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Bijnor News: ग्रामीण अंचल में गूंज रहीं पारंपरिक रागनियां व होली गीत

Tue, 03 Mar 2026 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2026 11:21 PM IST
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Traditional raginis and Holi songs resonate in the rural areas.
ब्रजवीर चौधरी
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बिजनौर
रंगों के पर्व होली पर पिछले कई दिनों से ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक लोकगीतों की स्वर लहरियां वातावरण को सराबोर कर रही हैं। ग्रहण के कारण इस बार तीन दिन तक होली का उल्लास बना हुआ है। शाम होते ही चौपालों पर ढोलक की थाप पर “हाए पिया तुम नहीं बचोगे, मेरा जिवरा न्यू लरजे” और “राम नाम गुण गाए सै, भंग पकोड़ी खाए सै” जैसे पारंपरिक गीत माहौल को रंगीन बना रहे हैं। बुजुर्ग पूरे उत्साह से इन गीतों को गा रहे हैं, जबकि नई पीढ़ी इन लोकधुनों से दूर होती नजर आ रही है।
ग्राम बरकातपुर खिरनी निवासी बुजुर्ग सीताराम का कहना है कि होली के गीतों में केवल रंग-गुलाल ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक झलक भी देखने को मिलता है। गांवों में लोग ढोलक के साथ सामूहिक रूप से इन गीतों का गायन करते हैं।
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ग्राम पट्टी निवासी तेगबहादुर शास्त्री ने बताया कि होली से पहले प्रतिदिन शाम को चौपाल पर लोग एकत्र होकर गीत गाते हैं। उन्होंने “राजा कारक बढ़ पे चढ़ गया, रानी बार-बार बरजे ” जैसी रागनी सुनाकर माहौल को जीवंत कर दिया। वहीं ग्राम सालमाबाद के चौधरी नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह और उनके साथ के व्यक्ति एकत्र होकर होली गई है। कहा कि पिछले कई दिनों से ढोल की थाप पर गीत गा रहे हैं। पहले होली “मत मारे दर्गन की चोट ओ रसिया ” गाकर पारंपरिक शैली की झलक प्रस्तुत की। वरिष्ठ अधिवक्ता हुकम सिंह ने बताया कि गांव की चौपाल गीत गाते हैं। रात उन्होंने मोहल्ले में चौपाल पर “पहली चोट बचाय गई कान्हा” सुनाई। फिर कई ने होली पर पुराने व नए गीत सुनाएं। उनका मानना है कि इन लोकगीतों को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि होली की सांस्कृतिक विरासत जीवित रह सके।
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ग्राम शादीपुर निवासी सोमपाल सिंह ने होली गीत की कुछ लाइन जैसे कहें मीर्ग सुनो भाई राजा, एक नार ऐसी बतलाऊ जीवन भर तू याद करें की पंक्ति सुनाई। कहा कि होली परंपराओं का त्योहार है। इसका खेती व फसलों से भी संबंध है।
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