बिजनौर: सोता रहा निजाम, बिक गई जिला पंचायत की करोड़ों की जमीन, अब पोल खुली तो मचा हड़कंप
आठ करोड़ कीमत की 2700 वर्ग गज जमीन को चार टुकड़ों में बांट कर चार लोगों के नाम रजिस्ट्री करा दी गई। अब पोल खुली तो हड़कंप मच गया।
विस्तार
भू-माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं, इसकी बानगी बिजनौर में नजर आई। यहां पर जिला पंचायत की करीब आठ करोड़ रुपये कीमत की जमीन का फर्जी बैनामा कर दिया। अहम बात ये रही कि अब इस मामले में निबंधन विभाग सहित कोई भी कुछ बताने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा है। वहीं अपनी जमीन बचाने के लिए जिला पंचायत ने कार्रवाई शुरू करते हुए जमीन की चहारदीवारी कराने के लिए नींव खोदने के साथ ही इस जमीन की हुई रजिस्ट्री को निरस्त करने के लिए निबंधन विभाग को पत्र लिखा है।
ये है पूरा मामला
नहटौर में झालू रोड तिराहे के सामने जिला पंचायत की 2700 गज जमीन है। यह जमीन राजस्व अभिलेखों में कच्ची सड़क जिला पंचायती के नाम से दर्ज है। अभी तक यह जमीन खाली पड़ी हुई है। इस जमीन पर जिला पंचायत ने कुछ दिन पूर्व ही व्यवसायिक कांप्लैक्स बनाने का प्रस्ताव पारित किया हुआ है। सर्किल रेट के हिसाब से इस जमीन की कीमत करीब चालीस लाख रुपये है, लेकिन हाईवे और शहर के पास होने के कारण बाजार कीमत बीस गुना ज्यादा अर्थात करीब आठ करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जिला पंचायत द्वारा कांप्लैक्स बनाने की तैयारी का समाचार 12 अक्तूबर को समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के दो दिन बाद 14 अक्तूबर को किसी राजेंद्र सिंह ने इस जमीन को चार हिस्सों में बांट कर 675-675 वर्ग गज के चार बैनामे चार लोगों को कर दिए। इसके बाद ये लोग जमीन पर कब्जा करने की तैयारी में लग गए।
खबरी की सूचना पर जिला पंचायत ने कब्जा कार्रवाई की शुरू
भू-माफिया की इस कारगुजारी की सूचना किसी ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को दी। जिस पर जिला पंचायत हरकत में आई और गुरुवार को मौके पर जाकर आनन-फानन अपनी इस जमीन की चहारदीवारी कराने के लिए नींव खोदनी शुरू कर दी। जैसे ही इसकी सूचना रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को मिली तो उन्होंने आकर विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार उनके साथ एक जिला पंचायत सदस्य भी था।
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जमीन खरीदने वाला एक व्यक्ति जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव का
जिन चार लोगों को यह जमीन बेची गई है, उनमें से एक जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव का निवासी है। ऐसे में तमाम चर्चा इस पूरे मामले को लेकर उठनी शुरू हो गई हैं।
करीब 20 साल से थी इस जमीन पर नजर
जिला पंचायत के एएमए श्याम बहादुर शर्मा के अनुसार करीब 20 साल पहले दो लोगों के बीच इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर कानूनी लड़ाई की बात सामने आई है। लेकिन जिला पंचायत को इसमें कभी पार्टी नहीं बनाया गया। एएमए के कथन पर गौर करें तो बहुत ही शातिराना तरीके से इस जमीन पर कब्जे की नींव 20 साल पहले पड़ चुकी थी। क्योंकि दो लोगों ने आपसी साज से एक दूसरे के खिलाफ वाद दायर किया। ऐसे में फैसला किसी भी एक के पक्ष में या बाद में आपसी फैसला दाखिल कर कोर्ट से अपने पक्ष में फैसला लेकर कानूनी तरीके से इस जमीन को कब्जाने की तैयारी थी।
कैसे हो गई रजिस्ट्री? रजिस्ट्रार चुप
जमीन बेचने वाले के पास कोई इस जमीन की कोई रजिस्ट्री न होने की बात जिला पंचायत के अधिकारी कह रहे हैं। बैनामा में भी कोई गाटा या खसरा नंबर आदि दर्ज नहीं है। तो निबंधन विभाग ने किसी आधार पर इस जमीन की रजिस्ट्री कर दी? इसे लेकर निबंधन विभाग भी कटघरे में खड़ा हो गया है।
पूरे मामले के पीछे हैं रसूखदार, रुकवा दी नींव खुदाई
अब चर्चा है कि इस पूरे मामले के पीछे बहुत ही प्रभावशाली तंत्र जुड़ा है। जिसके दबाव में सारा खेल हुआ है। क्योंकि एक जिला पंचायत सदस्य की नींव खोदाई के विरोध करने वालों के साथ उपस्थिति भी सवाल उठा रही है। यही नहीं बृहस्पतिवार को जिला पंचायत ने जब नींव खोदाई का काम शुरू कराया तो शाम के समय एक प्रशासनिक अधिकारी ने इस काम को रुकवा दिया। आखिर वह कौन है? जिसके इशारे पर पूरा खेल चल रहा है। अब जनता के बीच तमाम चर्चाएं इसे लेकर हो रही हैं।
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कोर्ट में फंस सकता है कांप्लैक्स निर्माण
जिला पंचायत की कांप्लैक्स बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना अब कानूनी दांव पेंच में उलझ सकती है। क्योंकि जिन लोगों के नाम बैनामा हुए हैं, वह कोर्ट में जाकर अपने मालिकाना हक का दावा निश्चित रूप से ठोकेंगे। ऐसे में फैसला बाद में किसी के भी पक्ष में आए, लेकिन फिलहाल यह प्रोजेक्ट फंसता नजर आ रहा है।
नहटौर में जिला पंचायत की जमीन है। जिस पर कांप्लैक्स बनाने की तैयारी है, फिलहाल दीवार बनाई जा रही है। अब जानकारी लगी कि इस जमीन के बैनामे कर दिए गए हैं। इन बैनामों को खारिज कराने के लिए लिए निबंधक को पत्र लिखा गया है। भूमाफिया में दर्ज कराने की कार्रवाई भी जिला पंचायत की ओर से की जा रही है। - श्याम बहादुर शर्मा, एएमए
हमारी जमीन निर्विवाद है। यदि कोई फर्जी तरीके से खरीद फरोख्त करता है तो वह स्वयं जिम्मेदार होगा। मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था, जिला पंचायत के अधिकारियों से बात कर पूरे मामले का पता करता हूं। - साकेंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष
हम संपत्ति पर ही कब्जे के मुद्दे को लेकर चल रहे हैं। यह मामला गंभीर है, इसे लेकर हमारा प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर इस मुद्दे को उठाएगा। किसी कीमत पर कब्जा नहीं होने दिया जायेगा और इसके पीछे जो भी लोग हैं, उनको बेनकाब कर कार्रवाई कराई जाएगी। - आयुष चौहान, जिला पंचायत सदस्य