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महात्मा विदुर की तपोस्थली पर रात गुजार सकेंगे पर्यटक

Tue, 24 Aug 2021 11:53 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Aug 2021 11:53 PM IST
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Tourists will be able to spend the night at the shrine of Mahatma Vidur
महात्मा विदुर की तपोस्थली पर रात गुजार सकेंगे पर्यटक
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बिजनौर। जिला प्रशासन ने महात्मा विदुर की भूमि के विकास के साथ-साथ वहां पर पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। अभी तक यहां वृद्धा आश्रम, आयुर्वेदिक संस्थान खोलने की तैयारी चल रही थी, लेकिन अब इनके साथ-साथ यहां बने गेस्ट हाउस को भी रात्रि विश्राम के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां पर रुकने के लिहाज से ये गेस्ट हाउस बनाए गए थे, जिनकी संख्या दस से ज्यादा है। जिला प्रशासन अब इन्हें तैयार कर रहा है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक आसानी से नाइट स्टे भी कर सकें। इससे एक ओर वहां से सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी तो वहीं दूसरी तरफ पर्यटकों को भी मामूली शुल्क पर ही कमरे उपलब्ध हो जाएंगे। यहां बनने वाले आयुर्वेदिक संस्थान में इलाज कराने वाले मरीज भी रुक सकेंगे।
विदुरकुटी महाभारत कालीन स्थल है। जिला मुख्यालय से इसकी दूरी करीब 12 किलोमीटर दूर है। यहां पर जनपद ही नहीं, बल्कि देश भर के पर्यटक महात्मा विदुर की कुटी के नजारे देखने आते हैं। जिला प्रशासन पिछले कई साल से इसे पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसी के चलते यहां पर अभी तक वृद्धा आश्रम, आयुर्वेदिक संस्थान आदि खोलने की तैयारी चल रही हैं, लेकिन अब इनके साथ-साथ यहां बने गेस्ट हाउस को भी रात्रि विश्राम के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे पूर्व यहां पर विभिन्न प्रकार के पौधों से सुसज्जित विदुर वाटिक की स्थापना की गई है और विभिन्न प्रकार से विकसित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए जिला प्रशासन ने जिला मुख्यालय से ही चांदपुर को जाने वाली रोडवेज बसों को विदुर आश्रम तक जाने की अनुमति दे रखी है। गंज दारानगर क्षेत्र के निवासियों की मानें तो वहां पर हर्बल चाय, अर्जुन आदि वृक्षों की छाल की आयुर्वेदिक चाय और काढ़ा आदि की व्यवस्था रहती है।
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भगवान श्रीकृष्ण के पड़े थे कदम
मान्यता है कि श्रीकृष्ण भगवान ने यहां पर आकर विश्राम किया था और दुर्योधन की मेवा त्यागकर महात्मा विदुर की कुटी पर बथुए का साग चखा था। तभी से यह कहावत प्रचलित हो गई है कि दुर्योधन की मेवा त्यागी, साग विदुर घर खायो मोहन। आमतौर पर होता ये है कि गैर राज्यों एवं प्रदेशों से आने वाले पर्यटक जल्दबाजी में ही आते हैं। वहां पर रात में विश्राम के लिए व्यवस्था न होने के कारण उन्हें या तो बिजनौर आजकल होटलों आदि की ओर रुख करना पड़ता है या फिर वे अपने घरों के लिए वापसी करने को ही मजबूर होते हैं।
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---- कोट
तेजी से काम चल रहा है। यहां बनने वाले आयुर्वेदिक संस्थान में इलाज कराने आने वाले लोग यहां रुक सकेंगे। मरम्मत का कार्य चल रहा है। शीघ्र ही यह पर्यटक स्थल, आयुर्वेदिक सेंटर के रूप में विकसित हो जाएगा - उमेश मिश्रा, डीएम
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