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देश में जातियों और पार्टियों के नेता, सनातनियों का कोई सर्वमान्य नेता नहीं : स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज
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बिजनौर। अनायका विनश्यन्ति नश्यन्ति बहुनायका...चाणक्य नीति की इन लाइनों के साथ शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि देश में जातियों और पार्टियों के नेता हैं लेकिन सनातन धर्म और हिंदू धर्म का कोई सर्वमान्य नेता नहीं है। कहा कि मुझे सभी नेता नायक नहीं खलनायक दिखते हैं। उन्होंने विहिप के कार्यकर्ताओं को सत्ता की चमक-दमक से दूर रहने की सलाह दी। कहा कि आध्यात्मिक चेतना जागृत करके अशोक सिंघल के सपने को पूरा करें।
विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि चंपत राय को अशोक सिंघल के सानिध्य में रहने का अवसर मिला। चंपत राय इस विदुर भूमि के गौरव हैं, जिन्हें महात्मा विदुर का वंश अवतार कहना गौरव की बात होगी। कहा कि अशोक सिंघल का व्यक्तित्व बहुआयामी था। हमने उन्हें संघ के आदर्श प्रचारक, हिंदू समाज और राष्ट्र के नायक के तौर पर देखा है।
उन्होंने कहा कि नेता कभी अपने सिर पर चोट नहीं खाता है। अपने कार्यकर्ताओं को पिटवाता है लेकिन अशोक सिंघल के रक्त का गारा राम मंदिर की नींव में लगा है। उन्होंने कहा कि इतिहास लिख तो कोई भी सकता है लेकिन इतिहास वही बनाता है जो अपना रक्त दे सकता है। देश की भौगोलिक सीमाओं और इतिहास को बनाने के लिए अपने रक्त को बहाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मुझे क्षमा करें, नेताओं से मुझे ज्यादा प्यार है लेकिन खून देने वाले नेता देश में नहीं हैं।
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-नेता पांच साल, साधु अगली पीढ़ी का करते हैं विचार
स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि राममंदिर बन गया है, लोगों को प्रसन्न देखता हूं। हिंदू इतरा रहा है लेकिन आगे समय खतरनाक है। राजनेता पांच साल का विचार करते हैं लेकिन साधु-तपस्वी अगली पीढ़ी का विचार करते हैं। अशोक सिंघल ने विचार किया था। उनके व्यक्तित्व के पीछे आध्यात्मिक साधना थी। उनके विचारों को आगे बढ़ाना है। महाराज जी ने नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक सांप ने नेता को काट लिया, नेता का कुछ नहीं बिगड़ा मगर सांप मर गया। उन्होंने कहा कि सांप के एक फन में जहर होता है मगर नेता के हर फन में जहर होता है।
विकास में आध्यात्मिक चेतना जरूरी...
महाराज जी ने कहा कि सड़कें तो बनती रहेंगी। विकास होता रहेगा मगर आध्यात्मिक चेतना नहीं होगी तो विकास विनाश की ओर ले जाएगा। विहिप के लोगों से आग्रह करना चाहूंगा कि सत्ता दोधारी तलवार है। कोई समझ नहीं सकता कि किसकी है। न तेरी है न मेरी है। इसलिए सत्ता की अकड़, कुर्ते-पायजामे के कलफ की अकड़ और सत्ता की चमक से दूर रहें। कहा कि राम के जीवन में गुरु वशिष्ठ ने शास्त्र और गुरु विश्वामित्र ने शस्त्र का बोध कराया। इसलिए राम राम बन गए। उन्होंने तुलसीदास रचित दो पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि यह साल अशोक सिंघल की आरती और फूल चढ़ाने का नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना को जागृत करके उनके सपनों को पूरा करने का है। हम अशोक सिंघल जैसे नहीं हो सकते लेकिन गिलहरी की तरह अपना प्रयास कर सकते हैं। कहा कि गले में पड़ा पटका पटक भी देता है।
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विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि चंपत राय को अशोक सिंघल के सानिध्य में रहने का अवसर मिला। चंपत राय इस विदुर भूमि के गौरव हैं, जिन्हें महात्मा विदुर का वंश अवतार कहना गौरव की बात होगी। कहा कि अशोक सिंघल का व्यक्तित्व बहुआयामी था। हमने उन्हें संघ के आदर्श प्रचारक, हिंदू समाज और राष्ट्र के नायक के तौर पर देखा है।
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उन्होंने कहा कि नेता कभी अपने सिर पर चोट नहीं खाता है। अपने कार्यकर्ताओं को पिटवाता है लेकिन अशोक सिंघल के रक्त का गारा राम मंदिर की नींव में लगा है। उन्होंने कहा कि इतिहास लिख तो कोई भी सकता है लेकिन इतिहास वही बनाता है जो अपना रक्त दे सकता है। देश की भौगोलिक सीमाओं और इतिहास को बनाने के लिए अपने रक्त को बहाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मुझे क्षमा करें, नेताओं से मुझे ज्यादा प्यार है लेकिन खून देने वाले नेता देश में नहीं हैं।
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-नेता पांच साल, साधु अगली पीढ़ी का करते हैं विचार
स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि राममंदिर बन गया है, लोगों को प्रसन्न देखता हूं। हिंदू इतरा रहा है लेकिन आगे समय खतरनाक है। राजनेता पांच साल का विचार करते हैं लेकिन साधु-तपस्वी अगली पीढ़ी का विचार करते हैं। अशोक सिंघल ने विचार किया था। उनके व्यक्तित्व के पीछे आध्यात्मिक साधना थी। उनके विचारों को आगे बढ़ाना है। महाराज जी ने नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक सांप ने नेता को काट लिया, नेता का कुछ नहीं बिगड़ा मगर सांप मर गया। उन्होंने कहा कि सांप के एक फन में जहर होता है मगर नेता के हर फन में जहर होता है।
विकास में आध्यात्मिक चेतना जरूरी...
महाराज जी ने कहा कि सड़कें तो बनती रहेंगी। विकास होता रहेगा मगर आध्यात्मिक चेतना नहीं होगी तो विकास विनाश की ओर ले जाएगा। विहिप के लोगों से आग्रह करना चाहूंगा कि सत्ता दोधारी तलवार है। कोई समझ नहीं सकता कि किसकी है। न तेरी है न मेरी है। इसलिए सत्ता की अकड़, कुर्ते-पायजामे के कलफ की अकड़ और सत्ता की चमक से दूर रहें। कहा कि राम के जीवन में गुरु वशिष्ठ ने शास्त्र और गुरु विश्वामित्र ने शस्त्र का बोध कराया। इसलिए राम राम बन गए। उन्होंने तुलसीदास रचित दो पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि यह साल अशोक सिंघल की आरती और फूल चढ़ाने का नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना को जागृत करके उनके सपनों को पूरा करने का है। हम अशोक सिंघल जैसे नहीं हो सकते लेकिन गिलहरी की तरह अपना प्रयास कर सकते हैं। कहा कि गले में पड़ा पटका पटक भी देता है।