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इस बार दस हजार से कम रहेगा हार-जीत का अंतर

Sun, 06 Feb 2022 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 11:51 PM IST
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Tough competition in many seats, the margin of defeat and victory will be less
कई सीटों पर कड़ा मुकाबला, हार-जीत का अंतर रहेगा कम
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिले में जातीय समीकरण और मतदान प्रतिशत में जीत का योग तलाश रहे प्रत्याशियों को पुराने आंकड़े भी डरा रहे हैं। जिले की कई सीटों पर हार और जीत में वोटों का अंतर कम ही रहने के आसार नजर आ रहे हैं। पिछले इतिहास पर नजर डालें तो जीत का आंकड़ा कुल मतदान में से 40 प्रतिशत के आसपास ही रहा।
चार सीटों पर जीतने वाले प्रत्याशियों ने 40 प्रतिशत को भी पार कर दिया था। ऐसा नहीं है कि हारने वाले प्रत्याशी बहुत पीछे रहे थे, बल्कि कुछ सीटों पर तो नजदीकी मामला ही रहा था। पिछले चुनाव में मतदान प्रतिशत की बात करें तो 67.15 प्रतिशत हुआ था, जो वर्ष 2012 की तुलना में तीन प्रतिशत ज्यादा था। जिलेभर में यूं तो मतदाताओं का आंकड़ा सभी प्रत्याशियों ने जोड़ लिया है। इस बार मतदान प्रतिशत भी कई प्रत्याशियों की हार-जीत तय कर सकता है। जहां बसपा और गठबंधन अपने वोट बैंक की ओर से मतदान प्रतिशत पहले के मुकाबले बढ़ने की उम्मीद में जीत तलाश रहे हैं। वहीं, भाजपा भी अपने वोट बैंक को मतदान के लिए जागरूक करने में लगी हुई है। इसका कारण यह भी है कि प्रत्याशी यह अच्छे से जानते हैं कि जिले में कई सीटों पर मुकाबला आसपास का रह सकता है। ऐसे में जीत तभी संभव है, जब उनका वोट बैंक मतदान स्थल तक पहुंच जाए। (संवाद)
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बन रहे नजदीकी मुकाबले के आसार
जिले में यूं तो रोजाना समीकरण बदले-बदले से नजर आ रहे हैं, लेकिन यह बात धीरे-धीरे साफ हो रही है कि मुकाबला कई सीटों पर कड़ा होने के आसार हैं। यहां तक की राजनीति के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नजीबाबाद, नगीना, बिजनौर, धामपुर, चांदपुर में मुकाबला चाहे जो जीते, लेकिन हार-जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं होगा।
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पुराने वोट बैंक में प्लस का समीकरण तलाश रहे
वर्तमान हालात और पुराने इतिहास पर नजर डालें तो सपा, बसपा, भाजपा अपने पुराने वोट बैंक को छिटकने नहीं देना चाहती। सभी सीटों पर पहले पुराने वोट बैंक को मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा इसमें दूसरी जातियों के वोट प्लस करके ही जीत का समीकरण कराने की रणनीति पर काम हो रहा है। बसपा को देखा जाए तो दलित वोट के अलावा मुस्लिम और दूसरी जातियों के वोट के सहारे जीत की ओर बढ़ने की तैयारी हो रही है। सपा-रालोद गठबंधन भी इसी तर्ज पर चुनाव में जुटता दिख रहा है। यहां पर मुस्लिम वोटों के अलावा जाट और दूसरी जातियों के वोटों को जोड़ने के लिए प्रत्याशी जी-जान लगाते नजर आ रहे हैं। भाजपा की बात करें तो भाजपा अपने वोट बैंक में दलितों को जोड़ने पर काम कर रही है। भाजपा हिंदुत्व के सहारे जीत का समीकरण तैयार करने में जुटी हुई है।
पिछले चुनाव में किसे कितने प्रतिशत वोट मिले
बिजनौर विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
सुचि चौधरी भाजपा 42.94
रुचि वीरा सपा 32.84
रशीद अहमद बसपा 20.25
--------
नहटौर विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
ओमकुमार भाजपा 40.59
मुन्नालाल प्रेमी कांग्रेस 28.42
विवेक सिंह बसपा 25
-------
चांदपुर विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
कमलेश सैनी भाजपा 42.26
मो.इकबाल बसपा 25.94
मो.अरशद सपा 16.72
-----------
नूरपुर विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
लोकेंद्र चौहान भाजपा 38.98
नईमुल हसन सपा 32.70
गोहर इकबाल बसपा 22.59
--------
नजीबाबाद विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
तस्लीम अहमद सपा 37.54
राजीव अग्रवाल भाजपा 36.62
जमील अहमद बसपा 20.87
------
नगीना विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
मनोज पारस सपा 36.75
ओमवती भाजपा 32.95
वीरेंद्र पाल बसपा 23.67
-------
बढ़ापुर विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
सुशांत सिंह भाजपा 35.44
हुसैन अहमद सपा 29.31
फहद यजदानी बसपा 21.31
--------
धामपुर विधानसभा सीट
प्रत्याशी वोट प्रतिशत
अशोक राणा भाजपा 42.58
मूलचंद चौहान सपा 33.32
मोहम्मद गाजी बसपा 22.19
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