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जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा
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जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा
बिजनौर। जिला अस्पताल कोरोना काल में भी रेफर सेंटर बनकर रह गया है। वर्तमान में जिला अस्पताल में 27 के सापेक्ष मात्र 14 चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं। यहां पर लंबे अरसे से कार्डियोलॉजिस्ट, ईएनटी, चेस्ट फिजीशियन आदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
कोरोना काल में चिकित्सकों की उपयोगिता बढ़ गई है। करीब 40 लाख की आबादी वाले जिले में भी सरकारी विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा है। जिला अस्पताल में वैसे तो लोगों को विभिन्न प्रकार से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। जिला अस्पताल लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। इस कारण यहां के चिकित्सक इमरजेंसी के अधिकतर केस रेफर करने को मजबूर हैं। फिलहाल जिला अस्पताल में लंबे अरसे से कार्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजीशियन नहीं है। लगभग दो साल से ईएनटी सर्जन का भी टोटा है। इसके अलावा पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट के दो-दो पद के सापेक्ष दोनों पदों पर एक-एक से ही काम चल रहा है। सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को दूर करने तथा पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने के लिए शासन-प्रशासन को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन बार बार प्रयास करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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बिजनौर। जिला अस्पताल कोरोना काल में भी रेफर सेंटर बनकर रह गया है। वर्तमान में जिला अस्पताल में 27 के सापेक्ष मात्र 14 चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं। यहां पर लंबे अरसे से कार्डियोलॉजिस्ट, ईएनटी, चेस्ट फिजीशियन आदि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
कोरोना काल में चिकित्सकों की उपयोगिता बढ़ गई है। करीब 40 लाख की आबादी वाले जिले में भी सरकारी विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा है। जिला अस्पताल में वैसे तो लोगों को विभिन्न प्रकार से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। जिला अस्पताल लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। इस कारण यहां के चिकित्सक इमरजेंसी के अधिकतर केस रेफर करने को मजबूर हैं। फिलहाल जिला अस्पताल में लंबे अरसे से कार्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजीशियन नहीं है। लगभग दो साल से ईएनटी सर्जन का भी टोटा है। इसके अलावा पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट के दो-दो पद के सापेक्ष दोनों पदों पर एक-एक से ही काम चल रहा है। सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को दूर करने तथा पर्याप्त संसाधन मुहैया कराने के लिए शासन-प्रशासन को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन बार बार प्रयास करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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