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मिनी बस पेड़ से टकराई, तीन नेपाली नागरिकों की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Updated Fri, 03 Aug 2018 12:20 AM IST
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तीन लोगों की मौत के बाद अस्पताल में गमजदा बैठे परिचित।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में नेपाल से मजदूरों को लेकर शिमला जा रही एक मिनी बस अनियंत्रित होकर दिल्ली-पौड़ी मार्ग पर पेड़ से टकरा गई। हादसे में बस में सवार नेपाल निवासी तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 लोग गंभीर घायल हो गए। सभी घायलों को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने दो लोगों की हालत को गंभीर देखते हुए मेरठ के लिए रेफर कर दिया। चालक-परिचालक बस को मौके पर छोड़कर फरार हो गए।
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बुधवार की रात करीब ढाई बजे नेपाल के लोगों से भरी एक बस बिजनौर से होकर शिमला जा रही थी। बस में करीब 39 यात्री सवार थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दिल्ली-पौड़ी मार्ग पर बैराज रोड पर माउंट लिट्रा स्कूल के सामने अनियंत्रित होकर मिनी बस सड़क किनारे खड़े पेड़ से टकरा गई। इससे बस में सवार लोगों की चीख पुकार मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों के सहयोग से बस में सवार सभी घायलों को बमुश्किल बाहर निकाला और जिला अस्पताल मेें भर्ती कराया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान नेपाल के जिला रुकम निवासी बलबहादुर (40), अनिल रोका (26) और सबीन (20) की मौत हो गई। इसके अलावा नेपाल के पुड़नधारा जिला डांग निवासी तिलक, जिला रुकम निवासी उमेश, चंद्र प्रसाद, अर्जुन, दिनेश, रमेश, हरिवुड़ा, सेरमवुड़ा, ध्यान तथा वेरीगांगपुर जिला सुरखेत निवासी संतोष, बृजबहादुर, शोभा, हरिबहादुर, टुक हरेपा, होमर गंभीर रूप से घायल हो गए। चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल उमेश और चंद्र प्रसाद को मेरठ के लिए रेफर कर दिया। चालक और परिचालक मिनी बस को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। पुलिस बस को थाने ले आई है। शहर कोतवाल बिजेंद्र पाल राणा के मुताबिक मृतक और घायलों के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। बस में सवार सभी लोग काम करने के लिए शिमला जा रहे थे।
नेपाल के लोगों का पुलिस बनी सहारा
बिजनौर। मिनी बस के पेड़ से टकराने से हुए हादसे में घायल नेपाल के बाशिंदों की मदद के लिए पुलिस ही सहारा बनी। आसपास के लोग घायलों की मदद को आगे नहीं आए। पुलिस ने ही भूखे प्यासे इन लोगों को खाना खिलाया और उपचार कराने में जुटी रही। मिनी बस में सवार सभी लोग मजदूर तबके से है। सभी नेपाल से ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से भारत के लिए चले थे। ट्रैवल एजेंसी ने ही सबके शिमला के लिए टिकट बुक कराए थे। हादसे के बाद पुलिस को सूचना देने वाले राहगीर भी वहां से गायब हो गए। पुलिस ही घायलों का उपचार कराने में जुटी रही। पुलिस ने मृतक व घायलों के परिजनों को सूचना दे दी। शाम छह बजे तक परिजन नहीं आए थे। तीनों शवों का पोस्टमार्टम करा दिया गया था। पुलिस परिजनों के आने का इंतजार करती रही। घायलों और उनके साथी भूखे प्यासे रहे। उन लोगों के पास खाने पीने तक को पैसा नहीं था। पुलिस ने उन्हें खाना खिलाया। पुलिस दिन भर इन लोगों की मदद करने में जुटी रही। कोतवाल बिजेंद्र पाल राणा के मुताबिक सभी लोगों को खाना खिला दिया गया। घायलों के उपचार पर पुलिस की नजर है। पुलिस मदद के लिए नेपाल के लोगों के साथ खड़ी है। सभी लोग गरीब परिवार से है। ये मजदूरी करने के लिए शिमला जा रहे थे।
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परिवार का एकमात्र सहारा था अनिल
बिजनौर। हादसे में मरने वाले अनिल रोका की एक बूढ़ी मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। वह अपने परिवार का इकलौता सहारा था। अनिल के घायल साथी हरिबहादुर ने बताया कि वह नेपाल में ही अपने गांव के पास मजदूरी कर अपने परिवार की गुजर बसर कर रहा था। बच्चों की परवरिश अच्छी प्रकार हो, इसके लिए काम करने वह शिमला जा रहा था। वह पहले भी एक बार शिमला गया था। करीब एक साल पूर्व काम देखने के बाद अपने वतन को लौटा था। शिमला में अच्छे पैसों की नौकरी के बारे में अपने अन्य साथियों को भी बताया। इसके बाद उसके साथी शिवकुमार, अर्जुन और सोनू आदि भी उसके साथ शिमला के लिए चल दिए। सभी एक फैक्ट्री में पैकिंग कार्य करने के लिए जा रहे थे। जहां एक पेटी पैकिंग करने के 250 रुपये मिलते हैं।
परिजनों को दे दी गई खबर, मचा कोहराम
संतोषराज के अनुसार करीब 39 लोग एक अगस्त की शाम को करीब चार बजे मिनी बस में सवार होकर नेपाल से चले थे। उन्हें शिमला तीन अगस्त को पहुंचना था। मगर, होनी को कौन टाल सकता है। काम पर पहुंचने से पहले ही तीन लोगों की हादसे में मौत हो गई। बस सवार शिवकुमार ने बताया कि मृतकों के परिजनों को फोन कर सूचना दे दी गई है। परिजनों को बिजनौर पहुंचने में काफी समय लगेगा। मौत की खबर से मृतकों के परिजन सदमे में हैं। नेपाल के कई लोग बस सवार अपने परिजनों की कुशल क्षेम जानने में लगे हुए हैं। जबकि कुछ के पास न तो फोन है और न ही उनके परिजनों को सूचना है कि वे यहां फंसे हुए हैं।
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