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चार साल में बंद हुई सरकार की तीन योजनाएं

Tue, 14 Dec 2021 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:21 AM IST
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Three schemes of the government closed in four years
चार साल में बंद हुई सरकार की तीन योजनाएं
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बिजनौर। एक तरफ सरकार की ओर से श्रमिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ चार सालों में तीन योजनाएं बंद हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन योजनाओं को यूपी भवन और सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की तरफ से बंद किया गया है। कुछ योजनाएं सरकार की तरफ से शुरू की गई, लेकिन वो कभी जिले में शुरू नहीं हो पाई।
साइकिल सहायता योजना 2014 में शुरू की गई थी, जो तीन साल तक चली। इसके बाद 2017 में बंद हो गई। इसका लाभ जिले के 23 हजार 423 श्रमिकों को मिला। इस योजना का उद्देश्य जो श्रमिक पैदल चलकर मजदूरी करने के लिए जाते हैं, उन्हें लाभ दिया जाना था। इस योजना के तहत पंजीकृत श्रमिक को जीवन में एक बार लाभ मिलना था। इसके बाद 2017 में यूपी भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की तरफ से बंद कर दिया गया। सौर ऊर्जा सहायता योजना भी जिले में शुरू होने से पहले ही बंद हो गई। इसके लिए सरकार की तरफ से पंजीकृत श्रमिकों के फार्म भरवाए गए थे, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला था। सहायक श्रम आयुक्त उमेश कुमार ने बताया कि सौर ऊर्जा योजना का लाभ अनुबंध तरीके से होना था, लेकिन आज तक किसी को भी इसका लाभ नहीं मिला है। यह भी 2017 के आसपास ही बंद हो गई। हालांकि योजना बंद होने का सरकार की तरफ से कोई लिखित आदेश नहीं आया है।
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चिकित्सा सहायता योजना के तहत उन श्रमिकों को ही लाभ मिलता था, जिनका श्रम विभाग में पंजीकरण हो। यह योजना 2020 में बंद हो गई है। इसका लाभ 29 हजार 928 श्रमिकों को मिला है। इसके तहत सरकार की तरफ से श्रमिक को इलाज के लिए सालाना तीन हजार रुपये दिए जाते थे। मगर अब श्रमिक इस योजना से भी वंचित हैं।
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आवासीय विद्यालय योजना
इसके साथ ही सरकार की तरफ से शुरू की गई एक और योजना आवासीय विद्यालय भी है। ये विद्यालय यूपी में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर खोले जा रहे थे। सरकार की तरफ से शुरू में इटावा, भदोही, कन्नौज, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, ललितपुर, बहराइच, गाजियाबाद, कानपुर, आजमगढ़, आगरा और मेरठ में संचालन किया जाना था, लेकिन अभी तक बिजनौर जिले में सरकार की तरफ से शुरू की गई आवासीय विद्यालय योजना का कोई स्कूल नहीं है।
आवासीय सहायता योजन
यूपी सरकार द्वारा शुरू की गई आवासीय सहायता योजना का इस बार बजट नहीं आया है। इसके तहत पंजीकृत श्रमिक को मकान बनाने के लिए एक लाख रुपये दो किस्तों में देने थे, लेकिन श्रमिक इससे भी वंचित है। हालांकि प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत श्रमिकों को लाभ मिल रहा है।

भोजन सहायता योजना
श्रमिकों के लिए भोजन सहायता योजना भी चलाई गई थी। सहायक श्रम आयुक्त उमेश कुमार ने बताया कि इसके तहत एक श्रमिक पांच रुपये जमा करके भोजन कर सकता था, उसे भोजन में छह रोटी, दो सब्जी, गुड़, सलाद, अचार, हरी मिर्च, चावल मिलता था। यह योजना लखनऊ और नोएडा में प्रायोगिक तौर पर शुरू हुई थी, लेकिन मजदूरों के इच्छुक न होने पर बंद हो गई।
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