुधियाना की एक फैक्टरी में नौकरी की लेकिन उसके बाद नाजिम का कोई आता-पता नहीं लगा। उन्होंने काफी प्रयास किया लेकिन नाजिम के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
उन्होंने धामपुर पुलिस, पुलिस अधीक्षक बिजनौर और पंजाब में भी नाजिम के गायब हो जाने की रिपोर्ट कायम कराई लेकिन पुलिस नाजिम का पता नहीं निकल पाई। अब वह यह मानकर घर बैठ गए थे कि उनका पुत्र नाजिम दुनिया में अब नहीं है। चार दिन पहले जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो को उन्होंने देखा तो वह फोटो देखकर आश्चर्य चकित रह गए। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
मोबाइल पर फोन से संपर्क करने के बाद वह दो दिन पहले अमृतसर पंजाब संबंधित समिति आश्रम में पहुंचे। वहां पर संस्था के पदाधिकारियों से वार्ता की। वहां उन्होंने नाजिम को पहचान लिया। नाजिम उन्हें देखकर भावुक हो गया। नाजिम के मिलने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
अब वह नाजिम का निकाह करेंगे , काम करने भी बाहर नहीं जाने देंगे
पिता अब्दुल शकूर और अन्य परिजनों का कहना है कि अब वह नाजिम को कभी नौकरी करने के लिए बाहर नहीं जाने देंगे। वह घर पर ही काम करेंगे क्योंकि उनके परिवार में चाऊमीन, बर्गर आदि का ठेला लगाया जाता है।
उधर नाजिम का कहना है की कुछ लोगों ने उसे वहां पर पकड़ लिया था और उसके साथ मारपीट कर उसे खेती-बाड़ी का काम करते थे। वह बहुत परेशान था। उसने वहां से निकलने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सका। समिति के कुछ पदाधिकारी पता लगने पर पहुंचे और उन्होंने बंधन मुक्त कराया। वह एक डेढ़ साल से आश्रम पर ही रह रहा था। वहीं खा-पी रहा था और आश्रम में सेवा कर रहा था। संस्था के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उसे उसके परिजनों से मिलवाया। वह संस्था के पदाधिकारियों की जमकर तारीफ कर रहा है। कह रहा है कि संस्था के पदाधिकारियों ने ही उसे उसके परिजनों से मिलवाया है। वह पदाधिकारियों के एहसान को ताउम्र नहीं भूल सकेगा।