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Bijnor News: इलाज बाद में होगा, पहले परिवार की सदस्यता साबित करो
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-आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के लिए शुरू हुई नई व्यवस्था
-निजी अस्पताल इलाज से पहले आयुष्मान कार्ड धारकों परिवार का सदस्य होने का मांग रहे सबूत
-फर्जी आयुष्मान कार्ड से इलाज पर रोक लगाने के लिए शुरू की व्यवस्था
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। सरकार ने गरीबों के बेहतर इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना चला रखी है। मगर फर्जीवाड़े के फेर में सही लाभार्थियों को भी इलाज में परेशानी हो रही है। अब आयुष्मान कार्ड धारक मरीज को इलाज से पहले परिवार की सदस्यता दिखानी पड़ रही है। इसके बाद निजी अस्पतालों में इलाज हो रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार पैसे कमाने के चक्कर में कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड बना दिए। किसी लाभार्थी का कार्ड किसी दूसरे के नाम जारी कर दिया। जिससे उसके परिवार के सदस्य भी नहीं जुड़े हैं। फर्जी कार्ड से लोग अस्पतालों में इलाज भी करा रहे हैं। इसे रोकने के लिए ही गाइडलाइन जारी की गई है। जिसके चलते अब मरीज को अस्पताल में इलाज से पहले अपने परिवार का आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाना होगा।
इसके बाद मरीज का अस्पताल में इलाज किया जाएगा। बिना परिवार की सदस्यता दिखाए इलाज नहीं किया जा रहा है। इस बीच मरीज बीमारी से लड़ता रहता है।
केस : एक
एक मरीज सीएमओ कार्यालय में आयुष्मान कार्ड लेकर आया। उसने कहा कि अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो रहा है। जब लाभार्थी का नाम और नंबर पोर्टल पर डालकर देखा तो वहां वह व्यक्ति पात्र नहीं मिला। मरीज ने बताया कि उसने आयुष्मान कार्ड हरिद्वार में चार हजार रुपये देकर बनवाया है।
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केस : दो
बिजनौर स्थित एक निजी अस्पताल में एक व्यक्ति आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने पहुंचा। बताया कि वहां आयुष्मान मित्र ने परिवार के सदस्यों की आईडी मांगी। उसने परिवार के दूसरे सदस्यों के आधार कार्ड दिखाए, तब उसका इलाज हुआ।
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आयुष्मान कार्ड बनाने में बिजनौर 36वें स्थान पर
जिले में 15,61,094 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से करीब साढ़े 10 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं। आयुष्मान कार्ड बनाने में बिजनौर प्रदेश में 36वें स्थान पर हैं।
आयुष्मान कार्ड से लाभ देने में प्रदेश में 14वें स्थान पर बिजनौर
जिले में 1,37,543 लाभार्थियों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया जा चुका है। लाभ देने में बिजनौर 14वें स्थान पर है। साथ ही लाभार्थियों को 196.47 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया है।
हर साल पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा
आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभार्थियों को हर साल पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलता है। लाभार्थी निजी या सरकारी कहीं अपना इलाज करा सकता है। आयुष्मान भारत योजना के तहत बिजनौर में 72 निजी और 24 सरकारी अस्पताल जुड़े हैं।
आयुष्मान कार्ड धारक सभी मरीजों का अस्पताल में इलाज हो रहा है। इलाज से पहले अब मरीजों को परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाना होगा। यह इसलिए किया गया है, ताकि फर्जी आयुष्मान कार्ड से इलाज पर रोक लगाई जा सके। - डॉ. राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना, बिजनौर
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-निजी अस्पताल इलाज से पहले आयुष्मान कार्ड धारकों परिवार का सदस्य होने का मांग रहे सबूत
-फर्जी आयुष्मान कार्ड से इलाज पर रोक लगाने के लिए शुरू की व्यवस्था
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। सरकार ने गरीबों के बेहतर इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना चला रखी है। मगर फर्जीवाड़े के फेर में सही लाभार्थियों को भी इलाज में परेशानी हो रही है। अब आयुष्मान कार्ड धारक मरीज को इलाज से पहले परिवार की सदस्यता दिखानी पड़ रही है। इसके बाद निजी अस्पतालों में इलाज हो रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार पैसे कमाने के चक्कर में कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड बना दिए। किसी लाभार्थी का कार्ड किसी दूसरे के नाम जारी कर दिया। जिससे उसके परिवार के सदस्य भी नहीं जुड़े हैं। फर्जी कार्ड से लोग अस्पतालों में इलाज भी करा रहे हैं। इसे रोकने के लिए ही गाइडलाइन जारी की गई है। जिसके चलते अब मरीज को अस्पताल में इलाज से पहले अपने परिवार का आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाना होगा।
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इसके बाद मरीज का अस्पताल में इलाज किया जाएगा। बिना परिवार की सदस्यता दिखाए इलाज नहीं किया जा रहा है। इस बीच मरीज बीमारी से लड़ता रहता है।
केस : एक
एक मरीज सीएमओ कार्यालय में आयुष्मान कार्ड लेकर आया। उसने कहा कि अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो रहा है। जब लाभार्थी का नाम और नंबर पोर्टल पर डालकर देखा तो वहां वह व्यक्ति पात्र नहीं मिला। मरीज ने बताया कि उसने आयुष्मान कार्ड हरिद्वार में चार हजार रुपये देकर बनवाया है।
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केस : दो
बिजनौर स्थित एक निजी अस्पताल में एक व्यक्ति आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने पहुंचा। बताया कि वहां आयुष्मान मित्र ने परिवार के सदस्यों की आईडी मांगी। उसने परिवार के दूसरे सदस्यों के आधार कार्ड दिखाए, तब उसका इलाज हुआ।
आयुष्मान कार्ड बनाने में बिजनौर 36वें स्थान पर
जिले में 15,61,094 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से करीब साढ़े 10 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं। आयुष्मान कार्ड बनाने में बिजनौर प्रदेश में 36वें स्थान पर हैं।
आयुष्मान कार्ड से लाभ देने में प्रदेश में 14वें स्थान पर बिजनौर
जिले में 1,37,543 लाभार्थियों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया जा चुका है। लाभ देने में बिजनौर 14वें स्थान पर है। साथ ही लाभार्थियों को 196.47 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया है।
हर साल पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा
आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभार्थियों को हर साल पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलता है। लाभार्थी निजी या सरकारी कहीं अपना इलाज करा सकता है। आयुष्मान भारत योजना के तहत बिजनौर में 72 निजी और 24 सरकारी अस्पताल जुड़े हैं।
आयुष्मान कार्ड धारक सभी मरीजों का अस्पताल में इलाज हो रहा है। इलाज से पहले अब मरीजों को परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाना होगा। यह इसलिए किया गया है, ताकि फर्जी आयुष्मान कार्ड से इलाज पर रोक लगाई जा सके। - डॉ. राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना, बिजनौर