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Bijnor News: चांदपुर रेलवे स्टेशन में आग लगा फहरा दिया था तिरंगा

Sun, 13 Aug 2023 11:43 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Sun, 13 Aug 2023 11:43 PM IST
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Tricolor was hoisted by setting fire in Chandpur railway station
चांदपुर के स्वतंत्रता सेनानी महेश चंद्र गुप्ता। (फाइल फोटो) स्रोत परिजन
- आजादी के आंदोलन में क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों का भी बड़ा योगदान
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फोटो समाचार
राजीव अग्रवाल
चांदपुर। आजादी के आंदोलन में चांदपुर क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों का भी बहुत योगदान रहा है। उनके द्वारा अनेक लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के जागरूक किया गया था।
स्वतंत्रता आंदोलन की रूपरेखा रेलवे स्टेशन रोड स्थित महेश चंद्र गुप्ता के आवास पर तैयार की जाती थी। चांदपुर क्षेत्र के गांव किरतपुर, पीपलसाना, इस्माईलपुर, दत्तियाना, अजदेव खानपुर, सैंदवार, बास्टा, शेखपुरा, जमालुद्दीनपुर आदि अनेक गांव के लोगों ने देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई है। जब महेश चंद्र गुप्ता की आयु 17 वर्ष की थी, तब अपने साथी 18 वर्षीय महेश शरण गर्ग के साथ 1942 को रेलवे स्टेशन पर बनी अंग्रेजी हुकूमत के रिकार्ड रूम को फूंककर तिरंगा झंडा लहराया था। आंदोलन में वे जेल भी गए।
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महेश चंद्र गुप्ता की 82 वर्षीय पत्नी माया गुप्ता ने बताया कि जेल में इन स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बनियान पर नीम के पत्तों को पीसकर हरा रंग व गेरू से रंग भरकर व बनियान की सफेद पट्टी से तिरंगा तैयार किया था। महेश चंद्र गुप्ता देश की आजादी के आंदोलन में योगदान देने के साथ ही नगर क्षेत्र में समाज सेवा के कार्य में भी अग्रणी रहे हैं।
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चांदपुर के मोहल्ला कटारमल निवासी रामेश्वरप्रसाद बंसल करीब 20-22 साल की उम्र में ही देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए थे। उन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वर्ष 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय रामेश्वरप्रसाद बंसल के पुत्र राकेश बंसल ने बताया कि आंदोलन के चलते अंग्रेजों की बात न मानने पर उनके पिता को 17 नवम्बर 1942 से 27 जनवरी 1944 तक करीब 436 दिन प्रदेश की विभिन्न जेलों में रहना पड़ा था। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय रामेश्वर प्रसाद बंसल को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त 1972 को स्वतंत्रता के 25वें वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था।
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